रोप-वे प्रोजेक्ट, जीडीए ने वित्त मंत्रालय को भेजा प्रस्ताव

गाजियाबाद। वैशाली (मेट्रो ब्लू लाइन) से मोहन नगर (मेट्रो रेड लाइन) के मध्य प्रस्तावित रोप-वे को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। जीडीए द्वारा इस संबंध में केंद्रीय वित्त मंत्रालय को प्रस्ताव भेजा गया है। रोप-वे के लिए ट्रैक बनाया जाना है। मंजूरी मिलने के बाद यह कार्य तत्काल आरंभ करा दिया जाएगा। केंद्र सरकार से 20 प्रतिशत की फंडिंग को अनुमति मिलने के बाद वित्त मंत्रालय को जीडीए ने रोप-वे के संदर्भ में प्रस्ताव भेज दिया है। वित्त मंत्रालय द्वारा करीब 90 करोड़ रुपए रोप-वे प्रोजेक्ट के लिए दिए जाएंगे।

इस प्रोजेक्ट के लिए जल्द कंपनी का चयन कर लिया जाएगा। केंद्रीय राज्यमंत्री वी.के. सिंह की अध्यक्षता में कुछ दिन पहले बैठक आयोजित की गई थी। बैठक में रोप-वे प्रोजेक्ट को पबिल्क प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मोड से शुरू करने पर सहमति बन गई थी। मेट्रो ट्रेन की तर्ज पर केंद्र सरकार 20 फीसदी फंड देगी। जबकि रोप-वे का निर्माण करने वाली एजेंसी 60 फीसदी या इससे अधिक खर्च करेगी। बाकी खर्च जीडीए वहन करेगा। फंडिंग पैटर्न के साथ डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) को मंजूरी देने के लिए जीडीए की प्रस्तावित बोर्ड बैठक में इसका प्रस्ताव रखा जाएगा।

जीडीए उपाध्यक्ष कृष्णा करूणेश के प्रयास से रोप-वे प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए जीडीए अधिकारी इसमें जुटे हुए हैं। केंद्र सरकार से इसके लिए फंड की डिमांड की गई थी। इस पर सहमति बनने के बाद अब उम्मीद है कि वित्त मंत्रालय से 90 करोड़ रुपए की धनराशि मिलने के बाद जल्द रोप-वे का निर्माण कार्य शुरू हो सकेगा। जीडीए के चीफ इंजीनियर एसके सिन्हा ने बताया कि केंद्रीय वित्त मंत्रालय में रोप-वे प्रोजेक्ट का प्रस्ताव जमा करा दिया गया है। वैशाली से मोहननगर के बीच 5.17 किलोमीटर लंबे रोप-वे प्रोजेक्ट की डीपीआर और उसके फंडिंग पैटर्न पर निर्णय होने के बाद कंपनी का चयन किया जाएगा।

रोप-वे की डीपीआर में कुल 450 करोड़ रुपए की लागत तय की गई हैं। इसमें पीपीपी मॉडल पर रोप-वे तैयार किया जाएगा। उन्होंने बताया कि रोप-वे प्रोजेक्ट के फंडिंग पैटर्न का प्रस्ताव जीडीए बोर्ड बैठक में भी मंजूरी के लिए रखा जाएगा ताकि बोर्ड सदस्यों को रोप-वे प्रोजेक्ट व फंडिंग पैटर्न से अवगत कराया जा सके। वैशाली से मोहननगर के बीच चलने वाली रोप-वे की तैयार की गई डीपीआर में यह रूट करीब 5.17 किलोमीटर लंबा होगा। करीब डेढ़ किलोमीटर पर एक स्टेशन होगा। इस रूट पर कुल चार स्टेशन बनाए जाएंगे। जहां से यात्री रोपवे पर सवार हो सकते हैं। वहीं एक टर्न स्टेशन भी बनाया जाएगा।

वहीं, मेट्रो की रेड और ब्लू लाइन से रोपवे को जोडऩे के लिए स्टेशनों के बीच फुट ओवर ब्रिज बनाए जाएंगे। जीडीए चीफ इंजीनियर ने बताया कि रोप-वे के जरिए इस रूट पर 8 से 12 मिनट में सफर होगा। जबकि सड़क से 30 से 40 मिनट तक लगते हैं। रोप-वे के शुरू होने के बाद यह प्रोजेक्ट अगले दो साल में पूरा होगा। इसका कंपनी मेट्रो ट्रेन की दर पर ही किराया वसूल सकेगी। अंतिम फैसला प्रोजेक्ट तैयार होने के बाद ही तय होगा। इसकी मियाद एमओयू में स्पष्ट रूप से खोली जाएगी। वहीं, इस रूट पर चलने वाली रोपवे के एक कैरिएज में 10 यात्रियों के एक साथ बैठने की सुविधा होगी। रोप-वे की डीपीआर में वैशाली से मोहननगर के बीच चार स्टेशन प्रस्तावित है।

इसमें वैशाली, वसुंधरा, साहिबाबाद और मोहननगर स्टेशन हैं। जहां से यात्री रोप-वे पर सवार हो सकते हैं। वहीं एक टर्न स्टेशन भी बनाया जाएगा। हालांकि यहां से सिर्फ रोप-वे को टर्न ही कराने की सुविधा रखी जाएगी।रोप-वे प्रोजेक्ट के शुरू होने के बाद हजारों लोगों को इसका लाभ मिलेगा। मोहननगर से रोपवे के जरिए वैशाली पहुंचकर ब्लू लाइन मेट्रो पकड़ सकते हैं। इससे लोगों को सीधे फायदा होगा। इस रोप-वे प्रोजेक्ट में केंद्र सरकार की 20 फीसद फंडिंग होगी। रोप-वे प्रोजेक्ट पीपीपी मॉडल पर होगा। इसमें मेट्रो की तरह ही 20 फीसदी अंंशदान केंद्र सरकार करेगी। जबकि पीपीपी मोड पर तैयार होने वाले इस प्रोजेक्ट में कंपनी 60 फीसदी या इससे ज्यादा अंशदान कर सकती है। इसके अलावा बाकी धनराशि जीडीए द्वारा खर्च की जाएगी।