पर्यावरण संरक्षण सबकी नैतिक जिम्मेदारी: मोहन भागवत

गाजियाबाद। आज हम पर्यावरण सुरक्षा का लक्ष्य लेकर स्वच्छ वातावरण की परिकल्पना को साकार करने के लिए एकत्रित हुए है। स्वच्छ पर्यावरण हमारा अधिकार है और शुद्ध एवं सुरक्षित वातावरण को बनाए रखना हमारा कर्तव्य। पर्यावरण प्रहरी के रूप में हर शख्स को आगे बढ़ते हुए दृढ़ निश्चय के साथ यह संकल्प लेना है
कि पर्यावरण को किसी भी रूप से दूषित न होने दें। अधिक से अधिक पौधरोपण करते हुए हम प्रकृति के प्रति अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं। यह बातें गुरूवार को आरएसएस की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की दो दिवसीय बैठक के अंतिम दिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भावगत ने कहीं। उन्होने देशवासियों से पर्यावरण संरक्षण के लिए एकजुट होकर काम करने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि विश्व बिरादरी को पर्यावरण संकट से बचाने के लिए देश के हर नागरिक को जिम्मेदारी उठानी होगी। स्वयंसेवकों से मोहन भागवत ने कहा कि इस समय विश्व के सामने सबसे बड़ा संकट पर्यावरण संरक्षण का है। शहरों का आकार बढ़ रहा है और पेड़ घट रहे हैं। हमें पर्यावरण का संतुलन बनाए रखना है। इसके लिए हर देशवासी पौधारोपण जरूर करें। पेड़ लगाओ, पानी बचाओ और पालीथिन हटाने की संकल्पना पर विचार करना होगा। यह सब दृढ़ इच्छाशक्ति से ही संभव होगा। उन्होंने कहा कि समरसता बनी रहे, यह हिंदू समाज की नितांत आवश्यकता है। वर्तमान में विश्व के साथ-साथ अपना देश भी कोरोना की चपेट में आया हुआ है। अब तक संघ ने कोरोना काल में देशवासियों की हरसंभव मदद की है। संघ को इसी तरह भविष्य में भी कार्य करना है। बैठक में संघ के वर्तमान कार्य की समीक्षा के साथ ही आगामी कार्यक्रमों पर विचार किया गया। स्वदेशी, कुटुंप्रबोधन जैसे सामाजिक सरोकार के विषयों पर चितन किया गया। इस अवसर पर सरकार्यवाह भय्याजी जोशी, सहसरकार्यवाह दत्तात्रेय जे होसबले, डॉ. कृष्ण गोपाल, डॉ. मनमोहन वैद्य, मुकुंद और ब्रज, मेरठ और उत्तराखंड प्रांत के कार्यकारी मंडल के सदस्य उपस्थित रहे।