अरिहंत ट्रस्ट की फिर चलें गांव की ओर वेबिनार आयोजित

देश की खुशहाली के लिए शहरी बुराइयों को गांवों में आने से रोकना जरूरी

गाजियाबाद। गांव कल्पनाओं में अच्छे लगते हैं लेकिन हकीकत यह है कि शहरी बुराइयों गांवों में आ रही हैं और गांव की अच्छाइयां खत्म होने लगी हैं। इन बुराइयों को गांवों में आने से रोकना होगा। तभी देश खुशहाल बन सकता है। सभी वक्ता ‘फिर चलें गांव की ओरÓ विषय पर अपने-अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। यह बातें गुरूवार को मेवाड़ ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस में अरिहंत चेरिटेबल एजुकेशल ट्रस्ट की ओर से आयोजित वेबिनार में वक्ताओं ने कही। अध्यक्षता मेवाड़ ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के चेयरमैन डॉ. अशोक कुमार गदिया ने की। हैवेल्स इंडिया लिमिटेड के वाइस प्रेजीडेंट आरपी जैन मुख्य तो प्रखर विचारक व वरिष्ठ पत्रकार राजकुमार भाटी विशिष्ट अतिथि रहे। अरिहंत ट्रस्ट की संस्थापक अध्यक्ष डॉ. अलका अग्रवाल ने सभी अतिथि वक्ताओं का स्वागत तो कवि व पत्रकार डॉ. चेतन आनंद से संचालन भार संभाला। अपने उद्बोधन में आरपी जैन ने कहा कि आज गांव पिछड़ रहे हैं, शहर विकसित हो रहे हैं। इस कारण गांवों से लोगों का लगातार पलायन हो रहा है। इसे रोकना होगा। उन्होंने कहा कि शहरों में 90 प्रतिशत मजदूर गांव-देहात से हैं, ज्यादा कमाने की ललक या रोजगार की तलाश उन्हें बरबस शहरों की ओर खींच रही है। शहरों में शांति नहीं है। तनाव बहुत बढ़ गया है। राजकुमार भाटी ने कहा कि गांव की अच्छाइयां तो दम तोडऩे लगी हैं और शहरों की बुराइयां गांवों में प्रवेश कर रही हैं। शहर की सड़ी-गली सब्जियां व पॉलीपैक दूध की थैलियां गांवों में आने लगी हैं। इसे अब ग्रामीण अपनी आजीविका चलाने का साधन मानने लगे हैं। डॉ. अशोक कुमार गदिया ने कहा कि गांवों में डॉक्टर नहीं आता। आता है तो अपना कहीं ओर तबादला करवा लेता है। यही हाल सरकारी शिक्षक का भी है। हालत यह है कि हमारी आजीविका आज भी गांवों से चल रही है लेकिन बच्चों को पढ़ाने के लिए शहरों में आना पड़ता है। सरकारें गांवों के विकास पर खर्च ही नहीं कर रहीं। सरकारें वहां दस रुपये लगा देंगीं जहां से उन्हें सौ रुपये की कमाई होती दिखाई देगी। इसलिए हमें अपना माइंड सेट बदलना होगा। डॉ. अलका अग्रवाल ने कहा कि इसके लिए एक सार्थक पहल करने की आवश्यकता है। एक ऐसा मंच तैयार करने की जरूरत है, जहां विद्वानों के विचारों का आदान-प्रदान हो। उन विचारों को संकलित किया जाए। उनके विचारों के संकलन के आधार पर ठोस योजना को अमलीजामा पहनाया जाये। जिसके लिए एक गांव गोद लेकर उसे आदर्श गांव बनाया जाए।