नगर निगम बना अखाड़ा, टूटा भाजपा का अनुशासन, बैठक स्थगित

– कार्यकारिणी के 6 सदस्यों के लिए 10 पार्षदों ने किया नामांकन
– भाजपा के पार्षद अड़े, महापौर की भी नहीं सुनी बात

विजय मिश्रा (उदय भूमि)
गाजियाबाद। नगर निगम कार्यकारिणी सदस्यों के चुनाव के लिए बुलाई गई बोर्ड बैठक हंगामेदार रही। बैठक में सभी कायदे कानून और मर्यादा तार-तार हो गई। विपक्षी पार्षदों की कौन कहे भाजपा के अनुशासित माने जाने वाले पार्षद भी मर्यादा भूल गये। नगर निगम कार्यकारिणी के 6 सदस्यों का चयन आपसी सहमति से होना था। लेकिन विपक्ष ही नहीं भाजपा पार्षद भी चुनाव के लिए अड़ गये। 6 सदस्यों के लिए 10 पार्षदों ने नामांकन किया। मामले को सुलझाने के लिए भाजपा संगठन ने भी दखलंदाजी की और अपने पार्षदों को समझाने की कोशिश की। लेकिन संगठन का प्रयास भी असफल रहा। सदन की बैठक के दौरान हंगामा, शोर-शराबा और नारेबाजी चलती रही। कोई निर्णय नहीं होता देख महापौर सुनीता दयाल ने बोर्ड बैठक स्थगित करने का निर्णय लिया।

पिछले दिनों हुई नगर निगम की कार्यकारिणी बैठक में एक वर्ष पूर्ण होने के बाद 6 सदस्यों का कार्यकाल समाप्त हुआ। प्रथम वर्ष जिन सदस्यों का कार्यकाल समाप्त हुआ। उनका चयन लॉटरी से हुआ था। रिक्त हुए 6 पदों को भरने के लिए शुक्रवार को नगर निगम की बोर्ड बैठक बुलाई गई थी। बैठक दो दिन होनी थी। पहले दिन कार्यकारिणी सदस्यों का चुनाव होना था और दूसरे दिन शहर के विकास से संबंधित प्रस्तावों पर चर्चा होना था। लेकिन पहले दिन ही इतना हंगामा हुआ कि बैठक अनिश्चित काल के लिए स्थगित करनी पड़ी। शुक्रवार सुबह सुनीता दयाल की अध्यक्षता और नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक की उपस्थिति में वंदेमातरम गान के साथ शुरूआत की गई। अपर नगर आयुक्त अरुण कुमार यादव, चीफ इंजीनियर एनके चौधरी, मुख्य कर निर्धारण अधिकारी डॉ. संजीव सिन्हा, लेखाधिकारी डॉ. गीता कुमारी, उद्यान प्रभारी डॉ. अनुज कुमार सिंह, मुख्य नगर लेखा परीक्षक विवेक सिंह, सहायक लेखाधिकारी जेपी सिंह, सहायक नगर आयुक्त पल्लवी सिंह, एग्ज्यूकेटिव इंजीनियर देशराज सिंह, कविनगर जोनल प्रभारी सुनील राय, लेखा परीक्षक रोहताश शुक्ला, विमलकांत सिंह सहित अन्य अधिकारी बैठक की प्रक्रिया का संचालन कर रहे थे।

बैठक की शुरुआत के बाद सदन सचिव अरुण यादव ने कार्यकारिणी सदस्यों के चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने की घोषणा की। इसके बाद चुनाव अधिकारी के समक्ष 10 पार्षदों ने अपने नामांकन दाखिल कर दिए। 10 पार्षदों के नामांकन करने से मामला फंस गया। मजेदार बात यह रही कि बैठक के दौरान भाजपा के पार्षद बागी हो गये। भाजपा ने जिन 4 सदस्यों का नाम फाइनल किया था उनके अलावा 3 और भाजपा पार्षदों ने नामांकन दाखिल किया। भाजपा पार्षदों के ही बगावत देख भाजपा के स्थानीय संगठन से बात की कई। भाजपा के महानगर अध्यक्ष संजीव शर्मा सहित संगठन के कई पदाधिकारी बैठक में पहुंचे। सभी ने अपने स्तर पर मामला सुलझाने की कोशिश की। मान-मनौव्वल के साथ ही भाजपा संगठन की नीति और रीति की याद भी बागी पार्षदों को समझाई गई।

लेकिन पार्षद मानने को तैयार नहीं थे। मेयर सुनीता दयाल चाहती थी कि कार्यकारिणी का चुनाव सर्वसम्मति से किया जाये। काफी देर बाद भाजपा के कुछ पार्षद मान गये। लेकिन वरिष्ठ पार्षद और पूर्व उपाध्यक्ष राजीव शर्मा नामांकन को लेकर अड़े रहे। मेयर की कड़ी चेतावनी के बाद भाजपा पार्षद संजय सिंह, नीलम भारद्वाज और एक अन्य निर्दलीय पार्षद जोगिंद्र सिंह ने अपना नाम वापिस ले लिया। लेकिन राजीव शर्मा ने अपना नाम वापस लेने से साफ इंकार कर दिया। पार्षदों के कई गुट मामले को सुलझाने में लगे रहे। लेकिन मामला नहीं सुलझा। दोपहर 4 बजे मेयर सुनीता दयाल ने बैठक स्थगित करने की घोषणा की।