जीडीए सचिव रिलीव – गाजियाबाद विकास प्राधिकरण में सचिव के पद पर लंबे समय से जमे संतोष कुमार राय के तबादले के बाद उन्हें रिलीव कर दिया गया है। शासन द्वारा जारी तबादले के आदेश में बड़े ही कड़े शब्दों का प्रयोग करते हुए उन्हें तत्काल चार्ज छोडऩे को कहा गया। ऐसे नहीं करने पर उन्हें खिलाफ कड़ी कार्रवाई किये जाने की बात भी कही गई। शासन के तेवर को भांपते हुए आदेश मिलने के अगले ही दिन संतोष कुमार राय ने चार्ज छोड़ दिया और उन्हें रिलीव कर दिया गया। नवनियुक्त जीडीए सचिव ब्रजेश कुमार शनिवार को चार्ज लेंगे।
उदय भूमि ब्यूरो
गाजियाबाद। जीडीए के मठाधीश अधिकारियों में गिने जाने वाले संतोष कुमार राय को रिलीव कर दिया गया है। नवनियुक्त सचिव ब्रजेश कुमार शनिवार को चार्ज संभालेंगे। संतोष राय के तबादले की जीडीए में खूब चर्चा रही है। दरअसल संतोष राय के तबादले को लेकर जो आदेश जारी हुआ उसमें बड़े ही कड़े शब्दों का प्रयोग किया गया है। उत्तर प्रदेश सरकार के विशेष सचिव धनंजय शुक्ल द्वारा जारी तबादले के आदेश में कहा गया कि संतोष कुमार राय तत्काल नवीन तैनाती का पदभार ग्रहण कर कार्यभार प्रमाणक शासन को उपलब्ध करायें। यदि कोई विलंब किया जाता है तो कार्रवाई की जाएगी। जीडीए उपाध्यक्ष से भी कहा गया कि वह कोई अवकाश स्वीकृत ना करें और तत्काल सचिव को कार्य मुक्त करें। 
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प्रदेश शासन ने दो दिन पूर्व किये गये आईएएस और पीसीएस अधिकारियों के तबादले किये। इसमें जीडीए में पिछले साढ़े 3 साल से तैनात सचिव संतोष कुमार राय का भी तबादला कर दिया। जीडीए से इनका तबादला करते हुए इन्हें इटावा जनपद में मुख्य विकास अधिकारी बनाया गया है। इनकी जगह मथुरा में एडीएम फाइनैंस के पद पर तैनात पीसीएस अधिकारी ब्रजेश कुमार को जीडीए का सचिव बनाया गया है। ब्रजेश कुमार के शनिवार को पदभार ग्रहण करने की संभावना है। दरअसल जीडीए सचिव संतोष राय के तबादले से अधिक चर्चा उनके लिए जारी तबादले के आदेश को लेकर है। प्रदेश शासन के विशेष सचिव धनंजय शुक्ल ने तबादला आदेश जारी करते हुए कहा कि बगैर प्रतीक्षा किए तत्काल संतोष कुमार राय इटावा में सीडीओ पद पर कार्यभार ग्रहण करना सुनिश्चित करेंगे। अगर कार्यभार ग्रहण नहीं किया जाता है तो अनुशासनिक कार्रवाई की जाएगी।
दरअसल, जीडीए की तत्कालीन उपाध्यक्ष रितु माहेश्वरी के प्रयास से संतोष कुमार राय को जीडीए में सचिव पद पर 9 फरवरी-2018 को तैनाती मिली थी। लेकिन इनका कार्यकाल बेहद निराशाजनक रहा। इनके साढ़े तीन साल के कार्यकाल के दौरान जीडीए क्षेत्र में धड़ल्ले से अवैध निर्माण हुआ। कुछ महीने पहले तो बकायता एक एग्रीमेंट पेपर वायरल हुआ था जिसमें प्रत्येक लेंटर एक लाख रुपये जीडीए अधिकारियों द्वारा लिये जाने का खुलासा हुआ था। आरोप तो यहां तक लगे कि जीडीए सचिव ने मनमाने ढ़ंग से काम किया और संस्थान हित को कोई तरजीह नहीं दी। कहा तो यहा तक जाने लगा कि जिस अधिकारी की बदौलत संतोष राय को जीडीए में तैनाती मिली उनके निर्देशों को भी दरकिनार करने लगे। जीडीए के अधिकारियों पर वह अपने राजनैतिक रसूख का भी प्रभाव दिखाने का प्रयास करते थे और खुद को वर्तमान में राज्यपाल के पद पर तैनात भाजपा के एक बड़े नेता का खासमखास बताते थे। 
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संतोष राय की कार्यशैली से जीडीए के अधिनस्थ अधिकारी भी त्रस्त थे। आम लोगों की शिकायतों को कोई तरजीह नहीं देने के आरोप भी संतोष राय पर लगे। संतोष राय का जीडीए से तबादला कराने के लिए भाजपा के विधायक एवं पार्षदों ने भी मोर्चा खोल रखा था। मनमानी करने और कार्यों का समय से निष्पादन न किया जाना इनकी शगल में शुमार हो गया था। लंबे समय से जीडीए में तैनात रहते हुए इन्होंने किसी भी विकास योजनाएं को पूरा कराने की जहमत नहीं उठार्ई। जीडीए के आर्थिक हालात को बेहाल होने का श्रेय भी कई लोग जीडीए सचिव को ही दे रहे हैं। मधुबन-बापूधाम योजना की जमीन भी किसानों से नहीं ली जा सकी है। दरअसल सचिव का पद जीडीए में महत्वपूर्ण होता है और कोई भी जीडीए उपाध्यक्ष कामकाज को पूरा करने में कितना सफल होगा यह इस बात पर निर्भर करता है कि सचिव कितना योग्य है। सबसे महत्वपूर्ण बात है कि संतोष राय के तबादले पर जीडीए के अधिकारियों और कर्मचारियों ने भी प्रसन्नता जाहिर की है। नवागत जीडीए सचिव ब्रजेश कुमार अपना चार्ज ग्रहण शनिवार को कर सकते है। इनके सामने भी अवैध निर्माण को रोकना और जीडीए की फाइनैंसियल स्थिति को सुधारने के लिए शमन शुल्क एवं बकाया वसूली करना बड़ी चुनौती रहेगी।















