शाहपुर बम्हेटा गांव की बिटिया ने रचा इतिहास: डॉ. काजल यादव ने पीएचडी कर किया गाजियाबाद का नाम रौशन

-आईआईटी बॉम्बे में कर रही हैं शोध, परमाणु ऊर्जा विभाग से जुड़ा प्रोजेक्ट रहा विशेष आकर्षण
-सीमित संसाधनों के बीच किया उच्च शिक्षा का सपना साकार

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। शिक्षा की असली ताकत क्या होती है, यह कोई डॉ. काजल यादव से बेहतर नहीं बता सकता। शाहपुर बम्हेटा गांव की साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर काजल ने असाधारण सफलता की कहानी लिखी है। उन्होंने विद्युत अभियंत्रण (इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग) में शिव नाडर विश्वविद्यालय से पीएचडी की उपाधि प्राप्त कर न सिर्फ अपने गांव, बल्कि पूरे गौतमबुद्ध नगर और गाजियाबाद जिले का नाम रोशन कर दिया है। डॉ. काजल यादव मुकेश यादव और कल्पना यादव की सुपुत्री हैं। उनके भाई भरत यादव ने उनकी इस सफलता को साझा करते हुए कहा कि काजल की यह उपलब्धि उन सभी ग्रामीण लड़कियों के लिए एक जीवंत प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों में भी बड़े सपने देखती हैं। काजल यादव की शिक्षा यात्रा गांव के एक साधारण स्कूल से शुरू हुई। पढ़ाई के प्रति समर्पण और विज्ञान में रुचि ने उन्हें वनस्थली विद्यापीठ तक पहुँचाया, जहाँ उन्होंने अपनी स्नातकोत्तर (एम.टेक) की डिग्री पूरी की। यहीं से उन्होंने एक ऐसा शोध प्रोजेक्ट किया जिसने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। उनका शोध भारत सरकार के परमाणु ऊर्जा विभाग के अधीन आने वाले राजा रमन्ना प्रगत प्रौद्योगिकी केंद्र (आरआरसीएटी), इंदौर में आधारित था। उन्होंने पेरोव्स्काइट सौर कोशिकाओं पर गहन अनुसंधान किया, जो भविष्य में स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में क्रांतिकारी साबित हो सकता है।

आईआईटी बॉम्बे में कर रहीं हैं देश को रोशन करने वाला शोध
वर्तमान में डॉ. काजल यादव आईआईटी बॉम्बे में पोस्ट-डॉक्टोरल फेलो के रूप में कार्यरत हैं। वे सौर ऊर्जा पर शोध कर रही हैं और देश के हरित ऊर्जा मिशन में प्रत्यक्ष योगदान दे रही हैं। यह बात भी कम महत्वपूर्ण नहीं कि उन्होंने यह मुकाम एक ऐसे परिवेश से हासिल किया, जहाँ लड़कियों की शिक्षा अक्सर प्राथमिकता नहीं होती।

ग्रामीण बेटियों के लिए एक प्रेरणा, माता-पिता के लिए गर्व का पल
पिता मुकेश यादव और माता कल्पना यादव की आंखों में गर्व और भावुकता स्पष्ट देखी जा सकती है। उन्होंने कहा कि काजल ने न केवल उनका सपना पूरा किया, बल्कि पूरे गांव की बेटियों के लिए एक नई राह भी खोली है। भाई भरत यादव ने कहा कि काजल ने साबित कर दिया कि अगर इरादे मजबूत हों तो गांव की गलियों से निकलकर भी विज्ञान की ऊंची प्रयोगशालाओं तक पहुँचा जा सकता है।

सपनों की कोई सीमा नहीं
डॉ. काजल यादव की यह यात्रा एक मजबूत संदेश देती है सपनों की कोई सीमा नहीं होती, अगर साथ हो मेहनत, समर्पण और सही मार्गदर्शन का। आज जब देश बेटियों को आगे बढ़ाने की बात करता है, तो डॉ. काजल यादव जैसी बेटियां अपने कार्यों से उसे साकार भी कर रही हैं। उन्होंने यह साबित किया है कि एक छोटे से गांव की लड़की भी वैश्विक स्तर पर वैज्ञानिक अनुसंधान में भारत का प्रतिनिधित्व कर सकती है।