गाजियाबाद। एंटी करप्शन ब्यूरो मेरठ एवं मुरादाबाद की टीम द्वारा रिश्वत के आरोप में कनिष्ठ लिपिक देवी शरण की गिरफ्तारी के बाद से गाजियाबाद नगर निगम में खलबची मची है। बाबू को गाजियाबाद से गिरफ्तार कर एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम अपने साथ मेरठ ले गई है। जहां उसे कोर्ट में पेश किया गया। कनिष्ठ लिपिक की गिरफ्तारी से यह बात साबित हो गई है कि नगर निगम में भ्रष्टाचार की जड़ें काफी गहरी हैं। खासकर गृहकर विभाग में रिश्वतखोरी का आलम चरम पर है।
नगर निगम के रामप्रस्थ क्षेत्रीय कार्यालय से एंटी करप्शन टीम ने शुक्रवार को कनिष्ठ लिपिक देवी शरण को गिरफ्तार किया था। आरोप है कि देवी शरण ने हाउस टैक्स कम करने के नाम पर 15 हजार रुपए की रिश्वत मांगी थी। वैशाली निवासी प्रदीप कुमार ने इस संबंध में एंटी करप्शन विभाग से शिकायत की थी। एंटी करप्शन मेरठ यूनिट के निरीक्षक विजय कुमार सिंह के मुताबिक वैशाली निवासी प्रदीप गुप्ता की पत्नी प्रियंका के नाम से रामप्रस्थ में मकान है। 2014 से वह हाउस टैक्स का भुगतान कर रहे हैं, मगर किसी कारण से उनके कागजात में परेशानी आने लगी थी।
गुप्ता ने हाउस टैक्स में सुधार कराने के लिए नगर निगम के क्षेत्रीय कार्यालय में संपर्क साधा था। आरोप है कि कनिष्ठ लिपिक देवी शरण ने समस्या का निदान करने की एवज में 15 हजार सुविधा शुल्क की डिमांड की। सुनवाई न होने पर पीड़ित ने लखनऊ एंटी करप्शन में लिखित शिकायत की। बाद में मेरठ और मुरादाबाद की टीम ने पूरी योजना बनाकर बाबू को रंगे-हाथों दबोचने की रणनीति तैयार की। इसके लिए नोटों पर अलग तरह का कलर लगाया गया ताकि बाबू के खिलाफ ठोस मिल सकें।
बाबू की गिरफ्तारी के बाद जांच नगर निगम में एकाएक हड़कंप मच गया। जांच टीम ने नगर निगम के क्षेत्रीय कार्यालय और आरोपी की गाड़ी से मकान के कागजात भी बरामद किए। बाद में बाबू को लिंक रोड थाने ले जाया गया। वहां एफआईआर दर्ज कराकर पूछताछ की गई। पूछताछ में आरोपी बाबू ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है।
















