-नंदी पार्क गौशाला में स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने रचा कमाल, दिये, अगरबत्ती और लक्ष्मी-गणेश प्रतिमाओं की बिक्री से दीपावली का त्योहार बना और भी खास
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। दीपावली के शुभ अवसर पर गाजियाबाद नगर निगम ने इस बार पारंपरिक और पर्यावरण-संवेदनशील तरीके से त्यौहार मनाने का संदेश दिया। नगर निगम के नंदी पार्क गौशाला में गाय के गोबर से बने उत्पादों का भव्य स्टॉल स्थापित किया गया, जिसमें दिये, सुगंधित धूपबत्ती, अगरबत्ती, हवन सामग्री, लक्ष्मी जी और गणेश जी की प्रतिमाएँ उपलब्ध कराई गईं। इस पहल में स्वयं सहायता समूह की महिलाओं का योगदान विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा।
नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक ने बताया कि पिछले वर्षों की भांति इस वर्ष भी नगर निगम द्वारा दीपावली के अवसर पर स्वच्छता, पारंपरिकता और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि नंदी पार्क गौशाला में गाय के गोबर से तैयार किए गए दिये, हवन सामग्री और मूर्तियों का निर्माण स्वयं सहायता समूह की 100 महिलाओं द्वारा किया गया। महिलाओं को 10-10 के 10 ग्रुपों में बांटकर उत्पादन कराया गया, जिससे न केवल त्यौहार के अवसर पर पर्यावरण-संवेदनशील उत्पाद उपलब्ध हुए, बल्कि महिलाओं को स्वरोजगार का अवसर भी मिला।
स्टॉल पर उपस्थित उत्पादों की बिक्री ने सभी को हैरान कर दिया। नगर आयुक्त ने बताया कि अभी तक सवा दो लाख रुपये से अधिक की बिक्री स्वयं सहायता समूह की महिलाओं द्वारा की जा चुकी है। विशेष रूप से लक्ष्मी गणेश की मूर्तियों और गोवर्धन प्रतिमाओं की मांग अधिक रही। उप मुख्य पशु चिकित्सा एवं कल्याण अधिकारी डॉ. अनुज ने बताया कि पिछले वर्षों की तरह इस वर्ष भी गोबर से तैयार लक्ष्मी-गणेश मूर्तियों की बिक्री उच्च स्तर पर रही है। इसके अतिरिक्त दीपावली के अवसर पर लगभग 51,000 गोबर के दिये बनाकर लोगों को उपलब्ध कराए गए।
नगर निगम के इस प्रयास से न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिला, बल्कि स्थानीय कलाकारों और स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को अपने उत्पादों को शहरवासियों तक पहुंचाने का अवसर भी प्राप्त हुआ। उन्होंने बताया कि नंदी पार्क गौशाला के स्टॉल के अलावा गाजियाबाद के विभिन्न स्वदेशी मेलों में भी गाय के गोबर से बने उत्पादों के स्टॉल लगाए गए हैं, जिनका व्यापक स्तर पर स्वागत किया गया। नगर आयुक्त ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य न केवल दीपावली के अवसर पर पारंपरिक और स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देना है, बल्कि लोगों में पर्यावरण जागरूकता और स्थायी विकास के प्रति संवेदनशीलता भी पैदा करना है। उन्होंने शहरवासियों से अपील की कि वे प्रदूषण रहित, स्वदेशी और पारंपरिक उत्पादों को अपनाकर दीपावली के इस पावन पर्व को और भी अर्थपूर्ण बनाएं।
स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने भी इस अवसर पर अपनी खुशी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इस परियोजना के माध्यम से उन्हें आर्थिक सशक्तिकरण के साथ-साथ समाज में अपनी पहचान बनाने का अवसर मिला। उनके प्रयासों से न केवल त्योहार की चमक बढ़ी, बल्कि पर्यावरणीय जागरूकता का संदेश भी घर-घर पहुंचा। इस पहल ने यह स्पष्ट कर दिया कि गाय के गोबर जैसे प्राकृतिक संसाधनों का सही उपयोग कर समाज में आर्थिक, पर्यावरणीय और सामाजिक लाभों को एक साथ प्राप्त किया जा सकता है। सवा दो लाख की बिक्री और लोगों की बढ़ती मांग ने यह प्रमाणित किया कि गाजियाबाद के लोग पारंपरिक, स्वदेशी और पर्यावरण-मित्र उत्पादों को अपनाने में सक्रिय हैं। नगर निगम का यह प्रयास न केवल दीपावली के अवसर पर उत्साह और उल्लास को बढ़ाने वाला रहा, बल्कि महिलाओं के सशक्तिकरण, पर्यावरण संरक्षण और पारंपरिक उत्पादों के प्रति लोगों की जागरूकता बढ़ाने वाला भी साबित हुआ।

















