– नगर निगम की शहर में मौजूद 828 हेक्टयेर जमीन का जीयो सर्वे से खुलेगा राज
उदय भूमि ब्यूरो
गाजियाबाद। नगर निगम के पास संपत्ति की कोई कमी नहीं है। कमी है तो उस संपत्ति की रक्षा करने वालों की। इस कमी का फायदा भू-माफियाओं ने खूब उठाया। राजनैतिक संरक्षण एवं निगम अधिकारियों के लचर रवैये के कारण अरबों रुपये की सरकारी जमीन पर भू-माफियाओं ने कब्जा कर लिया। वर्षों पुराने इस कब्जे का पता लगाना आसान नहीं है। ऐसे में म्युनिसिपल कमिश्नर महेंद्र सिंह तंवर ने टेक्नोलॉजी की मदद से सरकारी जमीन का पता लगाने और फिर उसे कब्जा मुक्त कराने का निर्णय लिया है। शहर में कहां पर कितनी जमीन है, इसमें कितनी जमीन पर भू-माफिया ने कब्जा कर रखे है। इस सबका का पूरा पता जीये सर्वे के जरिये लगाया जाएगा। नगर निगम ने जियो मैपिंग शुरू कर दी है। जियो सर्वे रिपोर्ट आने के बाद भू-माफियाओं का काला चिट्ठा खुल जाएगा और उनके खिलाफ कार्रवाई का हंटर चलेगा।
नगर निगम के संपत्ति विभाग के रिकॉर्ड के मुताबिक शहर में नगर निगम की 828 हेक्टेयर जमीन हैं। इनकी कीमत कई अरब रुपये है। मगर विडंबना है कि नगर निगम के जमीन का अधिकांश हिस्सा भू-माफियाओं के कब्जे में है। कई जगहों पर भू-माफिया ने अवैध प्लाटिंग भी कर दी है। भू-माफिया अभी भी नगर निगम की जमीन कब्जाने से नहीं रूक रहे हैं। जानकार बताते हैं कि यदि सरकारी जमीन से कब्जा हटवा लिया जाये तो गाजियाबाद नगर निगम प्रदेश की सबसे अमीर संस्थाओं में शामिल हो जाएगी। नगर निगम की इन्हीं सरकारी जमीनों की खोज करने और भू-माफियाओं पर कार्रवाई करने की तैयारी हो रही है। सरकारी जमीनों की जीयो सर्वे और जीयो मैपिंग कराई जाएगी। जियो मैपिंग होने के बाद जमीन की वास्तवित स्थिति का पता चल सकेगा।

जमीन कब्जामुक्त कराने के बाद दोबारा उस पर कब्जा होने के मामले आते रहे हैं। ऐसे में इस समस्या से निपटने के लिए कब्जामुक्त कराई गई जमीन पर वेडिंग जोन, पार्किंग और नर्सरी बनाई जाएगी। इससे शहर में अवैध पार्किंग और जाम की समस्या से निपटने में भी मदद मिलेगी। म्युनिसिपल कमिश्नर महेंद्र सिंह तंवर न्यू विजन के साथ कम रहे हैं। म्युनिसिपल कमिश्नर का उद्देश्य शहर की व्यवस्था को बेहतर बनाने के साथ-साथ गाजियाबाद नगर निगम को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है। इसके लिए निगम की आमदनी बढ़ाने का भी प्लान तैयार किया गया है। नगर निगम की जमीनों को कब्जामुक्त कराने के साथ-साथ नगर निगम की दुकानों एवं अन्य संपत्तियों को भी कब्जामुक्त कराया जाएगा। नगर निगम की किराए पर 1250 दुकानें हैं। इन दुकानों को नगर निगम द्वारा किराये पर दिया गया है। लेकिन किराया औना-पौना है और इन दुकानों में से अधिकांश दुकानों पर मूल आवंटी का कब्जा ना होकर दूसरे लोगों का कब्जा है। कई मूल किरायेदारों ने इसे किसी दूसरों को किराये पर दे दिया है। सर्वे में इसका भी पता लगाया जाएगा और दुकानों को सबलेट करने वालों के आवंटन कैंसिल किए जाएंगे। सर्वे का कार्य पूरा होने के बाद मार्केट रेट पर दुकानों को मासिक किराए के आधार पर नगर निगम द्वारा आवंटित कियाा जाएगा। इसके लिए टेंडर जारी किए जाएंगे। टेंडर में अधिक से अधिक रेट पर दुकानें आवंटित की जाएगी।
नगर निगम के पास बेहिसाब जमीन है। लेकिन उन जमीनों पर कब्जा है। जीयो सर्वे के जरिये जमीन का पता लगाकर
उसे खाली कराया जाएगा। नगर निगम की जमीन कब्जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। निगम की जमीन पर फिर से कब्जा ना हो इसके लिए वहां नर्सरी लगाई जाएगी। शहर में पार्किंग की समस्या को देखते हुए पार्किंग जोन बनाया जाएगा। इसके अलावा सरकार की योजनाओं को अमलीजामा पहनाने के लिए उसका इस्तेमाल होगा। दुकानों से नगर निगम को होने वाली आमदनी बढ़ाने के लिए भी सर्वे कराया जा रहा है। निगम की दुकानों से भी अवैध कब्जा हटाया जाएगा।
महेंद्र सिंह तंवर
म्युनिसिपल कमिश्नर
गाजियाबाद।
















