-वार्षिक ऋण योजना 2025-26 का शुभारंभ, सीडी अनुपात 60 प्रतिशत से कम पाने वाले बैंकों से मांगा स्पष्टीकरण
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। जिले के वित्तीय क्षेत्र में मजबूती लाने और बैंकों की जवाबदेही तय करने के उद्देश्य से जिलाधिकारी दीपक मीणा की अध्यक्षता में गुरुवार को जिला स्तरीय बैंकिंग समन्वय समिति एवं बैंकिंग समीक्षा समिति की बैठक का आयोजन किया गया। बैठक विकास भवन स्थित दुर्गावती देवी सभागार में आयोजित हुई, जिसमें जिले के सभी प्रमुख बैंकों के जिला समन्वयकों, क्षेत्रीय प्रबंधकों और वित्तीय संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक में अग्रणी बैंक के जिला प्रबंधक बुद्ध राम द्वारा मार्च 2025 की तिमाही तक की बैंकिंग उपलब्धियों पर प्रस्तुति दी गई। समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया कि जिन बैंकों का साख-जमा (क्रेडिट-डिपॉजिट) अनुपात निर्धारित 60 प्रतिशत से कम पाया गया है, वे अपनी कार्यशैली में तत्काल सुधार करें। उन्होंने कहा कि साख-जमा अनुपात जिले की आर्थिक स्थिति का आईना है।
बैंकों को चाहिए कि वे अपने कर्ज वितरण में पारदर्शिता और सक्रियता बढ़ाएं ताकि जिले का विकास गति पकड़ सके। जिलाधिकारी ने सीडी अनुपात 60 प्रतिशत से नीचे पाए जाने पर प्रत्येक बैंक के जिला समन्वयकों से कारण बताने को कहा। साथ ही उन बैंकों से भी विशेष रिपोर्ट तलब की गई है, जिनके बड़े अग्रिमों (लोन) का लेखा-जोखा दिल्ली या नोएडा में दर्शाया गया है। उन्होंने निर्देश दिए कि ऐसे मामलों की एक अलग रिपोर्ट तैयार कर अगली बैठक में प्रस्तुत की जाए, ताकि जिले का वास्तविक सीडी अनुपात सामने आ सके।
बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने वार्षिक ऋण योजना 2025-26 (एसीपी) का भी विधिवत शुभारंभ किया। इस योजना के माध्यम से जिले के विभिन्न वर्गों कृषि, उद्योग, सेवा क्षेत्र व उद्यमियों को लक्षित कर ऋण वितरण को बढ़ावा देने की रणनीति तैयार की गई है। बैठक में जिला विकास अधिकारी प्रज्ञा श्रीवास्तव, एलडीओ आरबीआई कुमारी प्रतिभा इन्दोरिया, नाबार्ड की डीडीएम कुमारी अलका, उपायुक्त उद्योग श्रीनाथ पासवान, और सभी बैंकों के क्षेत्रीय प्रबंधक व जिला समन्वयक उपस्थित रहे।
















