ठेकेदार के घर पर सीबीआई का छापा, गाजियाबाद के इंजीनियर से जुड़े हैं तार – Gomti Riverfront Scam

 

Gomti Riverfront Scam – उत्तर प्रदेश के बहुचर्चित रिवर फ्रंट घोटाले में सीबीआई का शिकंजा लगाता कसता जा रहा है। सीबीआई की एंटी करप्शन टीम ने गाजियाबाद के कौशाम्बी में स्थित शिवालिक टावर में जल निगम के इंजीनियर रूप सिंह के घर छापेमारी की थी। उधर, एक टीम ने गोमती रिवर फ्रंट से जुड़े बुलंदशहर के एक ठेकेदार के घर पर छापेमारी की। ठेकेदार के यहां से सीबीआई को घोटाले से संबंधित कई अहम जानकारियां और सबूत मिले हैं।

उदय भूमि ब्यूरो
गाजियाबाद/ बुलंदशहर। उत्तर प्रदेश के बहुचर्चित रिवर फ्रंट घोटाले में सीबीआई का शिकंजा लगाता कसता जा रहा है। सीबीआई की एंटी करप्शन टीम ने इंजीनियर रूप सिंह के घर छापेमारी की उधर, सीबीआई की एक टीम ने गोमती रिवर फ्रंट से जुड़े बुलंदशहर के एक ठेकेदार के घर पर भी छापेमारी की। ठेकेदार के यहां से सीबीआई को घोटाले से संबंधित कई अहम जानकारियां और सबूत मिले हैं।

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Gomti Riverfront Scam एक बड़ा घोटाला है और इस घोटाले के आरोपियों के यहां से सबूत जुटाने के लिए सोमवार को सीबीआई ने बड़ी कार्रवाई की। सीबीआई की तीन दर्जन से अधिक टीमों ने यूपी के एक दर्जन से अधिक शहरों के अलावा पश्चिम बंगाल, राजस्थान और उत्तराखंड में आरोपियों के अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी की है। इसी कार्रवाई के दौरान सीबीआई बुलंदशहर के प्रीत विहार मोहल्ला कॉलोनी भी पहुंची। सीबीआई ने यहां ठेकेदार राकेश भाटी के घर पहुंचकर जांच की। ठेकेदार के घर पर कार्रवाई करने पहुंची सीबीआई की टीम में 10 अधिकारी शामिल थे। सीबीआई की टीम ने छापेमारी के दौरान ठेकेदार राकेश भाटी और घर के अन्य सदस्यों के फोन को भी अपने कब्जे में ले लिया।
करीब 1800 करोड़ रुपये के इस घोटाले की जांच फिलहाल सीबीआई कर रही है। प्रवर्तन निदेशालय भी मनी लांड्रिंग का मामला दर्ज कर जांच कर रहा है। राज्य सरकार ने चार साल पहले Gomti Riverfront Scam की जांच सीबीआई से कराने की संस्तुति की थी। उससे पहले अप्रैल 2017 में प्रदेश सरकार ने रिवर फ्रंट घोटाले की न्यायिक जांच के आदेश दिए थे। जांच के बाद गोमती नगर थाने में कई अधिकारियों के खिलाफ कमेटी ने एफआईआर दर्ज कराई थी। उसी एफआईआर को आधार बनाकर सीबीआई ने रिपोर्ट दर्ज की थी। एक इंजीनियर रूप सिंह की गिरफ्तारी इस मामले में कुछ ही दिन पहले की गई थी। Gomti Riverfront Scam में परियोजना के तहत अकेले सिंचाई विभाग ने 800 से अधिक टेंडर जारी किए थे। इनमें नियमों को दरकिनार कर ठेकेदारों को काम दिया गया था। उस समय लखनऊ खंड शारदा नहर के अधिशासी अभियंता रूप सिंह के खिलाफ सीबीआई को पर्याप्त सुबूत मिले थे।

गाजियाबाद और बुलंदशहर के अलावा इन जगहों पर हुई छापेमारी
उप्र जल निगम के अधिशासी अभियंता रूप सिंह यादव का कौशाम्बी के शिवालिक टावर में फ्लैट है। जहां सीबीआई की एंटी करप्शन विंग की टीम सोमवार की सुबह करीब 8 बजे पहुंची। सूत्रों का कहना है कि छापेमारी के दौरान टीम ने मौके से बेशकीमती जेवरात तथा करोड़ों रुपए की बेनामी संपत्तियों के कागजात जब्त किए हैं। जांच प्रक्रिया में कोई अड़चन न आए, इसके चलते पूरे टावर की नाकेबंदी कर दी गई थी। टावर को अस्थाई रूप से सील कर नागरिकों के आवागमन पर रोक लगा दी गई। आरोप है कि इंजीनियर अभियंता रूप सिंह यादव ने पद पर रहते समय अनैतिक कार्यों के जरिए अकूत संपत्तियां अर्जित की। बता दें कि सीबीआई लखनऊ की एंटी करप्शन विंग ने रिवर फ्रंट घोटाले में दर्जनभर आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की थी। इस प्रकरण में लखनऊ के अलावा नोएडा, गाजियाबाद, बुलंदशहर, रायबरेली, सीतापुर, इटावा और आगरा में छापेमारी की गई।

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सपा सरकार में हुआ घोटाला
उत्तर प्रदेश में सपा सरकार के कार्यकाल में इस घोटाले को अंजाम दिया गया था। सपा सरकार द्वारा गोमती नदी के किनारे रिवर फ्रंट बनवाया गया था। 2017 में भाजपा सरकार आने पर इस मामले की जांच होने पर भ्रष्टाचार से पर्दा उठा था। सपा सरकार के दौरान भी इसको लेकर ऊंगलियां उठती रही। लेकिन सरकार ने गोमती रिवर फ्रंट को सपा सरकार की उपलब्धि बताकर इसका बचाव किया था।

लगभग 1800 करोड़ रुपये का है घोटाला
लगभग 1800 करोड़ रुपये के इस घोटाले की जांच सीबीआई कर रही है। जबकि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) मनी लांड्रिंग की जांच कर रहा है। उप्र सरकार ने 4 साल पहले इस घोटाले की जांच सीबीआई से कराने की संस्तुति की थी। इससे पहले अप्रैल-2017 में योगी सरकार ने रिवर फ्रंट घोटाले की न्यायिक जांच के आदेश दिए थे। अधिशासी अभियंता रूप सिंह की इस मामले में कुछ दिन पहले गिरफ्तारी हुई थी।

अकेले सिंचाई विभाग ने जारी किये थे 800 टेंडर
Gomti Riverfront Scam कितना बड़ा है और इसमें किस तरह की लूट खसोट हुई इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि परियोजना के तहत अकेले सिंचाई विभाग ने 800 से ज्यादा टेंडर जारी किए थे। इनमें नियमों को दरकिनार कर ठेकेदारों को काम दिया गया था। जांच में लखनऊ खंड शारदा नहर के अधिशासी अभियंता रूप सिंह के खिलाफ सीबीआई को पुख्ता साक्ष्य मिले थे।