पाकिस्तान में शरीफ फैमिली की मौज

पाकिस्तान की सत्ता से प्रधानमंत्री इमरान खान बेदखल हो चुके हैं। साढ़े तीन साल के कार्यकाल में वह हमेशा विवादों में घिरे रहे। पाकिस्तान को भ्रष्टाचार मुक्त, आतंकवाद मुक्त बनाने, महंगाई पर लगाम लगाने और विदेशी कर्ज को कम करने जैसे लुभावने वायदे कर सत्ता में आए इमरान एक भी मोर्चे पर सफल नहीं रहे। पाकिस्तान में सुधार करने की बजाए वह दिन-रात कश्मीर का राग अलापने में मशगूल रहे। इमरान खान के सत्ता से जाने के बाद शरीफ फैमिली की मौज जरूर आ गई है। पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के भाई शहबाज अब पाकिस्तान के नए पीएम बन सकते हैं।

इसके साथ पाकिस्तान के पूर्व पीएम नवाज शरीफ अगले माह ईद के बाद लंदन से स्वदेश लौट सकते हैं। ऐसी संभावना अब जाहिर की जा रही है। अविश्वास प्रस्ताव के जरिए इमरान खान की सरकार गिरने के बाद देश में राजनीतिक बवंडर के बीच पीएमएल (एन) की तरफ से यह जानकारी सामने आई है कि नवाज शरीफ की जल्द अपने वतन में वापसी संभव है। पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) सुप्रीमो और तीन बार प्रधानमंत्री रहे शरीफ की वापसी पर फैसला गठबंधन सहयोगियों के साथ चर्चा कर लिया जाना है।

सभी फैसले पहले गठबंधन के घटक दलों के समक्ष रखे जाएंगे। ईद मई के पहले सप्ताह में मनाई जाएगी। शरीफ को जुलाई 2017 में पाकिस्तान के उच्चतम न्यायालय ने पनामा पेपर्स मामले में प्रधानमंत्री पद से बर्खास्त कर दिया था, जिसके बाद से उनके खिलाफ इमरान खान के नेतृत्व वाली तत्कालीन सरकार ने भ्रष्टाचार के कई मामले शुरू किए हैं। शरीफ इलाज कराने के वास्ते नवंबर 2019 में चार सप्ताह के लिए लंदन गए थे। उन्हें लाहौर उच्च न्यायालय ने विदेश जाने की इजाजत दी थी।

उन्होंने उच्च न्यायालय में हलफनामा दिया था कि डॉक्टर चार सप्ताह के अंदर या इससे पहले जैसे ही उन्हें सेहतमंद और सफर करने के लिए उपयुक्त घोषित करेंगे, वह वैसे ही मुल्क लौट आएंगे। शरीफ को अल-अजीजिया मिल्स भ्रष्टाचार मामले में भी जमानत मिल गई थी, जिसमें वह लाहौर की कोट लखपत जेल में सात साल की कैद की सजा काट रहे थे।

राजनीतिक अनिश्चितता से पाकिस्तान बाहर आ पाएगा या नहीं, इस पर चर्चाएं जोरों पर चल रही हैं। कुछ जानकारों का मानना है कि गठबंधन सरकार छह माह से ज्यादा नहीं चल पाएगी और मौजूदा संकट का एकमात्र समाधान नए सिरे से चुनाव कराना है। चुनाव सुधारों का काम भी होना है। इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) और विदेशी मताधिकार से संबंधित मसले दो मुख्य मुद्दे हैं, जिन्हें जल्द से जल्द हल किया जाना है।