किसान आंदोलन : सुप्रीम कोर्ट में फिर सुनवाई

मामला न सुलझने पर सरकार को पड़ी फटकार

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने किसान आंदोलन से निपटने के केंद्र सरकार के तरीके पर नाराजगी जाहिर की है। कोर्ट ने साफ कहा कि जिस प्रकार से सरकार इस मसले को हैंडल कर रही है, हम उससे बिल्कुल खुश नहीं हैं। कोर्ट ने सरकार से पूछा कि आप बताएं कि कानून पर रोक लगाएंगे अथवा नहीं, नहीं तो हम लगा देंगे। नए कृषि कानूनों के खिलाफ पिछले 47 दिनों से किसानों का आंदोलन चल रहा है। इस बीच 55 किसानों की मौत भी हो चुकी है। विभिन्न किसान संगठन नए कानूनों को निरस्त करने की मांग पर अडिग हैं। कृषि कानूनों और किसान आंदोलन से जुड़ी याचिकाओं पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान चीफ जस्टिस ने किसान आंदोलन से निपटने के सरकार के तरीके पर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार से सरकार इस मामले को हैंडल कर रही है, हम उससे खुश नहीं हैं। हमें पता नहीं कि सरकार कैसे मामले को डील कर रही है। कानून बनाने से पहले किससे चर्चा की गई। कई बार से कह रहे हैं कि बात हो रही है। अटॉर्नी जनरल ने कहा कि कानून से पहले विशेषज्ञ समिति बनी। कई नागरिकों से चर्चा की गई। पहले की सरकारें भी इस दिशा में प्रयास करती रही हैं। इस पर सीजेआई ने कहा कि यह दलील काम नहीं आएगी कि पहले की सरकार ने इसे शुरू किया था। उन्होंने कहा कि आपने कोर्ट को बेहद अजीब स्थिति में डाल दिया है। चीफ जस्टिस ने कहा कि कोर्ट किसी भी नागरिक को यह आदेश नहीं दे सकता कि आप प्रदर्शन न करें। हां, ये जरूर कह सकता कि आप इस जगह प्रदर्शन करें। यदि कुछ घटित होता है तो उसके जिम्मेदार सब होंगे। उधर, सरकार और किसान प्रतिनिधियों के बीच 8 दौर की वार्ता हो चुकी है। इसके बावजूद अब तक कोई ठोस हल नहीं निकल पाया है। हरियाणा के मुख्यमंत्री ने भी साफ शब्दों में कह दिया है कि सरकार कृषि कानूनों को वापस नहीं लेगी।