टेंडर की जमाखोरी करने वाले ठेकेदार विभाग के लिए सिरदर्द बन गये हैं। ठेकेदारों की कारगुजारी से नगर निगम की बदनामी हो रही है और पार्षद सहित कालोनीवासियों में भी रोष बढ़ रहा है। टेंडर हासिल कर काम शुरू नहीं करने वाले ऐसे जमाखोर ठेकेदारों के कामों की लिस्ट बनाई जा रही है। टेंडर की जमाखोरी में शामिल इन शातिर ठेकेदारों के खिलाफ डीबार्ड से लेकर ब्लैक लिस्ट करने तक की कड़ी कार्रवाई हो सकती है।
उदय भूमि ब्यूरो
गाजियाबाद। शातिर ठेकेदार नगर निगम के अच्छे कामों पर पलीता लगाने में पूरी सिद्दत से जुटे हैं। शातिर ठेकेदारों की कारगुजारी से नगर निगम की बदनामी हो रही है और पार्षद सहित कालोनीवासियों में भी रोष बढ़ रहा है। चेतावनी के बाद भी नहीं सुधरने वाले ठेकेदारों पर अब कड़ी कार्रवाई का हंटर चलेगा। टेंडर की जमाखोरी करने वाले ठेकेदार विभाग के लिए सिरदर्द बन गये हैं। टेंडर हासिल कर काम शुरू नहीं करने वाले ऐसे जमाखोर ठेकेदारों के कामों की लिस्ट बनाई जा रही है। कई ठेकेदार इतने शातिर हैं कि वह वर्क ऑर्डर भी नहीं लेते हैं जिससे कि जब कार्रवाई की नौबत आये तो वह कोई बहाना बना कर बच सकें। नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक समय से काम पूरा नहीं करने वाले ऐसे ठेकेदारों के प्रति नाराजगी जता चुके हैं। अब चीफ इंजीनियर एनके चौधरी ऐसे ठेकेदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की तैयारी कर रहे हैं। टेंडर की जमाखोरी में शामिल इन शातिर ठेकेदारों के खिलाफ डीबार्ड से लेकर ब्लैक लिस्ट करने तक की कड़ी कार्रवाई हो सकती है।
लोकसभा चुनाव नजदीक है। संभावना जताई जा रही है कि फरवरी के अंतिम सप्ताह तक कभी भी आचार संहिता लागू हो सकता है। ऐसे में यदि नगर निगम के कामकाज में तेजी नहीं आई तो कई ऐसे काम हैं जो टेंडर होने के बावजूद पूरे नहीं हो पाएंगे। विगत कुछ माह से नगर निगम में ट्रेंड देखने को मिल रहा है कि कुछ ठेकेदार कामों की जमाखोरी कर रहे हैं। यानी ठेकेदार टेंडर प्रकिया में शामिल होकर टेंडर हासिल कर लेता है लेकिन वर्क ऑर्डर होने के बाद भी काम को पूरा नहीं करते। इस तरह से ठेकेदार शहर के विकास कार्यों पर ब्रेक लगा रहे हैं। शातिर ठेकेदार ना तो खुद काम करते हैं और ना ही किसी और को काम करने देते हैं। यही परिपाटी टेंडर प्रक्रिया को भी लेकर देखने को मिल रहा है। ऐसे में सवाल यह भी उठ रहा है जो ठेकेदार समय से काम पूरा नहीं करते उन्हें सिर्फ टेंडर की जमाखोरी करने या काम रोकने के लिए टेंडर प्रक्रिया में शामिल क्यों होने दिया जा रहा है। कई बड़े ठेकेदार इन साजिशों में शामिल रहते हैं यदि उन्हें टेंडर नहीं मिला तो वह टेंडर प्रक्रिया की छोटी-छोटी या मामूली कमियों को ढूढ़ कर तिल का तार बनाया जा रहा है। कई बार तो ऐसा भी देखने को मिला हैं कि टेंडर प्रक्रिया पूरी तरह से नियमानुसार और पारदर्शी होने के बावजूद उसमें अड़ंगा लगाया गया है।
बहरहाल टेंडर प्रक्रिया को और पारदर्शी बनाने के लिए नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक द्वारा हर प्रकार की शिकायतों और सुझावों को गंभीरता से लिया जाता है। लेकिन निगम अधिकारी इस बार टेंडर की जमाखोरी करने वाले ठेकेदारों को बख्सने के मूड में नहीं हैं। नगर निगम सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक लगभग आधा दर्जन ऐसे ठेकेदार हैं जिनके द्वारा 40 से 50 कामों को अभी तक शुरू नहीं किया गया है। सूत्र बताते हैं कि चीफ इंजीनियर एनके चौधरी द्वारा जमाखोर ठेकेदार और उनके द्वारा हासिल किये गये टेंडर और काम नहीं शुरू किये गये टेंडरों की लिस्ट बनाई जा रही है। इन शातिर ठेकेदारों को डीबार्ड से लेकर ब्लैक लिस्ट तक किया जा सकता है।
















