नवरात्रि के 7वें दिन यानी महासप्तमी को माता कालरात्रि की पूजा की जाती है। जैसा उनका नाम है, वैसा ही उनका रूप है। खुले बालों में अमावस की रात से भी काली, मां कालरात्रि की छवि देखकर ही भूत-प्रेत भाग जाते हैं। मां वर्ण काला है। खूले बालों वाली यह माता गर्दभ पर बैठी हुई हैं। इनकी श्वास से भयंकर अग्नि निकलती है। इतना भयंकर रूप होने के बाद भी वे एक हाथ से भक्तों को अभय दे रही है। मधु कैटभ को मारने में मां का ही योगदान था। मां का भय उत्पन्न करने वाला रूप केवल दुष्टों के लिए है। अपने भक्तों के लिए मां अत्यंत ही शुभ फलदायी है।
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कई जगह इन्हें शुभकरी नाम से भी जाना जाता है। मां कालरात्रि का वाहन गधा है। इस देवी का दायां हाथ हमेशा ऊपर की ओर उठा रहता है जो ये इंगित करता है कि मां सभी को आशीर्वाद दे रही हैं। मां कालरात्रि के निचले दाहिने हाथ की मुद्रा भक्तों के भय को दूर करने वाली है। जबकि उनका बाएं हाथ में लोहे से बना एक कांटे जैसा अस्त्र है और निचले बाएं हाथ में कटार है। मां कालरात्रि दुष्टों का विनाश करने वाली हैं। दानव, दैत्य, राक्षस, भूत, प्रेत आदि इनके स्मरण मात्र से ही भयभीत होकर भाग जाते हैं। ये ग्रह-बाधाओं को भी दूर करने वाली हैं। इनके उपासकों को अग्नि-भय, जल-भय, जंतु-भय, शत्रु-भय, रात्रि-भय आदि कभी नहीं होते।
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इनकी कृपा से वह सर्वथा भय-मुक्त हो जाता है। नवरात्रि के 7वें दिन साधक का मन सहस्त्रार चक्र तक पहुंच जाता है। इस तरह के भक्तों के लिए ब्रह्मांड की सभी सिद्धियों को प्राप्त करने के दरवाजे खुल जाते हैं। इस दिन मां कालरात्रि की पूजा करने से सभी पाप धुल जाते हंै और रास्ते में आने वाली सभी बाधाएं पूरी तरह खत्म हो जाती हैं।
मां कालरात्रि का मंत्र: कालरात्रि देव्ये नम:
















