नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक ने प्रदूषण-मुक्त और स्वच्छ शहर बनाने के लिए की रणनीतिक बैठक

-वायु गुणवत्ता सुधार, कचरा प्रबंधन, गड्ढामुक्त सड़कें और सीवर परियोजनाओं के लिए आवास विकास एवं निगम अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश
-सिद्धार्थ विहार, सिकंदरपुर और अन्य आवास विकास क्षेत्रों में ठोस कार्ययोजना लागू करने के लिए सभी विभागों को मिलाकर बनाई विस्तृत रणनीति
-निगम सीमा के बाहर भी वायु गुणवत्ता सुधार अभियान को तेज करने और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन सुनिश्चित करने के निर्देश

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। शहर की बिगड़ती वायु गुणवत्ता को सुधारने और नागरिकों को स्वच्छ एवं स्वास्थ्यप्रद वातावरण उपलब्ध कराने के लिए नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक ने शुक्रवार को आवास विकास एवं नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारियों की संयुक्त बैठक बुलाकर वायु प्रदूषण नियंत्रण, कचरा प्रबंधन और सड़कों की मरम्मत सहित शहर के महत्वपूर्ण मुद्दों पर गंभीर मंथन किया।
बैठक में नगर आयुक्त ने स्पष्ट रूप से कहा कि वायु प्रदूषण पर नियंत्रण केवल नगर निगम का कार्य नहीं है, बल्कि इसके लिए सभी विभागों की सक्रिय भागीदारी अनिवार्य है। उन्होंने आवास विकास विभाग से आग्रह किया कि शहर के हर क्षेत्र में प्रदूषण रोकथाम अभियान को समान रूप से प्रभावी बनाया जाए। नगर आयुक्त ने बताया कि नगर निगम 24 घंटे वायु गुणवत्ता सुधार हेतु लगातार प्रयासरत है, लेकिन शहर के कुछ क्षेत्र निगम सीमा से बाहर आते हैं, जहाँ वायु प्रदूषण की स्थिति गंभीर बनी हुई है। ऐसे क्षेत्रों में भी अभियान प्रभावी बनाने हेतु आवास विकास विभाग के साथ समन्वय स्थापित किया जा रहा है।

बैठक में विशेष रूप से सिद्धार्थ विहार, सिकंदरपुर और अन्य आवास विकास क्षेत्रों में वॉटर स्प्रिंकलर, धूल नियंत्रण और एंटी स्मोक गन के नियमित संचालन के लिए कार्ययोजना तैयार करने पर जोर दिया गया। अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि इन उपकरणों का उपयोग समयबद्ध और सतत रूप से किया जाए ताकि वायु गुणवत्ता में सुधार देखा जा सके। इस अवसर पर बैठक में उप आवास आयुक्त मेरठ जोन अनिल कुमार सिंह, अधिशासी अभियंता विकास गौतम, हवलदार राम, निखिल महेश्वरी, नगर निगम से अपर नगर आयुक्त अवनींद्र कुमार, मुख्य अभियंता नरेंद्र कुमार चौधरी, जलकल विभाग से आश कुमार एवं नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मिथिलेश कुमार उपस्थित रहे। नगर आयुक्त ने बैठक में शहर हित से जुड़े पाँच प्रमुख मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की और सभी विभागों को शीघ्र कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सिद्धार्थ विहार से निकलने वाले कचरे का वैज्ञानिक निस्तारण अत्यंत आवश्यक है।

इसके साथ ही अजंता पुरम, सिकंदरपुर और अन्य आवास विकास क्षेत्रों की सड़कों को गड्ढामुक्त बनाना और निर्माण एवं ध्वस्तीकरण (सी एंड डी) कचरे से मुक्त कराना भी प्राथमिकता में शामिल किया गया। बैठक में आवास विकास क्षेत्र में एमआरएफ सेंटर (सूखा कचरा प्रसंस्करण केंद्र) और कचरा स्थानांतरण केंद्र स्थापित करने के प्रस्ताव को नगर आयुक्त ने तत्काल क्रियान्वयन योग्य बताते हुए इसे प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। इसके अतिरिक्त, आवास विकास की योजनाओं में बनने वाली सीवर लाइन और सीवेज उपचार संयंत्र (एसटीपी) की जानकारी नगर निगम के साथ साझा करने पर जोर दिया गया। नगर आयुक्त ने सभी विभागों को स्पष्ट संदेश दिया कि गाजियाबाद को प्रदूषण मुक्त और स्वच्छ बनाने के लिए सामूहिक प्रयास ही समाधान हैं।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, सीवर लाइन और शोधन संयंत्र तथा शहरी स्वच्छता से जुड़े कार्यों को तत्काल प्राथमिकता दी जाए। इसके साथ ही नगर निगम की 311 नागरिक शिकायत प्रणाली से आवास विकास विभाग को जोडऩे का सुझाव भी दिया गया, ताकि जनहित से जुड़े मुद्दों को शीघ्र और प्रभावी ढंग से हल किया जा सके। नगर आयुक्त ने बैठक के अंत में कहा कि भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए शहर को प्रदूषण-मुक्त, स्वच्छ और व्यवस्थित बनाने के लिए हर विभाग को एकजुट होकर काम करना होगा। यह केवल नगर निगम का प्रयास नहीं, बल्कि सभी विभागों का सामूहिक दायित्व है।

हमें सुनिश्चित करना होगा कि हर क्षेत्र में आधुनिक तकनीक और सतत कार्ययोजना के माध्यम से नागरिकों को स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण मिले।  इस बैठक में नगर निगम और आवास विकास विभाग के अधिकारियों ने अपने क्षेत्रीय अभियानों और कार्ययोजना के लिए अपनी प्रतिबद्धता जाहिर की। नगर आयुक्त ने सभी विभागों से कहा कि शहरी सौन्दर्यीकरण और प्रदूषण नियंत्रण के लिए तैयार मास्टर प्लान को शीघ्र प्रस्तुत करें, ताकि गाजियाबाद को शासन की मंशा के अनुरूप आदर्श और प्रदूषण मुक्त शहर बनाया जा सके।