रैना तो बहाना है उद्देश्य ब्राह्मणों को निपटाना है

लेखक : तरुण मिश्र

(समाजसेवी एवं राजनीतिक चिंतक हैं। राजनीतिक और सामाजिक विषयों पर लिखते हैं। देश-विदेश में आयोजित होने वाले व्याख्यानों में एक प्रखर वक्ता के रूप में जाने जाते हैं। वर्तमान में अखिल भारतवर्षीय ब्राह्मण महासभा के राष्ट्रीय महामंत्री हैं।)

Tarun Mishra
लेखक – तरुण मिश्र

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व क्रिकेटर सुरेश रैना को आजकल फिजूल के विवाद में घेर लिया गया है। रैना का कसूर सिर्फ यह है कि खुद के ब्राह्मण होने पर वह गर्व महसूस करते हैं। उनके इस विचार के खिलाफ सोशल मीडिया पर मानो तूफान मच गया। विरोधियों ने उन पर एकाएक आक्रमण कर दिया। सोशल मीडिया पर इस पूर्व क्रिकेटर की लानत-मलानत करने में कोई कसर नहीं छोड़ी गई। हालाकि उनके बचाव में भी कुछ नामचीन चेहरे सामने आए हैं।
पूर्व क्रिकेटर कीर्ति आजाद ने रैना का समर्थन किया है। आजाद ने ट्विटर पर लिखा है कि मैं भी ब्राह्मण हूं। आपत्ति कैसी भाई ? उन्होंने कहा कि मुझे जाति प्रमाण पत्र रखने और आरक्षण का लाभ लेने वालों से कोई समस्या नहीं है। मेरे ब्राह्मण होने पर गर्व करने पर किसी को आपत्ति क्यों होनी चाहिए? हिंदुओं के घरों में सभी सनातनी अनुष्ठान और कर्म कांड ब्राह्मण द्वारा किए जाते हैं। नफरत क्यों ? मैं भी ब्राह्मण। दरअसल इस पूरे विवाद की शुरुआत तमिलनाडु प्रीमियर लीग (टीएनपीएल) मैच में सुरेश रैना द्वारा कमेंट्री के दरम्यान किए गए कमेंट के साथ शुरु हुई। रैना ने कहा था कि वह एक ब्राह्मण हैं। नतीजन उन्हें चेन्नई की संस्कृति को अपनाने में ज्यादा मुश्किलों का सामना नहीं करना पड़ा। रैना इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में चेन्नई सुपर किंग्स टीम की तरफ से खेलते हैं। पूर्व क्रिकेटर का जातिवादी बयान कुछ नागरिकों को नागवार गुजरा। उन्होंने रैना पर खेल में जातिवाद की भावना को लाने का आरोप मढक़र सोशल मीडिया पर अनाप-शनाप टिप्पणी करनी शुरू कर दी। विवाद और तब बढ़ गया, जब चेन्नई सुपर किंग्स (सीएसके) के रैना के साथी खिलाड़ी रविंद्र जडेजा ने ऐसा ट्वीट कर दिया। रविंद्र जडेजा ने ट्विटर पर लिखा कि हमेशा राजपूत ब्वॉय, जय हिंद। सोशल मीडिया पर सुरेश रैना और रविंद्र जडेजा को खूब ट्रोल किया गया। वैसे देखा जाए तो पूरे देश में आज ब्राह्मण समाज के खिलाफ एक माहौल सा बनाया जा रहा है, जिसका ताजा उदाहरण सुरेश रैना का है। आज स्थिति यह है की सबकी अपनी-अपनी ढपली है और सबका अपना-अपना राग है। फिर क्यों यह बवाल मचा है ? कोई अगर यह कहता है कि मैं फलां जाति का हूं, फलानी बिरादरी का हूं तब किसी को कोई आपत्ति नहीं होती। अगर सुरेश रैना ने यह कह दिया की मैं ब्राह्मण हूं तो इस पर इतना बवाल क्यों मचा है ? क्या ब्राह्मण की हालत यह हो गई है कि वह अब अलग देश की मांग करें ? क्या इस देश में ब्राह्मण वर्ग का रहना खतरे से खाली नहीं है? जिस तरह की घटनाएं आए दिन हो रही हैं और जिस तरह से व्यवहार किया जा रहा है, चाहे वह राजनीतिक दृष्टि से हो, चाहे औद्योगिक नजरिए से, ब्राह्मणों का स्थान अब धीरे-धीरे शून्य की ओर बढ़ रहा है। क्या ब्राह्मण को अपनी जाति बताने का भी अधिकार नहीं रहा है? अगर क्रिकेट की बात करें तो क्रिकेट में भी कई ऐसे ब्राह्मण खिलाड़ी रहे हैं, जिन्होंने अपनी काबिलियत के जरि देश का नाम पूरे विश्व में प्रख्यात किया है। जिसका उदाहरण महान क्रिकेटर सचिन तेंदूलकर और बीबीएस लक्ष्मण हैं। सचिन तेंदूलकर ने बेहतरीन क्रिकेट के जरिए दुनियाभर में भारत को ख्याति दिलाई है। आज ऐसी स्थिति क्यों पैदा हो गई है ? देश में लोकतंत्र, प्रजातंत्र समेत सभी तंत्र ने यह मान लिया है कि ब्राह्मणों को यहां से निकाल भगाना है और किसी लायक नही छोडऩा है। ब्राह्मण इस देश की संस्कृति को दिशा देता रहा है। अब स्थिति यह है कि राजनीतिक दलों ने ब्राह्मण वर्ग को सिर्फ एक वोट बैंक बनाकर रख दिया है। जिसका दोषी पूरा पॉलीटिकल सिस्टम है। आज की स्थिति में कहीं भी ब्राह्मणों को किसी भी सरकार में लेने से पहले उसकी बहुत चर्चा होती है। जबकि अन्य बिरादरी की इतनी चर्चा नहीं होती है। ब्राह्मण विरोधी मानसिकता अच्छी नहीं है। यह देश और समाज के लिए बेहद खतरनाक है।

Tarun Mishra And Suresh Raina
एक कार्यक्रम में अखिल भारतवर्षीय ब्राह्मण महासभा के राष्ट्रीय महामंत्री तरुण मिश्र के साथ अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर सुरेश रैना

ब्राह्मणों ने हमेशा अपनी योग्यता का लोहा मनवाया है। कठिन परिश्रम और काबिलियत के दम पर वह समाज में अपना अलग स्थान रखते हैं। काफी समय पहले लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने ब्राह्मण समाज के योगदान की प्रशंसा की थी। इस पर भी कुछ नागरिकों को मिर्ची लग गई थी। सोशल मीडिया पर ओम बिरला को घेरने की कोशिश की गई। देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने हाल ही में ब्राह्मण सम्मेलनों की शुरुआत की है। 2007 में ब्राह्मण मतों के बूते बसपा सुप्रीमो आसानी से सत्ता तक पहुंच गई थीं। पूर्व क्रिकेटर सुरैश रैना के खिलाफ सोशल मीडिया पर माहौल बनाने वालों को पहले अपने भीतर झांकने की जरूरत है। उन्हें ब्राह्मण समाज के गौरवशाली इतिहास को भी पढऩा चाहिए। सिर्फ विरोध के लिए विरोध करने से कुछ हासिल नहीं होगा। इससे समाज में वैमनस्य की भावना बढ़ेगी। समय आ गया है कि ब्राह्मण समाज को एकजुट होकर विरोधियों को मुंहतोड़ जबाव देना होगा।