-बिहार की मिट्टी, किसान, रोजगार और विकास के मुद्दों पर मनीष कुमार वर्मा से हुई ऐतिहासिक वार्ता- अब सिर्फ वादे नहीं, बदलाव की ठोस पटकथा तैयार
उदय भूमि संवाददाता
पटना। बिहार में विधानसभा चुनाव 2025 की सरगर्मी अपने चरम पर है और इसी सियासी माहौल में एक प्रखर, जमीनी और दूरदर्शी आवाज फिर से गूंजने लगी है वह आवाज है जनसेवक तरुण मिश्र की। गुरुवार को पटना प्रवास के दौरान उन्होंने पूर्व आईएएस अधिकारी और जनता दल (यूनाइटेड) के राष्ट्रीय महासचिव मनीष कुमार वर्मा से उनके आवास पर विस्तृत और मुद्दों से लबरेज संवाद किया। यह केवल एक शिष्टाचार मुलाकात नहीं थी, बल्कि बिहार के भविष्य की गहरी नींव को और मजबूत करने की पहल थी। तरुण मिश्र ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बिहार के किसान आज भी बिजली, खाद, सिंचाई और तकनीक जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। उन्होंने सरकार की तरफ से घोषित 100 यूनिट मुफ्त बिजली को बताया कहा कि इतनी बिजली न तो घर चला सकती है, न खेत। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब तक किसानों को बिल्कुल मुफ्त या सब्सिडाइज बिजली नहीं दी जाएगी, तब तक खेती घाटे का सौदा बनी रहेगी।
पटना। बिहार में विधानसभा चुनाव 2025 की सरगर्मी अपने चरम पर है और इसी सियासी माहौल में एक प्रखर, जमीनी और दूरदर्शी आवाज फिर से गूंजने लगी है वह आवाज है जनसेवक तरुण मिश्र की। गुरुवार को पटना प्रवास के दौरान उन्होंने पूर्व आईएएस अधिकारी और जनता दल (यूनाइटेड) के राष्ट्रीय महासचिव मनीष कुमार वर्मा से उनके आवास पर विस्तृत और मुद्दों से लबरेज संवाद किया। यह केवल एक शिष्टाचार मुलाकात नहीं थी, बल्कि बिहार के भविष्य की गहरी नींव को और मजबूत करने की पहल थी। तरुण मिश्र ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बिहार के किसान आज भी बिजली, खाद, सिंचाई और तकनीक जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। उन्होंने सरकार की तरफ से घोषित 100 यूनिट मुफ्त बिजली को बताया कहा कि इतनी बिजली न तो घर चला सकती है, न खेत। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब तक किसानों को बिल्कुल मुफ्त या सब्सिडाइज बिजली नहीं दी जाएगी, तब तक खेती घाटे का सौदा बनी रहेगी।
मिश्र ने खाद की कालाबाजारी, मिट्टी परीक्षण की अनुपलब्धता, और कृषि विभाग की निष्क्रियता को भी तीखे शब्दों में उठाया। उन्होंने कहा कि आज भी किसान पुराने औजारों और पुरानी पद्धति से खेती कर रहा है, क्योंकि सरकार ने ‘स्मार्ट एग्रीकल्चर’ को सिर्फ फाइलों में सीमित कर दिया है। उन्होंने मांग की कि प्रत्येक गांव में सक्रिय एग्रीकल्चर मोबाइल यूनिट बने, जो प्रत्येक पंचायत में हो और किसानों की जमीन की जांच कर तुरंत समाधान दे। रोजगार और पलायन पर बोलते हुए तरुण मिश्र ने बिहार की सबसे बड़ी पीड़ा को सामने रखा। उन्होंने दो टूक कहा कि जब तक यहां बड़े उद्योग, टेक्सटाइल पार्क, एग्री इंडस्ट्रीज, स्किल यूनिवर्सिटी नहीं आएंगी, तब तक पलायन रुकेगा नहीं। बिहार के नौजवानों को आज भी रोज़गार के लिए दिल्ली, पंजाब, महाराष्ट्र या गुजरात जाना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि बिहार बदलेगा तब, जब बिहारियों को अपने ही प्रदेश में ही काम मिलेगा। मिश्र की इन बातों को सुनकर मनीष कुमार वर्मा न केवल गहराई से प्रभावित हुए, बल्कि उन्होंने आश्वासन भी दिया कि उनकी सरकार बनते ही इन मुद्दों को प्राथमिक एजेंडा में शामिल किया जाएगा। मनीष वर्मा ने कहा बिहार की तस्वीर बदलने का वक्त आ गया है। हम केवल इमारतें नहीं, सपने खड़े करेंगे। आपकी आवाज अब हमारी सरकार की नीति बनेगी। बिहार का केवल चेहरा नहीं, इसकी सोच और व्यवस्था दोनों बदलेगी। इस वार्ता ने यह साफ कर दिया है कि तरुण मिश्र केवल एक सामाजिक कार्यकर्ता नहीं, बल्कि बिहार के परिवर्तन के प्रेरक बनकर उभर रहे हैं। वह न किसी राजनीतिक लाभ के लिए बोलते हैं, न मंच सजाने के लिए बल्कि उनकी आवाज उन खेतों से आती है जहां किसान पसीना बहा रहा है, उन घरों से आती है जहां बेटा रोजगार की तलाश में शहर छोड़ गया है।
















