-800 से अधिक आवेदकों के बीच डिजिटल प्रक्रिया से हुआ चयन
-आवंटियों को डिजिटल पत्र जारी, भुगतान के बाद मिलेगा कब्जा
-राजस्व से शहर में सड़क, सीवर और नागरिक सुविधाओं का होगा विकास
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) द्वारा नूरनगर योजना के अंतर्गत विकसित 77 आवासीय भूखंडों का शनिवार को ई-लॉटरी के माध्यम से आवंटन किया गया। इस आवंटन से जीडीए को लगभग 66.64 करोड़ रुपये की आय होने का अनुमान है। पारदर्शी डिजिटल प्रक्रिया के तहत आयोजित इस लॉटरी में बड़ी संख्या में आवेदकों की मौजूदगी रही।
जीडीए उपाध्यक्ष नंद किशोर कलाल के निर्देशन में लोहिया नगर स्थित हिंदी भवन सभागार में सुबह 11 बजे ई-लॉटरी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता जीडीए सचिव विवेक कुमार मिश्र ने की। इस दौरान एडीएम सिटी विकास कश्यप, जीडीए अपर सचिव प्रदीप कुमार सिंह, फाइनेंस कंट्रोलर अशोक कुमार वाजपेयी, ओएसडी कनिका कौशिक, संयुक्त सचिव श्याम अवध चौहान और प्रभारी चीफ इंजीनियर आलोक रंजन सहित कई अधिकारी उपस्थित रहे। नूरनगर के इन भूखंडों के लिए 800 से अधिक लोगों ने आवेदन किया था। सुबह से ही हिंदी भवन सभागार में आवेदकों की भारी भीड़ जुट गई थी। ई-लॉटरी प्रक्रिया शुरू होते ही सभागार पूरी तरह भर गया और चयनित आवेदकों के नामों की क्रमवार घोषणा की गई।
जिन आवेदकों का चयन हुआ है, उन्हें अब डिजिटल आवंटन पत्र जारी किया जाएगा। जीडीए सचिव विवेक कुमार मिश्र ने बताया कि नूरनगर योजना के अंतर्गत खसरा संख्या 96 एवं 97 में कुल 7520.85 वर्ग मीटर क्षेत्रफल में भूखंड विकसित किए गए हैं। योजना के तहत 79 हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से भूखंडों की कीमत निर्धारित की गई है। इससे 59.41 करोड़ रुपये की मूल आय, 10 प्रतिशत लीज किराया के रूप में लगभग 5.94 करोड़ रुपये तथा दो प्रतिशत फ्री-होल्ड शुल्क के रूप में करीब 1.18 करोड़ रुपये की आय प्राप्त होगी। इस प्रकार पूरी योजना से कुल 66.54 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व मिलने का अनुमान है। आवंटन प्रक्रिया के तहत चयनित आवेदकों को निर्धारित समयसीमा में भूखंड की कुल कीमत का 15 प्रतिशत भुगतान करना होगा। इसके बाद 25 प्रतिशत राशि जमा होने पर जीडीए द्वारा रजिस्ट्री कराकर भूखंड का कब्जा आवंटियों को सौंप दिया जाएगा।
जीडीए के अपर सचिव प्रदीप कुमार सिंह ने बताया कि इस योजना से प्राप्त होने वाले राजस्व का उपयोग शहर में आधारभूत ढांचे को मजबूत करने में किया जाएगा। सड़क निर्माण, जलापूर्ति व्यवस्था, सीवर नेटवर्क विस्तार, हरित क्षेत्र विकास और अन्य नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाने पर यह धन खर्च किया जाएगा। हालांकि ई-लॉटरी प्रक्रिया के दौरान कुछ आवेदकों ने असंतोष भी जताया। उनका कहना था कि डिजिटल लॉटरी प्रणाली में उन्हें योजना का लाभ नहीं मिला और पारंपरिक पर्ची प्रणाली से लॉटरी कराई जाती तो अधिक पारदर्शिता महसूस होती। इसके बावजूद जीडीए अधिकारियों ने पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और तकनीकी रूप से सुरक्षित बताया। ई-लॉटरी के सफल आयोजन के साथ ही नूरनगर आवासीय योजना को लेकर लंबे समय से प्रतीक्षा कर रहे आवेदकों को राहत मिली है, वहीं जीडीए को विकास कार्यों के लिए बड़ी वित्तीय मजबूती भी प्राप्त हुई है।

















