गलती का अहसास होने पर एसपी देहात को लेकर भी बदला नजरिया
गाजियाबाद। लोनी कोतवाली के निलंबित इंस्पेक्टर राजेंद्र त्यागी के सुर एकाएक बदल गए हैं। निलबंन के बाद सीनियर अधिकारियों पर सवाल उठाने वाले राजेंद्र त्यागी अब बैकफुट पर आ गए हैं। अपने खिलाफ हुई कार्रवाई को भी वह नियमानुसार बताने लगे हैं। एसएसपी पवन कुमार और एसपी (देहात) डॉ. ईरज राजा के खिलाफ अनगर्ल बयानबाजी करने का राजेंद्र त्यागी को अहसास हो गया है। दरअसल वह खुद विवादों में रह चुके हैं। लोनी में कुछ दिन पहले गोकशी के मामले में पुलिस मुठभेड़ में 7 आरोपियों को गोली लगने के बाद त्यागी एकाएक चर्चाओं में आ गए थे।
पुलिस मुठभेड़ पर सवाल उठने के बाद पहले उन्हें थाने से हटाया गया फिर निलंबित कर दिया गया था। बुरी तरह घिरने के बाद वह वह बैकफुट पर आ गए हैं। राजेंद्र त्यागी अब एसपी देहात डॉ. ईरज राजा को भी मेहनती, ईमानदार एवं उत्कृष्ट अधिकारी बता रहे हंै। एसएसपी के सीयूजी नंबर से विभागीय वाट्सएप गु्रप पर टिप्पणी लिखी गई हैं। दरअसल लोनी बॉर्डर थाने के पूर्व प्रभारी इंस्पेक्टर राजेंद्र त्यागी का इस मुठभेड़ के बाद एक फोटो वायरल हुआ था, जिसमें पकड़े गए 7 आरोपी बैठे थे। इनमें एक नाबालिग भी था। इन सभी के घुटने के निचले वाले हिस्से में लगभग एक ही स्थान पर पट्टी बंधी थी। सभी को इसी स्थान पर गोली लगी थी।
मुठभेड़ पर सवाल उठे तो एसएसपी ने राजेंद्र त्यागी को इंदिरापुरम थाने में इंस्पेक्टर क्राइम के पद पर भेजकर इनकी जगह सचिन कुमार को लोनी बॉर्डर थाना प्रभारी नियुक्त कर दिया। इसके बाद इंस्पेक्टर राजेंद्र त्यागी बगैर बताए छुट्टी चले गए और गैरहाजिर होने और विभागीय दस्तावेज जनरल डायरी (तस्करा) लीक करने को लेकर एसएसपी ने इन्हें निलंबित कर दिया था। इतना जल्दी राजेंद्र त्यागी के बैकफुट पर आ जाने और भाजपा विधायक नंदकिशोर गुर्जर से पूरे मामले को राजनीतिक रंग दिलाने के बाद अब फिर से इन पर सवाल उठ रहे है। खुद इंस्पेक्टर का कहना है कि मुठभेड़ पर उठ रहे सवालों के कारण एसएसपी ने उनका तबादला किया हो, ताकि निष्पक्ष जांच हो और मुझे क्लीन चिट मिलने के बाद कहीं और भेजा सके।
इन्होंने मुठभेड़ की सूचना एसपी देहात डॉ. ईरज राजा को नहीं दी थी। मैंने गलत किया था तो अधिकारियों को मौके पर आकर मुझसे पूछताछ करते। एसएसपी यदि मान सम्मान के साथ बुलाएंगे तो मैं आ जाऊंगा। हालांकि अभी मुझे खुद को ड्यूटी के लिए तैयार करना है और तब तक मुझे विभाग का एक भी पैसा नहीं चाहिए। नाबालिग को गोली मारने और उसकी कम उम्र की जानकारी होने के बाद भी उसे जेल भेज देने के मामले में इंस्पेक्टर राजेंद्र त्यागी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। पुलिस उसकी उम्र का पता करने के लिए बोन टेस्ट कराने की भी तैयारी कर रही है। उधर, एसपी देहात जहां ईमानदार छवि के कुशल अधिकारी हैं, वहीं वह शिकायतों के निपटारे में भी पूरी गंभीरता दिखाते हैं। गाजियाबाद में तैनाती के बाद से वह अपनी कार्यकुशलता का परिचय दे चुके हैं। एसपी देहात की वर्किंग की चर्चाएं लखनऊ तक होती हैं।
















