सपा की अंदरुनी जंग, अरमानों को करेगी भंग

बड़े नेताओं और छोटे नेताओं के बीच छाया है ईगो

बड़े नेताओं के आगे छोटे नेताओं का बढ़ रहा कद

एक दूसरे की चुनावी गतिविधियों की जानकारी देने हैं कतराते

अश्वनी शर्मा
उदय भूमि, बरेली। शहर की सपा जिला कमेटी हो या महानगर कमेटी या पुराने सपा के बड़े नेता सभी के बीच अंदरुनी जंग चलने की सुगबुगाहट कानों कान सुनाई देने लगी है। खास बात तो यह है कि आपसी अंदरुनी जंग की आग तभी सुलगती है जब शहर में चुनावी सरगर्मी की गतिविधियां तेज होती हैं। पिछले लोक सभा चुनाव में भी सपाइयों की आपसी अंदरुनी जंग खुलकर सामने आ गई थी। अब 2022 के चुनावी माहौल के बीच एक बार फिर से सपाइयों की आपसी जंग की आग अभी से सुलगने लगी है।
एक ओर सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव मिशन 2022 की तैयारी में जी जान से जुटे हैं। इसके लिए समय समय पर अखिलेश यादव प्रदेश स्तर से लेकर जिला स्तर पर दिशा निर्देश भी दे रहे हैं। अब भले ही अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष के दिशा निर्देशों का पालन करने के लिए धरना प्रदर्शन और स्वागत समारोह के माध्यम से सपाई एकता का परिचय देते दिख रहे हों।लेकिन हकीकत यही है कि अंदर ही अंदर गुटबाजी की जड़ें फैलनी शुरू हो गई हैं। सपा पार्टी को बरेली शहर में सींचकर राजनीति की जमीन पर विशालकाय वृक्ष बनाने वाले बुजुर्ग नेताओं और आज के युवा सपा पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं के बीच ईगो की जंग की सुगबुगाहट ने पैर पशारने शुरू कर दिए हैं। आलम यह है कि एक दूसरे की चुनावी गतिविधियों की जानकारी देने से भी कतराने लगे हैं। शायद वो आपस में नहीं चाहते हैं कि सामने वाला लाइम लाइट में आए। पिछले दस दिन की सपाइयों की गतिविधियों से भी यही लग रहा है कि छोटे सपा नेता व पदाधिकारी खुदको आगे रखना चाहते हैं, वहीं पुराने व सपा के वरिष्ठ नेताओं के दिल में इस बात का मलाल है कि उन्हें सम्मान से पूछा भी नहीं जा रहा है। यह गुटवाजी हाल फिलहाल में शुरू नहीं हुई है। बल्कि पिछले लोक सभा चुनाव के दौरान चाचा भतीजा के बीच हुई रार का परिणाम है। उस वक्त भी शहर में सपाई दो फाड़ नजर आए थे। आज भी शायद वही रार की आग सुलग रही है। उस समय के घर बैठाए गये कई सपा नेता खुदको उभारने के सपने संजोए बैठे हैं कि कभी तो लहर आएगी जो उन्हें उम्मीदों की नाव पर बिठाकर उनकी सही मंजिल तक पहुंचाएगी। खैर, अब यह तो वक्त ही तय करेगा कि अखिलेश यादव के मिशन 2022 जीतने का सपना यथार्थ की जमीन पर कितना सच साबित होगा।