क्राइम ब्रांच की टीम ने किया चोरी व फर्जी फाइनेंस गाड़ियों का भंडाफोड़ चोरी की तीन लग्जरी कार बरामद

गाजियाबाद। दिल्ली-एनसीआर, गाजियाबाद में लग्जरी गाडिय़ों की चोरी, फर्जी फांइनेंस कराकर खरीद परोख्त करने वाले अन्तर्राज्यीय गिरोह के दो शातिरों को क्राइम ब्रांच की टीम ने गिरफ्तार किया है। जिनके कब्जे से पुलिस ने चोरी की तीन लग्जरी कार, फर्जी नंबर प्लेट बरामद किया है। पकड़े गए आरोपी पिछले करीब पांच सालों से लगातार चोरी की वारदातों को चोरी करते थे। कार चोरी करने के साथ फर्जी तरीके से फाइनेंस कराकर उसकी फर्जी दस्तावेज तैयार कर दुसरे राज्यों में बेच देते थे। लोहिया नगर स्थित अपने कार्यालय में एडीसीपी क्राइम सच्चिदानंद ने बताया मंगलवार को क्राइम ब्रांच प्रभारी अब्दुर रहमान सिद्दीकी की टीम ने मुरादनगर क्षेत्र से संजय पुत्र खेमा सिंह निवासी साकीपुर सूरजपुर जिला गौतम बुद्ध नगर नोएडा और राजीव पुत्र हरी सिंह निवासी ग्राम वहरांनपुर खरखौदा जिला मेरठ को गिरफ्तार किया है। जिनकी निशानदेही पर 3 चार पहिया लग्जरी  वाहन, फर्जी नम्बर प्लेट बरामद किया गया। संजय भाटी 12वीं पास है और उसका नोएडा में एक वर्कशॉप है। जहां वह गाडिय़ों की ङेंटिगं पेंटिग का काम पिछले 12 सालों से कर रहा है। जिसके वर्कशॉप में पांच लोग काम करते है।

इससे पहले वह अरुण मिस्त्री के यहां काम करता था। गाड़ी खरीदने बेचने का काम वह पिछले 2 साल से अपने गैराज से ही कर रहा है। कुछ साल पहले उसके बड़े बेटे का एक्सीडेंट हो गया। जिसके दिमाग का 5 बार ऑपरेशन हो चुका है। इलाज में ज्यादा कर्जा हो गया था और प्लॉट भी बिक चुका था। करीब दो साल पहले वह आरटीओ ऑफिस नोएडा में गाड़ी के कागजात बनावाने के संबंध में दलाल राजीव के सम्पर्क में आया। राजीव ने उसे बताया कि उसके संपर्क गाड़ी चुराने ब फर्जी फाइनेंस की गाड़ी देने वाले लड़के  हैं। जिनसे गाड़ी लेकर वह लोगों को गाङी, फाइनेंस कंपनी से सेटलमेंट होना बताकर और फर्जी कागज बनवाकर उन्हें आगे बेच देता है। जिसमें काफी फायदा होता है। जिसके बाद भाटी भी उसके साथ काम पर लग गया। दलाल राजीव ने बताया कि आरटीओ ऑफिस नोएडा में पिछले 6 वर्ष से दलाली का काम कर रहा है।

इससे पहले वह दिल्ली मयूर विहार में दूसरे के मेडिकल लाइसेंस को 2000 रुपये महीना किराए पर लेकर अपना मेडिकल स्टोर चलाता था। 5 से 6 वर्ष मेडिकल स्टोर चलाने के बाद उसमे काफी नुकसान होने पर मेडिकल स्टोर बंद कर दिया और फिर नोएडा आरटीओ ऑफिस में दलाली का कार्य बब्लू नागर के साथ मिलकर शुरू कर दिया। जब आरटीओ में दलाली का पूरा काम सीख गया तो उसने अपना दलाली का काम शुरू कर दिया। इसी बीच नोएडा में ही उसकी मुलाकात सरफाबाद नोएडा के सोनू यादव से हुई और उसके साथ मिलकर चोरी की गाडियों व फर्जी फाईनेंस के कागजात बनाने का काम करने लगे। फाइनेंस गाडिय़ों की आरसी में गाड़ी मालिक का नंबर चेंज कर अपना नंबर लिखवा कर फर्जी तरीके से गाडिय़ों को ट्रांसफर करवा देते थे। संजय भाटी को मलिक बताकर उससे विडियो कॉल पर बात कराकर आगे बेच देते थे।

राजीव का साथी सोनू भी यहीं काम करता था, जो कि जेल में बंद है। राजीव चोरी की गाडिय़ां नितिन और अज्जू से खरीदता था। चोरी व फर्जी की गाडियों की खरीद फरोख्त मे जो भी फायदा होता था उसे ये लोग आपस मे बांट लेते थे और उस पैसे से ये लोग अपने शौक और अपने घर के खर्चे पूरा करते थे। एडीसीपी क्राइम ने बताया जब यह लोग गाड़ियों की चोरी व उसकी डिलीवरी करने जाते है तो उस समय पहचान छुपाने के लिए गाड़ियों की नंबर प्लेट बदलकर फर्जी नम्बर प्लेट लगाकर पहले से तयशुदा स्थान पर मिलकर गाड़ियों की चोरी व उनकी डिलीवरी करते थे। नार्मल कॉल करने से बचते थे। पकड़े गए आरोपी शातिर किस्म के है। जो कि गाजियाबाद, दिल्ली-एनसीआर व आसपास के राज्यों में चोरी व फर्जी फाइनेंस की गाड़ियों की खरीद फरोख्त की कई घटनाओं को अंजाम दे चुकें है।