लखनऊ में आबकारी विभाग की टीम ने किया नकली शराब सिंडिकेट का भंडाफोड़

  • महंगी बोतलों में भरता था सस्ती शराब, ऑन-डिमांड सप्लाई का खुलासा
  • बिहार चुनाव और त्योहारों से पहले आबकारी विभाग का बड़ा धमाका
  • नकली शराब कारोबारियों की कमर टूटी, महंगी बोतलों संग तस्कर दबोचा गया
  • क्यूआर कोड से नकली का खेल का खुला राज, कबाडिय़ों को भी मिली चेतावनी
  • अवैध शराब कारोबार पर ‘ऑपरेशन क्लीन’: हाईवे से मोहल्लों तक ताबड़तोड़ चेकिंग, 85 लीटर अवैध शराब जब्त

उदय भूमि संवाददाता
लखनऊ। त्योहारों का मौसम करीब है और इसी के साथ अवैध शराब तस्करी पर शिकंजा कसने के लिए लखनऊ का आबकारी विभाग पूरी तरह से मुस्तैद दिखाई दे रहा है। इस बार विभाग की चाल और ढाल दोनों ही बदल चुकी हैं। नतीजा यह है कि सीमाओं से लेकर शहर के भीतर तक आबकारी की टीमों का पहरा है और मुखबिर तंत्र भी पहले से कहीं ज्यादा सक्रिय है। बिहार में होने वाले विधानसभा चुनाव और प्रदेश में त्योहारों के मद्देनजर शराब माफिया किसी तरह की हरकत न कर सकें, इसके लिए जिला आबकारी अधिकारी करुणेन्द्र सिंह सचान ने विशेष रणनीति बनाई है। इसी सख्ती का परिणाम रहा कि आबकारी विभाग की टीम ने हुसैनगंज क्षेत्र में दबिश देकर एक शातिर तस्कर को रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया। यह तस्कर घर के भीतर ही महंगी शराब की बोतलों में सस्ती शराब भरकर नकली ढक्कन और नकली क्यूआर कोड लगाता था और फिर रात के अंधेरे में, जब सभी लाइसेंसी दुकानें बंद हो जाती थीं, ऑन डिमांड ग्राहकों को बेचता था। गिरफ्तारी के बाद उसके पास से सिवास, हंडड्रेड पाइपर, ब्लैक एंड गोल्ड और जैमसन जैसी नामी ब्रांड की खाली बोतलें, नकली ढक्कन, नकली क्यूआर कोड और करीब तीन लीटर अवैध शराब बरामद हुई। पकड़े गए आरोपी की पहचान रामपाल पुत्र रामलखन पाल निवासी कल्लू पंडित गली, छितवापुर, हुसैनगंज के रूप में हुई।

रामपाल पहले एक लाइसेंसी शराब की दुकान में विक्रेता के तौर पर काम करता था। वहीं से उसे शराब की बोतलों, ढक्कनों और क्यूआर कोड की पूरी जानकारी हो गई थी। लेकिन कमाई कम होने के चलते उसने खुद का अवैध धंधा शुरू कर दिया। कबाडिय़ों से खाली बोतलें खरीदता और उनमें सस्ती शराब भरकर नकली सील लगाकर बेच देता। इस धंधे से वह रोज़ हजारों रुपये कमा लेता था। लेकिन आबकारी विभाग की सतर्कता ने उसके इस गोरखधंधे का अंत कर दिया।
जिला आबकारी अधिकारी करुणेन्द्र सिंह सचान ने बताया कि मुखबिर से सूचना मिलते ही निरीक्षक कौशलेंद्र रावत और प्रदीप कुमार शुक्ला की टीम गठित की गई थी। टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए छापामारी की और आरोपी को मौके पर गिरफ्तार कर लिया। सचान ने इस दौरान साफ कहा कि किसी भी कीमत पर अवैध शराब का कारोबार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने सभी आबकारी निरीक्षकों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों की लाइसेंसी दुकानों और कैंटीनों का गहन निरीक्षण करें। दुकानों से निकलने वाली खाली बोतलों का लेखा-जोखा रखें और यदि उन्हें किसी कबाड़ी को बेचा जाता है, तो उसकी सूची भी तैयार करें। आगे चलकर कबाडिय़ों को भी सख्त हिदायत दी जाएगी कि शराब की खाली बोतलें किसी भी व्यक्ति को न बेचें और यदि कोई खरीदार आता है तो तुरंत विभाग को सूचित करें।

लखनऊ में चल रही इस मुहिम में सिर्फ नकली शराब ही नहीं बल्कि कच्ची शराब पर भी बड़ी कार्यवाही की जा रही है। विभाग ने शनिवार को गाजीपुर, इंदिरानगर, मद्देगंज, हुसैनगंज, आलमबाग, पारा, ठाकुरगंज, आशियाना, कृष्णानगर, काकोरी और दुबग्गा थाना क्षेत्रों के अंतर्गत संदिग्ध ग्रामों और ठिकानों पर छापेमारी की। इस दौरान कुल सात मुकदमे दर्ज किए गए, 85 लीटर अवैध शराब बरामद की गई और लगभग पचास किलो लहन मौके पर ही नष्ट कर दिया गया।
इतना ही नहीं, बाहरी राज्यों से शराब की तस्करी को रोकने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। आबकारी निरीक्षक विवेक सिंह, राहुल कुमार सिंह, रिचा सिंह, अभिषेक सिंह, रजनीश प्रताप सिंह, अरविंद बघेल, कौशलेन्द्र रावत, प्रदीप शुक्ला, अखिलेश चौधरी, अखिल गुप्ता और मोनिका यादव की संयुक्त टीम ने सीतापुर-लखनऊ मार्ग, आगरा लखनऊ एक्सप्रेसवे, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे-बाराबंकी-सुल्तानपुर हाइवे पर रातभर वाहनों की जांच की। ट्रक, टैंकर और छोटे निजी व व्यावसायिक वाहनों की सघन चेकिंग की गई। साथ ही हाईवे और शहर के ढाबों का औचक निरीक्षण कर संचालकों को स्पष्ट चेतावनी दी गई कि वहां शराब परोसने की अनुमति नहीं है। लखनऊ का आबकारी विभाग इन दिनों पूरी तरह से सक्रिय मोड में है। जिले के कप्तान करुणेन्द्र सिंह सचान खुद मैदान में उतरकर न सिर्फ दुकानों की जांच कर रहे हैं, बल्कि यह भी देख रहे हैं कि इंस्पेक्टर अपने दायित्वों का कितनी गंभीरता से निर्वहन कर रहे हैं। वह प्रत्येक कार्रवाई का परिणाम भी मांगते हैं और सख्त चेतावनी दे चुके हैं कि लापरवाही किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं होगी।

त्योहारों के मौसम और चुनावी माहौल में शराब की खपत अचानक बढ़ जाती है और यही समय शराब माफिया के लिए कमाई का मौका बनता है। लेकिन इस बार आबकारी विभाग की सक्रियता ने उनके मंसूबों पर पानी फेर दिया है। विभाग का मुखबिर तंत्र मजबूत हुआ है, छापामार टीम चौकन्नी है और जिले की सीमाएं पूरी तरह से सील की जा चुकी हैं। लखनऊ में आबकारी विभाग की कार्यशैली अब आम लोगों के बीच भी चर्चा का विषय है। सख्ती के साथ-साथ विभाग लगातार जागरूकता भी फैला रहा है। लोगों से अपील की जा रही है कि शराब खरीदते समय बोतल पर लगे क्यूआर कोड को अवश्य स्कैन करें, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि बोतल असली है या नकली। क्योंकि नकली शराब न सिर्फ आर्थिक नुकसान पहुंचाती है बल्कि लोगों की जान के लिए भी खतरा बन सकती है। कुल मिलाकर, जिला आबकारी अधिकारी करुणेन्द्र सिंह सचान की अगुवाई में लखनऊ का आबकारी विभाग अवैध शराब के खिलाफ निर्णायक जंग लड़ रहा है।

उनकी रणनीति, सक्रियता और सख्ती से न सिर्फ तस्करों की कमर टूटी है बल्कि आम नागरिकों को भी यह भरोसा मिला है कि इस बार त्योहारों पर उन्हें नकली शराब की मार नहीं झेलनी पड़ेगी। यह कार्यशैली आबकारी विभाग की प्रतिबद्धता और कर्तव्यनिष्ठा का प्रमाण है, जिसने लखनऊ को शराब माफियाओं से सुरक्षित बनाने का ठोस बीड़ा उठाया है।
जिला आबकारी अधिकारी ने बताया आगामी त्योहारों को देखते हुए आबकारी विभाग पूरी तरह सतर्क है। अवैध शराब का कारोबार किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हमारी प्राथमिकता है कि लखनऊ की सीमाओं से लेकर हर मोहल्ले और गांव तक नकली व अवैध शराब की सप्लाई पूरी तरह से बंद हो। हमने सभी आबकारी निरीक्षकों को निर्देशित किया है कि वे लगातार लाइसेंसी दुकानों और कैंटीनों का निरीक्षण करें, और खाली बोतलों के दुरुपयोग पर भी कड़ी नज़र रखें। जनता से भी अपील है कि शराब खरीदते समय बोतल पर लगे क्यूआर कोड को अवश्य स्कैन करें, ताकि नकली और असली की पहचान हो सके। हमारी टीमें दिन-रात काम कर रही हैं और हर दोषी को कानून के कठघरे में खड़ा किया जाएगा।