व्यापारी बोले पार्षद चोर जनप्रतिनिधियों को आया गुस्सा कहा संभल कर करो बात, पार्षद बनाम व्यापारी हुआ माहौल, नगर आयुक्त ने संभाला मामला

विरोध प्रदर्शन कर रहे व्यापारी इतने उग्र हो गये कि वह मेयर नगर आयुक्त सहित तमाम पार्षदों को भला बुरा कहने लगे। प्रदर्शनकारी किसी की भी बात नहीं सुनने को तैयार नहीं थे और बदतमीजी पर उतर आये। प्रदर्शनकारी पार्षदों को चोर कहने लगे। इससे पार्षद भी उत्तेजित हो गये और दोनों पक्षों के बीच कहासूनी के बाद धक्का-मुक्की भी हुई। बात आगे बढ़ते देख नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक ने मोर्चा संभाला और प्रदर्शनकारियों से अपनी बात सम्मानजक ढ़ंग से रखने को कहा। नगर आयुक्त ने व्यापारियों के एक प्रतिनिधि मंडल को आकर मिलने और सम्मानजक ढ़ंग से अपनी बात रखने को कहा। नगर आयुक्त ने कहा कि कोई भी निर्णय नियमानुसार ही होगा। किराया बढ़ोत्तरी का प्रस्ताव पूर्व में नगर निगम की बोर्ड ने पास किया है। ऐसे में कोई दूसरा निर्णय होगा तो वह भी नियमानुसार बोर्ड के निर्णय के अनुसार होगा। नगर आयुक्त के हस्तक्षेप के बाद मामला शांत हुआ और व्यापारी प्रदर्शन खत्म कर लौट गये।

विजय मिश्रा (उदय भूमि)
गाजियाबाद। शुक्रवार को गाजियाबाद नगर निगम मुख्यालय जंग का अखाड़ा बन गया। सुबह से ही हंगामा कर रहे व्यापारियों ने नगर निगम कॉरिडोर में जमकर हंगामा किया और नारेबाजी की। किराया बढ़ोत्तरी के नाम पर व्यापारियों का विरोध प्रदर्शन अमर्यादित और अशोभनीय रहा। विरोध प्रदर्शन कर रहे व्यापारी इतने उग्र हो गये कि वह मेयर नगर आयुक्त सहित तमाम पार्षदों को भला बुरा कहने लगे। प्रदर्शनकारी किसी की भी बात नहीं सुनने को तैयार नहीं थे और बदतमीजी पर उतर आये। प्रदर्शनकारी पार्षदों को चोर कहने लगे। इससे पार्षद भी उत्तेजित हो गये और दोनों पक्षों के बीच कहासूनी के बाद धक्का-मुक्की भी हुई। बात आगे बढ़ते देख नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक ने मोर्चा संभाला और प्रदर्शनकारियों से अपनी बात सम्मानजक ढ़ंग से रखने को कहा। नगर आयुक्त ने व्यापारियों के एक प्रतिनिधि मंडल को आकर मिलने और सम्मानजक ढ़ंग से अपनी बात रखने को कहा। नगर आयुक्त ने कहा कि कोई भी निर्णय नियमानुसार ही होगा। किराया बढ़ोत्तरी का प्रस्ताव पूर्व में नगर निगम की बोर्ड ने पास किया है। ऐसे में कोई दूसरा निर्णय होगा तो वह भी नियमानुसार बोर्ड के निर्णय के अनुसार होगा। नगर आयुक्त के हस्तक्षेप के बाद मामला शांत हुआ और व्यापारी प्रदर्शन खत्म कर लौट गये।

नगर निगम की 1702 दुकानों का किराया बढ़ाने के विरोध में शुकवार को व्यापारियों ने प्रतिष्ठान बंद कर निगम मुख्यालय में धरना दिया। व्यापारियों ने फैसला वापस लेने की मांग की। दोपहर बाद व्यापारियों और पार्षदों के बीच वार्ता चल रही थी। इसी दौरान कुछ व्यापारियों ने पार्षदों को चोर बोल दिया। इस पर पार्षद भड़क गए और दोनों पक्षों के बीच धक्का-मुक्की के साथ कहासुनी हुई। इससे पूर्व व्यापारियों ने घंटाघर पर भी एक बैठक की थी। इसके बाद वह निगम मुख्यालय पहुंचे और धरने पर देकर बैठ गये। दरअसल नगर निगम की दुकानों पर अवैध कब्जा है। नगर निगम की संपत्ति होने के बावजूद इस पर कई ऐसे लोगों का कब्जा है जिनके पास दुकान आवंटन से संबंधित कागजात भी नहीं है। आलम यह है कि कई दुकानों का किराया 500 रुपये से लेकर 2000 रुपये के बीच है। लेकिन इन दुकानों को किसी अन्य व्यक्ति को देकर 30 से 40 हजार रुपये तक मासिक किराया वसूल किया जा रहा है। पूर्व में जब दुकानों का किराया बढ़ाये जाने का निर्णय हुआ था उसमें सभी पक्षों की राय-शुमारी के बाद सदन ने किराया बढ़ोत्तरी का निर्णय लिया था।

लेकिन अब एक बार फिर से किराया बढ़ोत्तरी का मामला गर्मा गया है। कथित किसान आंदोलन की तर्ज पर व्यापारियों ने भी शुक्रवार को नगर निगम मुख्यालय में उग्र आंदोलन किया। व्यापारियों ने महापौर सुनीता दयाल, नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक और निगम पार्षदों के खिलाफ आपत्तिजनक नारेबाजी की। पूर्व में जब नगर निगम की बोर्ड बैठक में सदन ने किराया बढ़ाया था उस समय 100 में से 98 पार्षदों ने किराया बढ़ोत्तरी के प्रस्ताव पर सहमति दी थी। ऐसे में बोर्ड की सहमति के बगैर किराया बढ़ोत्तरी का निर्णय वापस नहीं लिया जा सकता है। लेकिन व्यापारी इस बात को सुनने को तैयार नहीं हुए। व्यापारियों के हंगामे के कारण निगम की बोर्ड बैठक भी बाधित हुई। हालांकि शुक्रवार शाम तात्कालिक रूप से व्यापारी बनाम पार्षद का मामला शांत हो गया। लेकिन आगे भी इसको लेकर टकराव की स्थिति बनी हुई है।