खादर में धधक रही कच्ची शराब की भट्टियों पर चला आबकारी विभाग का हंटर

  • नदी किनारे एवं खेत में रखे कच्ची शराब के ड्रमों को किया जब्त
  • 170 लीटर अवैध कच्ची शराब बरामद एवं 2300 किलोग्राम लहन किया नष्ट

गाजियाबाद। जनपद के हिंडन खादर क्षेत्र कच्ची शराब बनाने का धंधा कुटीर उद्योग के रूप में विकसित हो चुका है। लेकिन आबकारी विभाग की टीम हिंडन खादर क्षेत्र में बन रही कच्ची शराब के कारोबार को जड़ से खत्म करने के लिए लगातार कार्रवाई करती है। जिसका परिणाम भी सकारात्मक देखने को भी मिलता है। आबकारी विभाग की कार्रवाई में शराब माफिया को करीब 40 से 50 हजार रुपए का नुकसान उठाना पड़ता है। कार्रवाई के कुछ दिन बाद फिर से शराब माफिया कच्ची शराब का कारोबार शुरु कर देते है। जिसकी भनक पास की चौकी व थाना पुलिस को नही लगती है या फिर सब जानकर अंजान बने बैठे है। क्योंकि अब तक की कार्रवाई में देखने को मिला है कि जब भी आबकारी विभाग को हिंडन खादर क्षेत्र में कच्ची शराब बनाने की सूचना मिलती है तो वह कार्रवाई करने पहुंच जाती है। मगर उनके पहुंचने से पहले ही शराब माफिया मौके से फरार हो जाते है।

जिस तरह से आबकारी विभाग का मुखबिर तंत्र सतर्क दिखाई दे रहा है तो ठीक उसी तरह शराब माफिया का भी मुखबिर तंत्र शातिर है। लेकिन इन सबके बीच क्षेत्रीय पुलिस कभी भी इस कारोबार को खत्म करने में अपनी रुचि नही दिखाते। अधिक नशेदार शराब बनाने के चक्कर मे कच्ची शराब के माफिया द्वारा नित्य नये-नये प्रयोग करके शराब निकालने के कच्चे माल लहन में मानव जीवन के लिये हानिकारक जहरीली दवाओं, खादों तक का इस्तेमाल करते है। जिनसे कच्ची शराब में अनलिमिटेड नशा तो होता है बल्कि अक्सर शराब के शौकीन लोगों के सेहत के साथ भी खिलवाड़ कर उन्हे मौत के मुंह में ढ़केलने काम करते है। इन सबसे बचने के लिए आबकारी विभाग की टीम कार्रवाई करने के साथ-साथ जागरुकता अभियान भी चलाती है। जिससे लोग अवैध शराब के सेवन से बच सकें। आबकारी विभाग की टीम ने एक बार फिर हिंडन खादर क्षेत्र में बन रही कच्ची शराब की भट्टी को तोड़ते हुए कच्ची शराब एवं लहन बरामद किया है।

शराब माफिया ने आबकारी विभाग की कार्रवाई से बचने के लिए कच्ची शराब से भरे ड्रमों को नदी किनारे एवं खेतों में छिपाया हुआ था, जिसे टीम ने खोजकर बाहर निकाला और भट्टी को ध्वस्त करते हुए लहन को मौके पर नष्ट कर दिया। उत्तर प्रदेश शासन एवं आबकारी आयुक्त उत्तर प्रदेश के आदेश के क्रम में डीएम राकेश कुमार सिंह एवं एसएसपी मुनीराज जी. के निर्देशन में संयुक्त आबकारी आयुक्त मेरठ जोन एवं उप आबकारी आयुक्त मेरठ प्रभार के पर्यवेक्षण में आबकारी टीम द्वारा अवैध शराब के निर्माण एवं बिक्री की रोकथाम के लिए सोमवार को कार्रवाई की गई।


जिला आबकारी अधिकारी राकेश कुमार सिंह ने बताया कि सोमवार सुबह आबकारी निरीक्षक अनुज वर्मा की टीम ने थाना टीला मोड़ एवं थाना लोनी के महमूदपुर, मथुरापुर, शेरपुर, महमूदपुर,रिस्तल, सीती और भूपखेड़ी के जंगल एवं हिंडन खादर क्षेत्र में संदिग्ध स्थलों पर दबिश दे कर गहन तलाशी की गयी। दबिश के दौरान लगभग 170 लीटर अवैध कच्ची शराब एवं 2300 किलोग्राम लहन एवं करीब 12 ड्रम व दो कैन बरामद किया गया। बरामद कच्ची शराब को कब्जे में लेते हुए लहन को मौके पर नष्ट किया गया। आबकारी अधिनियम की सुसंगत धाराओं के तहत तीन अभियोग पंजीकृत किया गया।

जिला आबकारी अधिकारी ने बताया कि शराब माफिया नदी किनारे शराब की भट्टियां लगाकर कच्ची शराब बनाने का कारोबार करते है। मगर आबकारी विभाग द्वारा माफिया पर जब छापेमारी की जाती है तो उससे पहले ही शराब माफिया के लोग नदी में कूदकर फरार हो जाते है। जनपद में शराब माफिया पर कार्रवाई के लिए विभाग कोई कसर नहीं छोड़ रहा है। शराब माफिया का चक्रव्यूह तोडऩे को निरंतर प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। इसके बेहतर परिणाम भी सामने आ रहे हैं। विभाग द्वारा समय-समय पर ऐसे लोगो के खिलाफ कार्रवाई की जाती है। जिस भूमि पर भट्टी जल रही होती है, उसके मालिक का पता लगाकर उसपर कार्रवाई के लिए लिखा जाता है।

बरामद कच्ची शराब एवं लहन में शराब माफिया को करीब 50 हजार रुपए तक नुकसान हुआ है। क्योंकि कच्ची शराब बनाने में उपकरण एवं सामाग्री समेत 40 से 50 हजार रुपए का खर्च आता है। शराब माफिया कच्ची शराब को 200 एमएल की बोतल व पाउच में भरकर 23 से 30 रुपए में बेचते है। ग्रामीण क्षेत्र में कच्ची शराब के सेवन से बचने के लिए विभाग द्वारा जागरुकता अभियान भी चलाया जा रहा है। जिसका नतीजा यह है कि कहीं भी कच्ची शराब बनाने का कारोबार होता है तो सूचना मिल जाती है। सभी की जागरुकता से ही इस अवैध शराब कारोबार को जड़ से खत्म किया जा सकता है।