ब्याज दर पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार
ग्रेटर नोएडा। बिल्डरों से बकाया वसूली में ब्याज दर पर शुक्रवार को सुप्रीम फैसला आने की उम्मीद है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सभी को बेसब्री से इंतजार है। बिल्डरों से मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स बेस्ड लेंडिंग रेट (एमसीएलआर) के हिसाब से ब्याज वसूलने अथवा नहीं लेने पर यह फैसला होना है। कोर्ट का निर्णय ग्रेटर नोएडा के लगभग डेढ़ लाख फ्लैट खरीदारों को भी प्रभावित करेगा।
दरअसल ब्याज दर के कारण बिल्डरों ने प्राधिकरण को बकाया राशि का भुगतान नहीं किया है। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण क्षेत्र में 197 बिल्डर प्रोजेक्ट हैं। इसमें 50 का कार्य पूर्ण हो चुका है। शेष 147 परियोजनाओं में करीब करीब डेढ़ लाख फ्लैट खरीदार हैं। सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण से बिल्डरों से बकाया वूसली में 2010 से एमसीएलआर की दर से पैसा लेने का आदेश दिया था। एमसीएलआर का निर्धारण रिजर्व बैंक करता है। इसमें एक प्रतिशत जोड़कर प्राधिकरण बिल्डरों से बकाया वसूली करे। इस फैसले पर पुनर्विचार करने को नोएडा एवं ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण सुप्रीम कोर्ट गए थे। इस पर बहस पूर्ण हो चुकी है।
अब शुक्रवार को कोर्ट का निर्णय आने की उम्मीद है। बिल्डर और प्राधिकरण दोनों की जनरें इस फैसले पर हैं। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण का बिल्डरों पर करीब 12 हजार करोड़ रुपये बकाया है। कोर्ट ने प्राधिकरण के पक्ष में निर्णय नहीं दिया तो उसे करीब 8 हजार करोड़ रुपये का नुकसान होगा। ऐसे में प्राधिकरण आर्थिक संकट में आ जाएगा। विकास कार्यों पर भी प्रतिकूल असर पड़ेगा। जबकि बिल्डर एमसीएलआर की दर से बकाया देने के लिए तैयार हैं। बकाया नहीं जमा करने के चलते ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण पूर्णता प्रमाण पत्र नहीं दे रहा है। यही कारण है कि खरीदारों की रजिस्ट्री नहीं हो पा रही हैं।
















