हिंडन को जीवनदान: हिंडन नदी के पुनरोद्धार का महाअभियान शुरू

-मुख्यमंत्री के निर्देश पर हुई उच्चस्तरीय बैठक, हिण्डन के कायाकल्प को मिली प्राथमिकता
-जनजागरूकता, प्लास्टिक मुक्त अभियान, घाट सफाई, जैविक खेती और अतिक्रमण हटाने तक बनी विस्तृत कार्ययोजना
– नदी तटों पर आरती, चित्रकला, चौपाल और भाषण प्रतियोगिताओं से लोगों को जोड़ने की तैयारी

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। जनपद की जीवनरेखा मानी जाने वाली हिंडन नदी अब पुन: संजीवनी की ओर अग्रसर है। उत्तर प्रदेश सरकार की “छोटी एवं सहायक नदियों के पुनरोद्धार” योजना के तहत गाजियाबाद जनपद से हिण्डन नदी का चयन किया गया है। इसी क्रम में मुख्य विकास अधिकारी  अभिनव गोपाल की अध्यक्षता में बुधवार को विकास भवन के दुर्गावती देवी सभागार में एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन हुआ, जिसमें बहुआयामी कार्ययोजना पर गहन विचार-विमर्श किया गया। मुख्य विकास अधिकारी ने स्पष्ट कहा कि हिंडन नदी का पुनरोद्धार केवल एक परियोजना नहीं, बल्कि जनआंदोलन बनेगा। उन्होंने सभी विभागों को समन्वय से कार्य करने और तय प्रारूप के अनुसार समयबद्ध सूचना उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। सिंचाई विभाग को यह पता लगाने को कहा गया कि हिंडन में मिलने वाले प्राकृतिक नालों की सफाई किस स्तर पर हो रही है, साथ ही संबंधित चेक डैम की भी जानकारी एकत्र की जाए। बैठक में जल संरक्षण के विभिन्न उपायों पर भी मंथन हुआ।

जिला पंचायत राज अधिकारी को निर्देश दिए गए कि सभी अमृत सरोवर, पुनर्जीवित तालाबों की अद्यतन जानकारी दी जाए। ग्राम पंचायतों में अब तक गठित न की गई ‘ग्राम गंगा सेवा समितियों’ के गठन का कार्य तत्काल कराने का आदेश भी जारी किया गया। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को हिंडन नदी में गिरने वाले सभी नालों का डेटा 15-15 दिन में अपडेट करने और एक्सेल शीट के रूप में प्रस्तुत करने को कहा गया, जिससे नदी पर पड़ने वाले प्रभाव का वैज्ञानिक आकलन हो सके। वहीं, जिला कृषि अधिकारी से नदी के कैचमेंट क्षेत्र में जैविक खेती को बढ़ावा देने और उसकी स्थिति पर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए। सीडीओ अभिनव गोपाल ने अतिक्रमण के मुद्दे पर सख्ती दिखाई और जिला परियोजना अधिकारी को निर्देशित किया कि संबंधित उपजिलाधिकारियों को पत्र जारी कर अवैध कब्जों को हटाने की कार्रवाई सुनिश्चित कराई जाए। हिण्डन को फिर से निर्मल और प्रवाहमान बनाने के लिए जनमानस को जागरूक करना अनिवार्य बताया गया।

इसके लिए नदी शोधन यात्रा, ग्राम चौपाल, घाट बैठकें, होर्डिंग, वॉल पेंटिंग, चित्रकला, निबंध, भाषण, प्रश्नोत्तरी, घाटों की सफाई, प्लास्टिक मुक्त नदी क्षेत्र अभियान, वृक्षारोपण और हिण्डन आरती जैसे रचनात्मक सुझाव दिए गए, जिन्हें अमल में लाने हेतु विभागों को निर्देशित किया गया। बैठक में जल संस्थान, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, सिंचाई विभाग, पंचायत राज, जिला परियोजना प्रबंधन इकाई, और अन्य विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। सभी ने एकमत से कहा कि यदि विभागीय समन्वय और जनभागीदारी साथ हो, तो हिंडन के पुनर्जीवन का सपना जल्द साकार होगा। यह अभियान गाजियाबाद ही नहीं, पूरे प्रदेश के लिए एक उदाहरण बन सकता है कि कैसे एक नदी को उसकी खोई हुई गरिमा लौटाई जा सकती है। हिंडन अब केवल एक नदी नहीं, बल्कि जनचेतना का केंद्र बन रही है।