बिल्डर ने किया खेल, यमुना प्राधिकरण ने चलाया हंटर

मैसर्स सिल्वर लाइन फर्निशिंग एंड फर्नीचर प्राइवेट लिमिटेड का 100 एकड़ का भूखंड आवंटन हुआ निरस्त

ग्रेटर नोएडा। हेरा-फेरी में माहिर बिल्डरों पर यमुना प्राधिकरण का शिकंजा कसता जा रहा है। प्राधिकरण के सीईओ डॉ. अरुणवीर सिंह द्वारा भूखंड आवंटन की शर्तों को पूरा नहीं करने वाले और कागजों में खेल करने वाले बिल्डरों पर जोरदार हंटर चलाया जा रहा है। बुधवार को एक ऐसे ही मामले में कार्रवाई करते हुए सीईओ ने एक बड़े बिल्डर का 100 एकड़ का भूखंड आवंटन निरस्त कर दिया। बिल्डर को 11 साल पहले प्राधिकरण से जमीन का आवंटन हुआ था। लेकिन ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट का काम शुरू नहीं किया। बिल्डर ने कंपनी के शेयर होल्डिंग पार्टनर में भी बदलाव कर दिया। जबकि प्राधिकरण की जमीन आवंटन की शर्त के मुताबिक ऐसा नहीं किया जा सकता है। आरओसी से डॉक्यूमेंट की जांच में प्राधिकरण को इसकी भनक लगी। जिसके बाद भूखंड आवंटन निरस्त करने की कार्रवाई की गई।

यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) ने नियमों का पालन न करने पर बिल्डर को जोर का झटका दे डाला है। यमुना प्राधिकरण ने ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट का सौ एकड़ भूखंड का आवंटन निरस्त कर दिया है। बिल्डर को जमा कुल धनराशि में सिर्फ 75 प्रतिशत लौटाए जाएंगे। 25 प्रतिशत धनराशि भी जब्त की जाएगी। समय पर प्रोजेक्ट पूरा नहीं करने और नियमों के विपरित मुख्य साझीदार को चेंज करने के कारण यह कार्रवाई की गई है। यमुना प्राधिकरण ने मैसर्स सिल्वर लाइन फर्निशिंग एंड फर्नीचर प्राइवेट लिमिटेड को 2011 में ग्रुप हाउसिंग के लिए भूखंड आवंटित किया था।

अब तक भूखंड का मानचित्र तक पास नहीं कराया गया है। इस पर लगभग 233 करोड़ रुपए बकाया है। इस परियोजना में अभी तक कोई खरीदार नहीं है। 100 एकड़ का यह भूखंड सेक्टर-18 में है। इस कंपनी में एमिनिटी बिल्डर्स एंड डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड, पीसी डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड, थ्रीसी यूनिवर्सल डेवलपमेंट प्राइवेट लिमिटेड, विस्तार कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड, दशमेश प्रमोटर्स एंड डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड एवं मेरिटॉन इंफोटेक प्राइवेट लिमिटेड शामिल है। इसमें एमिनिटी बिल्डर्स एंड डेवलपर्स प्रा.लि. मुख्य साझीदार था और इसकी 45 प्रतिशत की हिस्सेदारी है। पिछले ग्यारह साल से इस परियोजना में कोई कार्य नहीं हुआ है।

नक्शा तक नहीं पास कराया गया। इसके अलावा नियमों के विपरित कंपनी का लीड मेंबर बदल दिया गया। यमुना प्राधिकरण ने इस संबंध में बिल्डर को कई बार नोटिस भेजे, मगर कोई जवाब नहीं आया। बिल्डर पर इस साल अप्रैल तक 233.63 करोड़ रुपये बकाया है। इसमें प्रीमियम 154.53 करोड़, अतिरिक्त मुआवजा 63.45 करोड़ और लीज रेंट 15.65 करोड़ रुपये शामिल है। प्रोजेक्ट पूरा नहीं करने, पैसा जमा नहीं करने और लीड मेंबर बदलने के आरोप में भूखंड आवंटन निरस्त कर दिया गया।

यमुना प्राधिकरण अब बिल्डर के जमा पैसा का करीब 25 प्रतिशत जब्त करेगा। 36.12 करोड़ रुपये जब्त कर बाकी पैसा वापस कर दिया जाएगा। नियमों के मुताबिक प्रोजेक्ट का पहला चरण पूरा होने तक लीड मेंबर बदला नहीं जा सकता है। लीड मेंबर को बदले जाने की जानकारी प्राधिकरण को भी नहीं दी गई।