सड़कों से हटेगा अतिक्रमण, नहीं माने तो लगेगा 10 हजार का जुर्माना

-पुलिस कमिश्नर के निर्देश पर शहरभर में चला अभियान, नोटिस देकर दी गई 3 दिन की मोहलत

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। शहर की सड़कों से अतिक्रमण हटाने की मुहिम में अब पुलिस ने पूरी ताकत झोंक दी है। कमिश्नरेट सिस्टम लागू होने के बाद पहली बार गाजियाबाद पुलिस ने सड़क पर कब्जा जमाए ठेली-पटरी वालों, खोखा दुकानदारों और सड़क किनारे सामान रखने वालों के खिलाफ बड़ा कदम उठाया है। पुलिस कमिश्नर जे. रविन्दर गौड़ के निर्देश पर थानावार स्तर पर पुलिस व ट्रैफिक विभाग की संयुक्त टीमों ने अतिक्रमण करने वालों को नोटिस थमाने की कार्रवाई शुरू कर दी है। तीन दिन के भीतर नोटिस का जवाब न देने वालों पर 10 हजार रुपये तक जुर्माना और सामान जब्ती की कार्यवाही तय मानी जा रही है। कमिश्नर गौड़ का कहना है कि शहर में यातायात जाम की बड़ी वजह फुटपाथ और सड़क किनारे का अतिक्रमण है, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

उन्होंने स्पष्ट किया कि यह सिर्फ एक बार की कार्रवाई नहीं होगी, बल्कि अब यह एक सतत प्रक्रिया के रूप में चलेगी। शहर के सिहानी गेट, कविनगर, नगर कोतवाली, विजयनगर, नंदग्राम सहित ट्रांस हिंडन क्षेत्र के थानों में इस अभियान की शुरुआत हो चुकी है। पुलिस द्वारा पहले अतिक्रमण की वीडियोग्राफी की जा रही है, फिर नोटिस दिए जा रहे हैं। इसके बाद यदि निर्धारित अवधि में न तो अतिक्रमण हटाया गया और न ही एसीपी कोर्ट में जवाब दाखिल किया गया, तो जुर्माना और जब्ती की कार्रवाई की जाएगी।

पुलिस-प्रशासन सख्त, चेतावनी भी जारी
नोटिस के साथ-साथ दुकानदारों व अतिक्रमणकर्ताओं को पुलिस की ओर से चेतावनी दी जा रही है कि अगर भविष्य में दोबारा अतिक्रमण किया गया तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह अभियान एक संदेश है कि अब सड़कों पर अवैध कब्जे को किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

अब तक 422 चालान, लाखों का सामान जब्त
अभियान की शुरुआत में ही ट्रैफिक पुलिस ने 422 चालान कर डाले हैं, जिसमें सड़क पर भवन निर्माण सामग्री, खोखे और अन्य अतिक्रमण शामिल हैं। नगर निगम और जीडीए के साथ तालमेल बनाकर अब पुलिस भी इस अभियान में शामिल हो गई है, जिससे प्रभाव कई गुना बढ़ गया है।

सड़कें होंगी साफ, यातायात होगा सुगम
अभियान का उद्देश्य न सिर्फ अतिक्रमण हटाना है, बल्कि नागरिकों को ट्रैफिक जाम से राहत दिलाना और सड़कों को सुचारु बनाना भी है। कमिश्नरेट प्रणाली के बाद यह पहली बार है जब पुलिस इतनी गहराई से अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई में जुटी है।