नोएडा एवं ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के अधिकारी पहुंचे
नोएडा। नोएडा एवं ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेस-वे पर री-सरफेसिंग का काम चल रहा है। गति धीमी होने के कारण यह काम निर्धारित समयसीमा में पूर्ण होने की संभावना नजर नहीं आ रही है। इस बीच नोएडा प्राधिकरण की तकनीकी ऑडिट कमेटी मंगलवार को कार्य का जायजा लेने पहुंची। ऑडिट कमेटी के साथ राइट्स कंपनी के प्रतिनिधि भी थे। संयुक्त टीम ने री-सरफेसिंग का गहनता के साथ निरीक्षण किया। गुणवत्ता की जांच के लिए सड़क का सैंपल भी एकत्र किया गया। यह टीम अपनी रिपोर्ट मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) को सौंपेगी। इस माह के आखिरी तक री-सरफेसिंग का काम पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया गया है। हालांकि तय समय में काम निपटने की उम्मीद कम है। इसकी वजह काम की गति धीमी होना है। नोएडा से ग्रेटर नोएडा की तरफ 12 किलोमीटर तक सड़क की सरफेस को उखाड़ा जा चुका है। जबकि ग्रेटर नोएडा से नोएडा की ओर 12 से 13 किलोमीटर की सरफेसिंग हो चुकी है। इस कार्य में करीब 61.53 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि हॉट इन प्लेस तकनीक पर इस सड़क की री-सरफेसिंग की जा रही है। नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेस-वे दिल्ली को जोड़ने का प्रमुख मार्ग है। इस मार्ग की सतह काफी खराब हो चुकी है। ऐसे में इसकी री-सरफेसिंग कराई जा रही है। इसमें सड़क सरफेस को 50 एम.एम. मोटाई में उखाड़ कर सामग्री को प्लांट में ले जाया जाता है। आवश्यकता अनुसार नवीन सामग्री मिलाकर पुन: लेयिग का काम किया जाता है। बिछाई गई लेयर पर 60 एम.एम. मोटाई में एसएमए का कार्य किया जा रहा है। 40 एम.एम. की एक लेयर और सड़क पर फाइनल टच के लिए बिछाई जाएगी। इस तकनीक से कार्य करने में लागत कम होती है। सड़क की मजबूती कई गुना बढ़ जाती है।
















