-एसीपी उपासना की टीम ने क्राइम ब्रांच ऑफिस में ही पकड़ा घूसखोर अफसर
-पुलिस विभाग में पारदर्शिता का असली चेहरा: रिश्वतखोरी पर गाजियाबाद पुलिस की जीरो टॉलरेंस कार्रवाई
-कार की डिग्गी से मिले चार लाख रुपये, जमानत सत्यापन में चल रहा था घोटाला
-ड्रग रैकेट केस के आरोपी की मदद के बदले मांगी थी रिश्वत, एसीपी की टीम ने खोली पोल
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। पुलिस कमिश्नरेट गाजियाबाद में पारदर्शिता और भ्रष्टाचार मुक्त व्यवस्था स्थापित करने के लिए पुलिस आयुक्त जे. रविंदर गौड़ किस हद तक गंभीर हैं, इसकी मिसाल गुरुवार देर रात उस समय देखने को मिली जब क्राइम ब्रांच के एक इंस्पेक्टर को चार लाख रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया गया। यह कार्रवाई पुलिस आयुक्त के सख्त निर्देशों पर डीसीपी सिटी धवल जायसवाल के नेतृत्व में एसीपी नंदग्राम उपासना पांडेय की टीम ने की, जिसने बेखौफ तरीके से विभाग के भीतर ही भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ा कदम उठाया। गाजियाबाद पुलिस कमिश्नरेट में बीते कुछ समय से डीसीपी सिटी धवल जायसवाल की कार्यशैली सुर्खियों में बनी हुई है। उनका यह मानना है कि अगर आम नागरिक में पुलिस के प्रति भरोसा कायम रखना है तो विभाग के अंदर से भ्रष्टाचार और गलत काम करने वालों को कठोर कार्रवाई का सामना कराना ही होगा। नगर जोन में उनकी सख्ती केवल अपराधियों तक सीमित नहीं है, बल्कि पुलिस विभाग में बैठे हर उस व्यक्ति तक भी पहुंचती है जो नियमों के विपरीत कार्य करता है। डीसीपी सिटी रोज घंटों अपने कार्यालय में बैठकर फरियादियों की समस्याएं सुनते हैं और उन्हें यह भरोसा दिलाते हैं कि पुलिस वास्तव में जनता की सुरक्षा के लिए है और न्याय दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है।
इसी पारदर्शिता नीति के तहत कार्रवाई तब शुरू की गई जब पुलिस आयुक्त जे. रविंदर गौड़ को जानकारी मिली कि क्राइम ब्रांच का एक इंस्पेक्टर रिश्वत मांग रहा है। सूचना की पुष्टि होते ही उन्होंने बिना देरी किए डीसीपी सिटी को कार्रवाई के निर्देश दे दिए। इसके बाद डीसीपी धवल जायसवाल ने एसीपी नंदग्राम उपासना पाण्डेय के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की जिसने बेहद गोपनीय तरीके से पूरी योजना तैयार की। गुरुवार रात करीब 11 बजे वह क्षण आया जब ट्रैप टीम ने क्राइम ब्रांच ऑफिस के अंदर छापा मारा। एसीपी उपासना पांडेय, जो अपनी तेजतर्रार छवि और निर्णायक फैसले लेने के लिए जानी जाती हैं, ने पूरी कार्रवाई को खुद सुपरवाइज किया। छापेमारी के दौरान इंस्पेक्टर रमेश सिंह सिंधु की सर्विस कार की डिग्गी की तलाशी ली गई, जिसमें चार लाख रुपए नकद बंडलों के रूप में छुपाकर रखे गए थे। यह पैसा राहुल शर्मा नाम के व्यक्ति द्वारा दिया गया था, जो इस पूरे मामले में कड़ी का काम कर रहा था।
यह रिश्वत 3 नवंबर को मेरठ रोड इंडस्ट्रियल क्षेत्र में पकड़े गए 3.40 करोड़ की कोडीन सिरप के बड़े ड्रग रैकेट के एक आरोपी के जमानत सत्यापन को ‘साफ-सुथरा’ दिखाने और जमानतदाता को कानूनी पचड़े से बचाने के एवज में मांगी गई थी। यह वही केस था जिसमें एसडब्ल्यूओटी टीम और क्राइम ब्रांच ने मिलकर आठ तस्करों को गिरफ्तार किया था और बड़ा खुलासा किया था। ऐसे में उसी मामले में विभाग के भीतर भ्रष्टाचार का खुलना पुलिस महकमे के लिए शर्मनाक स्थिति पैदा कर रहा था, लेकिन त्वरित कार्रवाई ने स्थिति संभाल ली। जैसे ही रिश्वत की रकम बरामद हुई, मौके पर ही इंस्पेक्टर को हिरासत में ले लिया गया। डीसीपी सिटी धवल जायसवाल ने देर रात पूरी कार्रवाई की पुष्टि करते हुए बताया कि आरोपी इंस्पेक्टर के खिलाफ सिहानी गेट थाने में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
उन्होंने यह भी कहा कि विभागीय जांच शुरू कर दी गई है और पूछताछ में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं। इस पूरे घटनाक्रम में एसीपी उपासना पांडेय की भूमिका बेहद सराहनीय रही। वह पिछले कई महीनों से नंदग्राम सर्किल में अपराध और अवैध गतिविधियों के खिलाफ लगातार कड़ी कार्रवाई कर रही हैं। उनकी नेतृत्व क्षमता, तत्परता और निष्पक्षता ने उन्हें एक सशक्त और कठोर अधिकारी की छवि दी है। विभाग के भीतर भ्रष्टाचार पर इस प्रकार की निर्णायक कार्रवाई यह साबित करती है कि पुलिस महकमे के भीतर गलत कार्य करने वाला चाहे कोई भी हो, कानून का डंडा उस तक जरूर पहुंचेगा। यह कार्रवाई न केवल गाजियाबाद पुलिस की छवि को मजबूत करती है, बल्कि यह संदेश भी देती है कि पुलिस आयुक्त, डीसीपी सिटी और एसीपी स्तर के अधिकारी गाजियाबाद को सुरक्षित, ईमानदार और पारदर्शी पुलिस व्यवस्था देने के लिए दिन-रात प्रतिबद्ध हैं। जनता के विश्वास को कायम रखने के लिए ऐसी निर्णायक और साहसिक कार्रवाइयों की आवश्यकता थी, जो अब जमीन पर दिखाई भी दे रही हैं।
















