लखनऊ में कन्हैया कुंज कॉम्प्लेक्स में आबकारी की दबिश, नकली शराब का पर्दाफाश

  • आबकारी अधिकारी करुणेन्द्र सिंह की सख्त नीति से अवैध शराब कारोबारियों में हड़कंप

  • राजधानी में आबकारी विभाग की बेजोड़ रणनीति, अवैध शराब कारोबारियों की कमर टूटी

  • जीरो टॉलरेंस नीति का असर- लखनऊ में नकली शराब माफियाओं का खेल खत्म, चार गिरफ्तार

उदय भूमि संवाददाता
लखनऊ। आबकारी विभाग ने राजधानी लखनऊ में नकली शराब का धंधा करने वाले गिरोह पर ऐसी निर्णायक चोट की है जिसने माफियाओं की कमर तोड़ दी है। आबकारी आयुक्त के आदेश पर चल रहे विशेष अभियान के अंतर्गत संयुक्त आबकारी आयुक्त लखनऊ जोन और उप आबकारी आयुक्त लखनऊ प्रभार के निर्देशन तथा जिला आबकारी अधिकारी करुणेन्द्र सिंह के नेतृत्व में यह बड़ी कार्रवाई की गई। बीते कई दिनों से सूचना मिल रही थी कि कुछ लोग “होगा हाय” ब्रांड की बोतलों में सस्ती व घटिया शराब भरकर उसे ऊँचे दामों पर बेच रहे हैं। यह कारोबार न केवल जनस्वास्थ्य के लिए घातक था बल्कि सरकारी राजस्व की भी सीधी लूट थी। करुणेन्द्र सिंह ने अपनी नीति के अनुरूप इस मामले को हल्के में नहीं लिया, बल्कि इसकी गहराई से रेकी करवाई और ठोस रणनीति के बाद दबिश की कार्यवाही कराई। बुधवार को आबकारी निरीक्षक कृष्ण कुमार सिंह के साथ निरीक्षक राम श्याम त्रिपाठी, विजय और अभिषेक सिंह थाना कृष्णा नगर क्षेत्र के कानपुर रोड स्थित कन्हैया कुंज कॉम्प्लेक्स पहुंचे। जैसे ही टीम ने दबिश दी, वहां नकली शराब बनाने और पैकिंग का पूरा खेल सामने आ गया। मौके से विदेशी शराब के नाम पर बेची जा रही 14 बोतलें (750 एमएल) और 11 अद्धे (375 एमएल) बरामद किए गए। इसके अलावा 65 खाली बोतलें, आठ खाली अद्धे, नकली ढक्कन और क्यूआर कोड भी मिले, जो इस बात का पुख्ता सबूत था कि गिरोह बड़े पैमाने पर नकली शराब का कारोबार कर रहा था।

मौके से चार अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया जिनमें उन्नाव निवासी प्रशांत जायसवाल, रायबरेली निवासी विकास जायसवाल (पुत्र रमाकांत), विकास जायसवाल (पुत्र राजेश) और लखनऊ के मलीहाबाद निवासी शशांक निगम शामिल हैं। सभी आरोपियों के खिलाफ थाना कृष्णा नगर में आबकारी अधिनियम और बीएनएस की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया गया। इस कार्रवाई के केंद्र में रहे जिला आबकारी अधिकारी करुणेन्द्र सिंह की नीति साफ है कि लखनऊ की धरती पर अवैध शराब का कारोबार किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उनकी कार्यशैली की सबसे बड़ी विशेषता है गुप्त सूचनाओं पर पैनी निगरानी, बारीकी से रेकी, टीम को पूरी तैयारी के साथ दबिश के लिए भेजना और हर कार्रवाई की खुद मॉनिटरिंग करना। यही कारण रहा कि यह दबिश पूरी तरह सफल हुई और आरोपियों को मौके पर ही पकड़ लिया गया। करुणेन्द्र सिंह का मानना है कि अवैध शराब का धंधा केवल राजस्व की चोरी नहीं है, बल्कि यह समाज के लिए भी गंभीर खतरा है। नकली शराब से लोगों की जान को खतरा होता है, अपराध बढ़ता है और शासन की छवि धूमिल होती है। इसी वजह से वे अपनी कार्यशैली में “जीरो टॉलरेंस” की नीति अपनाते हैं।

उनके नेतृत्व में काम कर रही टीम को भी यह आत्मविश्वास रहता है कि उन्हें किसी भी दबाव या हस्तक्षेप की चिंता नहीं करनी है। करुणेन्द्र सिंह की साफ छवि और कठोर निर्णय क्षमता के कारण अधिकारी और कर्मचारी बिना किसी भय के अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं। यही वजह है कि लखनऊ में लगातार अवैध शराब के खिलाफ सफल कार्रवाइयां हो रही हैं और शराब माफियाओं की कमर टूट चुकी है। शहर में यह चर्चा आम है कि करुणेन्द्र सिंह की तैनाती के बाद से अवैध शराब से जुड़ी घटनाओं में भारी कमी आई है और शराब माफियाओं में खौफ का माहौल है। यह कार्रवाई केवल नकली शराब का भंडाफोड़ भर नहीं थी, बल्कि यह संदेश भी था कि लखनऊ में कानून का राज सर्वोपरि है और किसी भी हालत में अवैध कारोबारियों को संरक्षण नहीं मिलेगा। करुणेन्द्र सिंह ने न केवल गिरोह का पर्दाफाश किया बल्कि यह भी साबित किया कि यदि अधिकारी ईमानदारी और निष्ठा से काम करें तो कितने भी बड़े नेटवर्क को ध्वस्त करना मुश्किल नहीं है। लखनऊ मॉडल अब प्रदेश के अन्य जिलों के लिए भी उदाहरण बन रहा है।

करुणेन्द्र सिंह ने जिस तरह रणनीति और टीम वर्क के ज़रिए नकली शराब के इस गोरखधंधे को उजागर किया, उससे यह साबित हो गया कि सही नेतृत्व और ईमानदार प्रयासों से किसी भी अवैध कारोबार को जड़ से खत्म किया जा सकता है। जनता में उनके प्रति विश्वास और अपराधियों में उनके प्रति खौफ दोनों ही लगातार बढ़ रहे हैं। उनकी यह कार्रवाई एक बार फिर इस तथ्य को पुष्ट करती है कि लखनऊ में आबकारी विभाग पूरी ता$कत और ईमानदारी से अपने मिशन पर काम कर रहा है और इस मिशन के केंद्र में जिला आबकारी अधिकारी करुणेन्द्र सिंह की दूरदर्शी नीति और अडिग कार्यशैली है।

जनता में भरोसा, अपराधियों में खौफ
इस कार्रवाई से एक ओर जहां जनता का विश्वास और मजबूत हुआ है, वहीं दूसरी ओर अपराधियों में खौफ भी पैदा हुआ है। अब अवैध शराब का कारोबार करने वाले यह समझ चुके हैं कि लखनऊ में जिला आबकारी अधिकारी करुणेन्द्र सिंह की मौजूदगी में उनका बच निकलना नामुमकिन है। शहर में यह चर्चा है कि करुणेन्द्र सिंह ने जिस तरह लगातार कड़ी कार्रवाई की है, उससे शराब माफियाओं की कमर टूट चुकी है। लोग यह भी कहते हैं कि उनकी सख़्ती से शराब पीकर गाड़ी चलाने और अवैध शराब पीने से होने वाली घटनाओं में भी कमी आई है।

भ्रष्टाचार पर सख़्त नकेल
केवल अवैध शराब ही नहीं, करुणेन्द्र सिंह का फोकस भ्रष्टाचार पर भी है। वे साफ कहते हैं कि यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी शराब माफियाओं से मिलकर गलत काम करेगा तो उसे भी बख़्शा नहीं जाएगा। यही वजह है कि उनकी छवि ईमानदार और निष्पक्ष अधिकारी की बनी हुई है।

लखनऊ मॉडल बन रहा है प्रदेश के अन्य जिलों के लिए उदाहरण
करुणेन्द्र सिंह की नीति और कार्यशैली अब प्रदेश के अन्य जिलों के लिए भी एक मॉडल बन रही है। उनकी सख़्ती, टीम वर्क और रणनीति ने यह साबित कर दिया है कि यदि सही नेतृत्व हो तो किसी भी बड़े से बड़े माफिया को धर दबोचने में देर नहीं लगती।