केंद्रीय मंत्री की शाबाशी से टीबी चैम्पियन राजकुमार के हौसले हुए और बुलंद

अब तक 300 से अधिक मरीजों को टीबी से मुक्ति दिलाने में बने मददगार

गाजियाबाद। 18 वर्षों से लगातार टीबी उन्मूलन के लिए काम करते हुए अब तक 300 से अधिक मरीजों को टीबी मुक्त करने में मदद करने वाले राजकुमार के हौसले तब और भी बुलंद हो गए जब केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने उन्हें शाबाशी दी। राजकुमार सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च संस्था के सहयोग से 21 नवंबर को दिल्ली में आकाशवाणी के एक कार्यक्रम हिस्सा लेने पहुंचे थे। कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री ने उनके संघर्ष की कहानी को विस्तार से सुना और उनके हौसले की प्रशंसा की। स्मृति ईरानी ने कहा आपका काम बहुत प्रशंसनीय है। आप अपनी तरह दूसरे और लोगों को प्रोत्साहित कर उन्हें टीबी चैंपियन बनाकर देश को टीबी मुक्त बनाने की इस मुहिम में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करें। उन्होंने लोगों का आह्वान किया कि टीबी को हरा चुके लोग राजकुमार से प्रेरणा लेकर टीबी मुक्त भारत अभियान में अपना सहयोग प्रदान करें। आकाशवाणी पर यह कार्यक्रम 29 नवंबर को प्रसारित होगा। राजकुमार बताते हैं कि स्मृति ईरानी का स्नेह पाकर वह गदगद हैं।

टीबी के खिलाफ काम करने का उनका जज्बा अब कई गुना बढ़ गया है। करीब एक माह पूर्व 30 अक्टूबर को संयुक्त जिला चिकित्सालय में एक कार्यक्रम के दौरान उप-मुख्यमंत्री बृजेश पाठक भी राजकुमार से मिले थे और टीबी के खिलाफ काम का जज्बा देख उन्हें बड़े प्यार से दुलारा था। राजकुमार बताते हैं कि बचपन से ही उनका जीवन संघर्षपूर्ण रहा है। दो-तीन साल की उम्र में दाएं पैर पर पोलियो का वार हुआ और 70 प्रतिशत दिव्यांग हो गए। लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। 10वीं पास करने के बाद राजकुमार को 15 साल की उम्र में टीबी ने घेर लिया। बात वर्ष 2005 की है जब उन्हें टीबी की बीमारी हुई, लेकिन नियमित उपचार और खानपान का ध्यान रखते हुए वह छह माह में टीबी से ठीक हो गए। इसके साथ ही टीबी उन्मूलन के लिए उनका संघर्ष शुरू हो गया।

राजकुमार बताते हैं उस समय डा. विकास भारतेंदु जिला क्षय रोग अधिकारी हुआ करते थे। पैर से दिव्यांग होने के कारण टीबी केंद्र पर जाने में होने वाली परेशानी को देखते हुए राजकुमार को घर पर ही दवा उपलब्ध कराई गई। अब मुझे सरकार से एक रोगी के उपचार पर एक हजार रुपए मिलते हैं लेकिन शुरुआत में ऐसी स्थिति नहीं थी। जज्बा पैसे का मोहताज नहीं होता। राजकुमार, सीएमओ डा. भवतोष शंखधर के स्नेह और सीनियर ट्रीटमेंट सुपरवाइजर नीरज शर्मा और वरिष्ठ प्रयोगशाला पर्यवेक्षक संजय यादव से मिलने वाले लगातार सहयोग के लिए शुक्रिया करना नहीं भूलते।