Tokyo Olympics का आगाज हो चुका है। भारत की बेटी Mirabai Chanu ने वेटलिफ्टिंग में सिल्वर पदक जीतकर धमाल मचा दिया है। मीराबाई की सफलता से प्रत्येक भारतीय खुद को गौरान्वित महसूस कर रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी खुशी जाहिर कर मीराबाई को बधाई दी है। इसके साथ Tokyo Olympics में भारत का खाता खुल गया है। कुछ और खिलाड़ियों से पदक जीतने की उम्मीदें लगाई जा रही हैं। इन खिलाड़ियों ने खुद की श्रेष्ठता को साबित करने के लिए काफी मेहनत की है। खिलाड़ियों ने अभ्यास सत्र में जमकर पसीना बहाया है।
Mirabai Chanu आज जिस मुकाम पर पहुंची हैं, उसके लिए उन्हें सैल्यूट किया जाना चाहिए। विकट परिस्थितियों का मुकाबला कर उन्होंने अपनी काबिलियत को साबित कर दिखाया है। कठिन परिश्रम कभी बेकार नहीं जाता। टोक्यो ओलंपिक में वेटलिफ्टिंग की 49 किलोग्राम श्रेणी में मीराबाई ने सिल्वर पदक लाकर दुनियाभर में देश का नाम रोशन किया है। इस खिलाड़ी का भविष्य बेशक आज सुनहरा है, मगर अतीत मुश्किलों भरा रहा। चुनौतियों का सामना करने के जज्बे ने उन्हें सफलता के शिखर पर चढ़ने में मदद की।
Mirabai Chanu ने अपनी जिंदगी में बेहद संघर्ष किया है। एक समय ऐसा भी था जब उनके पास अच्छी डाइट के लिए पैसे तक नहीं थे। वेटलिफ्टिंग का प्रशिक्षण शुरू करते समय मीराबाई के घर की माली हालत अच्छी नहीं थी। नतीजन उन्हें जरूरत के मुताबिक अच्छी अच्छी डाइट नहीं मिल पाती थी। डाइट में उन्हें प्रतिदिन दूध और चिकन की जरूरत होती थी, मगर साधारण परिवार से होने के कारण उनके लिए यह मुमकिन नहीं था। मणिपुर के इंफाल ईस्ट की निवासी Mirabai Chanu ने विषम हालातों के सामने खुद को कभी कमजोर नहीं पड़ने दिया। उनके गांव में वेटलिफ्टिंग के लिए प्रशिक्षण केंद्र तक नहीं था। अलबत्ता उन्हें घर से 50-60 किलोमीटर दूर जाकर प्रशिक्षण लेना पड़ता था। प्रशिक्षण केंद्र तक जाने-आने में उन्हें खासी परेशानी होती थी।
एक तथ्य यह भी है कि Mirabai Chanu बचपन में लकड़ियों का गट्ठर तक उठाती थीं। मीराबाई की मेहनत और संघर्ष बेकार नहीं गया। वह विगत 31 अगस्त 2015 को भारत रेलवे में नियुक्त हो गई। वर्तमान में वह सीनियर टिकटर कलेक्टर हैं। बेहतरीन खेल के लिए उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया जा चुका है। Mirabai Chanu का जीवन उदीयमान खिलाड़ियों के लिए किसी प्रेरणा से कम नहीं है। उभरते खिलाड़ियों को उनके जीवन से सीख लेने की जरूरत है। भारत में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। सिर्फ इन प्रतिभाओं को उभरने का मौका चाहिए। आर्थिक तंगहाली की वजह से अक्सर अच्छे खिलाड़ी खुद को साबित करने से चूक जाते हैं। खासकर गांवों में खेलकूद सुविधाओं का अभाव होता है। खिलाड़ियों को अभ्यास के लिए न सिर्फ संसाधन की जरूरत होती है बल्कि आस-पास ट्रेनर तक नहीं मिल पाते।
वैसे पिछले कुछ समय में देश एवं समाज में बेटियों के प्रति अभिभावकों का नजरिया बदला है। खेलों में बेटियों को बढ़ावा देने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसके सकारात्मक परिणाम भी सामने आने लगे हैं। खेल जगत में भारत की कई बेटियों ने अपनी श्रेष्ठता को साबित किया है। क्रिकेट, टेनिस, वेटलेफ्टिंग, हॉकी इत्यादि में बेटियां अब देश का नाम रोशन कर रही हैं। पीटी उषा, सानिया मिर्जा, पी.वी. सिंधू, दीपिका कुमारी, मिताली राज, कर्णम मल्लेश्वरी आदि खिलाड़ियों के नाम से हर कोई वाकिफ है। मिताली राज ने क्रिकेट जगत में अपनी अलग पहचान बनाई है। उनके प्रशंसकों की संख्या लाखों में है।
Mirabai Chanu की यह सफलता इसलिए भी काबिलेतारीफ है क्योंकि उन्होंने ओलंपिक में करीब 21 साल बाद भारत को पदक दिलाया है। उनके पहले कर्णम मल्लेश्वरी ने सिडनी ओलंपिक-2000 में देश को भारोत्तोलन (वेटलिफ्टिंग) में कांस्य पदक दिलाया था। Tokyo Olympics का आयोजन ऐसे वक्त में किया जा रहा है, जब पूरी दुनिया कोरोना संक्रमण का सामना कर रही है। कोरोना संक्रमण के कारण टोक्यो ओलंपिक के दौरान दर्शकों को एंट्री नहीं दी गई है। यानी दर्शकों की मौजूदगी के बगैर सभी स्पर्धाएं कराई जाएंगी। टोक्यो ओलंपिक में भारत की तरफ से 122 खिलाड़ियों का दल भेजा गया है। इन 122 खिलाड़ियों पर 139 करोड़ भारतीयों की उम्मीदों का भार है। विभिन्न स्पर्धाओं में देश को पदक मिलने की पूरी संभावना है। खेल प्रेमियों का मानना है कि यह खिलाड़ी उन्हें कतई निराश नहीं करेंगे।
तीरंदाजी में दीपिका कुमारी को पदक मिलने की उम्मीद है। भारत के खेल प्रेमियों को उस समय का इंतजार है, जब कई और खिलाड़ी अपनी काबिलियत के जरिए पदक बटोरेंगे। Tokyo Olympics में भाग लेने गए सभी खिलाड़ियों के कोरोना संक्रमण से मुक्त रहने की कामना भी करनी चाहिए। भारतीय खिलाड़ियों को प्रत्येक मुकाबले में अपना सर्वश्रेष्ठ देना होगा ताकि दुनियाभर में तिरंगे की शान को बढ़ावा मिल सके। Tokyo Olympics की देशभर में चर्चाएं हो रही हैं।
Mirabai Chanu के पदक जीतने से खेल प्रेमियों का उत्साह और बढ़ गया है। कोरोना संक्रमण काल में इसी प्रकार अच्छी खबरें मिलती रहनी चाहिए ताकि नागरिकों का तनाव भी कम हो सके। हमें अपने खिलाड़ियों पर पूरा भरोसा है। देशवासियों के भरोसे पर निश्चित रूप से खिलाड़ी खरे उतरेंगे। Tokyo Olympics पर कोरोना संक्रमण की मार नहीं पड़नी चाहिए। अन्यथा महत्वपूर्ण मुकाबलों पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। भारत की भारोत्तोलक Mirabai Chanu की कामयाबी से अन्य खिलाड़ियों का हौंसला भी बुलंद होगा। मीराबाई की तरह भारतीय खेमे में कई और अच्छे खिलाड़ी हैं। विदेशी धरती पर वह भारत का नाम रोशन करने में जरूर सफल होंगे। इन खिलाड़ियों के साथ देशवासियों का प्यार, भावना और शुभकामनाएं भी जुड़ी हैं। Tokyo Olympics से भारत के खिलाड़ी निराश होकर कतई नहीं लौटेंगे।
















