जीडीए की रिक्त 112 दुकानें, 14 हॉल, 4 रिक्त भवनों का जल्द होगा मूल्यांकन

-प्रभारी चीफ इंजीनियर ने की अधिशासी अभियंता, सहायक अभियंता एवं अवर अभियंता के साथ बैठक

गाजियाबाद। गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) की विभिन्न योजनाओं में दुकानेंं, हॉल और आवासीय भवन रिक्त और अनिस्तारित मिले हैं। इन संपत्तियों का अब जल्द ही मूल्यांकन निर्धारित होगा। जीडीए उपाध्यक्ष अतुल वत्स ने जीडीए की रिक्त एवं अनिस्तारित संपत्तियों का आगणन यानि कि मूल्य निर्धारण करने के निर्देश दिए थे। इसी क्रम में बुधवार को जीडीए के प्रभारी चीफ इंजीनियर मानवेंद्र कुमार सिंह ने संबंधित जोन के अधिशासी अभियंता, सहायक अभियंता एवं अवर अभियंता के साथ बैठक कर खाली पड़ी दुकानों, हॉल और आवासीय भवन का मूल्यांकन तैयार करने के लिए बैठक की।

जीडीए के प्रभारी चीफ इंजीनियर मानवेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि जीडीए उपाध्यक्ष के निर्देश पर रिक्त संपत्तियों का आगणन तैयार करने के लिए बैठक की गई। इसके तहत वैशाली योजना में 9 दुकानें, राजनगर डिस्ट्रिक्ट सेंटर (आरडीसी) राजनगर में 34 दुकानें, इंदिरापुरम न्याय खंड-1 में 68 दुकान, लाजपत नगर में 1 दुकान समेत 112 दुकानें रिक्त पड़ी हुई है। जबकि नवयुग मार्केट में 8 हॉल, शास्त्री नगर में 4 हॉल, गोविंदपुरम में 2 हॉल एवं राजेन्द्र नगर योजना में 4 आवासीय भवन रिक्त पाए गए हैं। उन्होंने बैठक में इन रिक्त दुकानों,हॉल और आवासीय भवनों का मूल्यांकन एक सप्ताह में तैयार करने के निर्देश दिए,ताकि इन रिक्त संपत्तियों का मूल्य तय होने के बाद नीलामी में रखकर इन्हें बेचा जा सकें।

निरीक्षण में मिला नवनिर्मित कार्यालय का धीमा निर्माण:
जीडीए उपाध्यक्ष अतुल वत्स के निर्देश पर बुधवार को जीडीए के प्रभारी चीफ इंजीनियर मानवेंद्र कुमार सिंह ने अधिशासी अभियंता आलोक रंजन, सहायक अभियंता निशांत चंद्र, स्टॉफ के साथ मधुबन-बापूधाम आवासीय योजना में नवनिर्मित जीडीए कार्यालय बिल्डिंग का औचक निरीक्षण करने के लिए पहुंचे। निरीक्षण के दौरान कार्यालय की बिल्डिंग का निर्माण कार्य धीमी गति पर चलता पाया गया।

प्रभारी चीफ इंजीनियर ने इस पर असंतोष प्रकट करते हुए अधिशासी अभियंता और कांट्रेक्टर को तेज गति से गुणवत्तापूर्ण निर्माण कार्य को पूरा कराने के निर्देश दिए। इसके साथ ही अवर अभियंता और सुपरवाइजर को भी निर्देश दिए कि सभी निर्माण कार्य अपनी उपस्थिति में कराना सुनिश्चित करें,ताकि गुणवत्तापूर्ण निर्माण कार्य को पूरा किया जा सकें।