-बाहरी लाभार्थी एवं अधिक लीज बैक कराने वालों पर होगी जल्द कार्रवाई
ग्रेटर नोएडा। विशेष जांच दल (एसआईटी) ने ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के लीज बैक के मामलों की जांच पूरी कर ली है। जिसकी रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। एसआईटी ने 2192 मामलों की जांच की है।
जिन बाहरी लोगों ने लीज बैक का लाभ लिया है, उनके खिलाफ अब कार्रवाई होगी। तय सीमा से अधिक आबादी की जमीन छुड़वाने वाले भी इस कार्रवाई की जद में हैं।
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के तत्कालीन चेयरमैन डॉ. प्रभात कुमार ने शिकायत के बाद 2018 में बिसरख गांव के लीज बैक के 10 मामलों की जांच कराई थी। जांच में काफी गड़बडिय़ां पाई गई थीं। उन्होंने यह रिपोर्ट शासन को भेज दी थी। इन गड़बडिय़ों को देखते हुए शासन ने 10 जनवरी 2020 को ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के लीज बैक के सभी मामलों की जांच के लिए यमुना प्राधिकरण के सीईओ डॉ. अरुणवीर सिंह की अध्यक्षता में एसआईटी का गठन किया था। इस एसआईटी में ग्रेटर नोएडा और नोएडा प्राधिकरण के एसईओ सदस्य हैं। इसी साल दिसंबर में एसआईटी ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट शासन को भेजी। इसके बाद पिछले साल 9 दिसंबर को इस मामले की अंतरिम रिपोर्ट शासन को भेज चुका है। इसके बाद शासन ने बिना शासनादेश के व शासनादेश के बाद के मामलों की अलग और नियमावली के बाद के मामलों की अगल रिपोर्ट मांगी थी।
एसआईटी ने अपनी जांच पूरी कर ली है। अब नियमावली के बाद के मामलों की जांच हो गई है। यह रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। शासन और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण इस मामले में कार्रवाई करेगा। सूत्रों के मुताबिक, लीज बैक का लाभ लेने वाले बाहरी लोग और तय सीमा 3000 वर्ग मीटर से अधिक जमीन की लीज बैक कराने वाले कार्रवाई की जद में होंगे। सूत्रों का कहना है कि उनके खिलाफ एसआईटी ने कार्रवाई की सिफारिश की है। एसआईटी ने पहले चरण में बिना किसी शासनादेश व नियमावली के लीजबैक के मामलों और शासनादेश के आधार पर हुई लीज बैक की जांच कर चुका है। यह रिपोर्ट शासन को पहले भेजी जा चुकी है। बिना शासनादेश व नियमावली के खेड़ा चौगानपुर और बादलपुर में लीजबैक की गई। इसमें बादलपुर के 114 और खेड़ा चौगानपुर के 94 मामले हैं। एसआईटी की रिपोर्ट के बाद भी इस मामले में अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण इस मामले में बड़ी धीमी गति से काम कर रहा है। अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जितने मामलों की जांच पहले हो चुकी है, उसमें अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
तीन तरह के हैं लीज बैक के मामले
-बिना किसी शासनादेश और नियमावली के लीज बैक की गई। 2010 से पहले खेड़ा चौगानपुर व बादलपुर
में लीज बैक की गई। ऐसे मामलों की संख्या 208 है।
-24 अप्रैल 2010 में सरकार की ओर से शासनादेश जारी किया गया। उसके मुताबिक लीजबैक की गई। ऐसे मामले की संख्या 1451 है।
-7 अक्टूबर 2011 में लीजबैक की नियमावली बनाई गई। 2015 में इसमें संशोधन किया गया। नियमावली के बाद 533 मामलों में लीज बैक की गई।
















