लेखक:- डॉ पीएन अरोड़ा
(वरिष्ठ समाजसेवी एवं यशोदा सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल कौशांबी के मैनेजिंग डायरेक्टर हैं और राजनीतिक एवं सामाजिक विषयों पर बेबाकी से राय रखते हैं।
ऐसे में जब कोरोना के ओमिक्रॉन वैरिएंट का खतरा पूरे विश्व में मंडरा रहा है, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बच्चों के लिए वैक्सीनेशन के कार्यक्रम का प्रारंभ होना काफी बड़ी राहत की खबर है, जिससे स्कूली बच्चों एवं उनके माता-पिता व परिवारजनों को कोविड-19 के खतरे से बचाया जा सकता है। प्रधानमंत्री के इस फैसले के साथ भारत विश्व के उन अग्रणी देशों में शामिल हो गया है, जहां एक और तो बच्चों को भी वैक्सीनेशन दिया जा रहा है और दूसरी तरफ हेल्थ केयर वर्कर और सीनियर सिटीजन को बूस्टर डोज भी लगाई जा रही है। 2022 के नए वर्ष की शुरूआत इससे अच्छी खबर से नहीं हो सकती।
स्वास्थ्य कर्मी कोविड-19 के इलाज में लगे रहते हैं और उन्हें सबसे पहले खतरा होता है। ऐसे में बूस्टर डोज से उन्हें होने वाले खतरे को बहुत हद तक टाला जा सकता है। साथ अब हेल्थ केयर वर्कर एक नई ऊर्जा से कोविड-19 से लड़ने के लिए तैयार हो जाएंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने इसी के साथ चिकित्सा जगत द्वारा की जा रही बूस्टर डोज की मांग को भी पूरा कर दिया है। भारतवर्ष के लिए प्रधानमंत्री मोदी का यह कदम ऐतिहासिक है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने दक्षिण अफ्रीका में मिले कोरोना वायरस के नए स्ट्रेन को चिंता का कारण माना है। नए स्ट्रेन का नाम ओमीक्रॉन रखा गया है। ओमीक्रॉन ग्रीक वर्णमाला का 15वां अक्षर है। कोरोना के नए स्ट्रेन को लेकर दुनियाभर में दहशत तारी है। अमेरिका, कनाडा, जर्मनी सहित कई देशों ने नए स्ट्रेन से निपटने के लिए जरूरी और सख्त कदम उठा दिए हैं।
डब्ल्यूएचओ की सलाहकार समिति ने दक्षिण अफ्रीका में पहली बार मिले कोरोना वायरस के नए प्रकार को बेहद तेजी से फैलने वाला चिंताजनक प्रकार करार दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ओमीक्रान स्ट्रेन का संक्रमण अत्याधिक तेजी से फैलता है। इसके अलावा ये वैक्सीन के असर को भी कम या समाप्त कर सकता है। दक्षिण अफ्रीका में चौबीस नवम्बर को नए स्ट्रेन की तस्दीक हुई थी। हालांकि कुछ हेल्थ विशेषज्ञ की राय थोड़ी अलग है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के और भी नए वैरिएंट अभी सामने आते रहेंगे। इसलिए किसी भी नए स्ट्रेन से घबराने की जरूरत नहीं है। दुनिया में जब भी इस तरीके की कोई महामारी आती है खासतौर से वायरस, तो उसके स्वरूप बदलते रहते हैं।
कोरोना वायरस के मामले में भी यह प्रक्रिया अनवरत जारी है। अब तक इसके बहुत से बदले स्वरूप सामने आ चुके हैं। वैज्ञानिकों ने कहा है कि कोरोना के इस नए स्ट्रेन में देखे गए करीब 32 म्यूटेशन इसे बेहद संक्रामक बनाते हैं। म्यूटेशन की संख्या जितनी ज्यादा होगी, वायरस के प्रतिरक्षा से बचने की संभावना भी उतनी ही अधिक होती है। स्ट्रेन में इतनी बड़ी संख्या में म्यूटेशन साफ रूप से सिंगल बर्स्ट में जमा हुआ है, इससे पता चलता है कि यह कमजोर प्रतिरक्षा के नागरिकों में पुराने संक्रमण के दौरान विकसित हो सकता है। यह कितना संक्रामक है, फिलहाल इस बारे में साफ नहीं कहा जा सकता है।
हालांकि यह निश्चित है कि अब तक के तमाम स्ट्रेन की तुलना में यह काफी खतरनाक हो सकता है। इसकी बारीकी से निगरानी और विश्लेषण किया जाना चाहिए। यह अब तक के सबसे खतरनाक डेल्टा की तुलना में एंटीबॉडी को चकमा देने में ज्यादा सक्षम हो सकता है। मतलब जिन नागरिकों का टीकाकरण हो चुका है, यह उनके लिए भी बड़ी मुश्किलें पैदा कर सकता है।
विशेषज्ञों की अभी यही सलाह है कि वायरस की श्रृंखला को तोड़ने के लिए कोविड से जुड़े नियमों का पालन करना जैसे मास्क लगाना, सामाजिक दूरी, सभी साझा स्थानों में अच्छा वेंटिलेशन और हाथों व सतहों को धोना या साफ करना जारी रखा जाए। कुल मिलाकर कोरोना के नए स्ट्रेन को लेकर बेवजह बेचैन होने से अच्छा है कि हम कोरोना प्रोटोकॉल का भली-भांति पालन करें। साथ दूसरों को भी इसके लिए प्रोत्साहित किया जाए। जरूरी नियमों का पालन कर बीमारी को पास आने से रोका जा सकता है। चूंकि किसी भी स्तर पर बरती गई लापरवाही जीवन पर भारी पड़ सकती है।
















