-क्रय-विक्रय और हस्तांतरण पर मुख्यालय से मार्गदर्शन लेने का दिया निर्देश
-जिलाधिकारी के निर्णय से आढ़तियों में खुशी की लहर, तालियों की गडग़ड़ाहट से गूंजा सभागार
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। साहिबाबाद मंडी समिति में पिछले माह 70 दुकानों को मंडी सचिव द्वारा नोटिस दिए जाने के प्रकरण में जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार माँदड़ ने हस्तक्षेप करते हुए तत्काल प्रभाव से सभी नोटिस निरस्त कर दिए। इस निर्णय की घोषणा जिलाधिकारी की अध्यक्षता में आयोजित निर्णायक बैठक के दौरान की गई, जिसमें मंडी सचिव सहित संबंधित अधिकारियों और आढ़तियों ने भाग लिया। बैठक के दौरान मंडी सचिव सुनील कुमार शर्मा ने जिलाधिकारी को जानकारी दी कि दुकानों के आवंटन का अधिकार दुकान आवंटन समिति के पास है, जिसका अध्यक्ष जिलाधिकारी ही हैं। समिति द्वारा आवंटित दुकानों का हस्तांतरण या क्रय-विक्रय किसी भी हालत में नहीं किया जा सकता। यदि कोई दुकानदार अपनी दुकान नहीं रखना चाहता है, तो उसे समिति को समर्पित करना होगा और उसके बाद ही पुन: आवंटन किया जा सकेगा। जिन दुकानदारों ने नियमों का उल्लंघन कर दुकानों का हस्तांतरण या क्रय-विक्रय किया था, उन्हें नोटिस जारी किए गए थे।
बैठक में उपस्थित दुकानदारों और आवंटियों ने यह भी कहा कि 2008 से पूर्व आवंटित दुकानों के मामले में हस्तांतरण या क्रय-विक्रय से संबंधित कोई स्पष्ट नियम नहीं था और उस समय मण्डी सचिव के पास ही अधिकार निहित था। उन्होंने जिलाधिकारी से निवेदन किया कि उनके साथ न्याय किया जाए। जिलाधिकारी ने सभी बयानों को ध्यानपूर्वक सुना और स्पष्ट किया कि नोटिस को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए। उन्होंने मंडी सचिव को निर्देशित किया कि विभागीय मुख्यालय से मार्गदर्शन प्राप्त कर केवल उसके बाद किसी भी कार्यवाही पर निर्णय लिया जाए। साथ ही, आवंटियों को यह भी कहा गया कि 2008 से पूर्व हस्तांतरण से संबंधित सभी दस्तावेज प्रस्तुत करें।
जिलाधिकारी के इस निर्णय के बाद आढ़तियों में खुशी की लहर दौड़ गई, उन्होंने तालियां बजाकर अपना उत्साह व्यक्त किया और जिलाधिकारी की सराहना की। सभागार तालियों की गडग़ड़ाहट से गूंज उठा, और उपस्थित प्रत्येक व्यापारी ने जिलाधिकारी की तारीफ में नहीं चूकें। बैठक में सिटी मजिस्ट्रेट डॉ. सन्तोष कुमार उपाध्याय, आईएएस श्री अयान जैन, जिला सूचना अधिकारी योगेन्द्र प्रताप सिंह सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे। इस निर्णय से साहिबाबाद मंडी में दुकानदारों और आढ़तियों को न्याय की भावना मजबूत हुई और भविष्य में व्यापारिक विवादों के शीघ्र समाधान की उम्मीद जगी।
















