-सूखा कचरा निस्तारण प्रणाली की इंदौर में आयोजित कार्यशाला में निकायों ने की सराहना, नगर आयुक्त ने दिया प्रेजेंटेशन
-निगम ने सूखा कूड़ा निस्तारण के साथ-साथ सृजित की करोड़ों की आय, प्रदेश का पहला नगर निगम गाजियाबाद
उदय भूमि
गाजियाबाद। नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक ने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट इंदौर पहुंचकर गाजियाबाद में किये जा रहे सूखा कचरा निस्तारण की कार्य प्रणाली को साझा किया। कार्यक्रम में लगभग 13 राज्यों के विभिन्न निकायों द्वारा प्रतिभाग किया गया। जिनके बीच गाजियाबाद नगर निगम द्वारा किए जा रहे सूखा कचरा निस्तारण को लेकर प्रेजेंटेशन दी गई। नगर आयुक्त के इस प्रेजेंटेशन की सराहना हुई और नगर निगम की सूखा कचरा निस्तारण प्रणाली से आय का सृजन होना प्रशंसनीय रहा। सूखे कूड़े के निस्तारण को लेकर गाजियाबाद में जो प्लान चल रहा है, देखा जाए तो वह कहीं और नहीं है। यहां सूखे कूड़े को इकठ्ठा करके उसकी छंटाई की जाती है। जिससे नगर निगम को वित्तीय वर्ष में तीन करोड़ 50 लाख रुपये की आय हुई है। वहीं, सूखे कूड़े का प्रबंधन कैसे किया जाता है। गाजियाबाद की कार्य प्रणाली से प्रभावित होकर अन्य नगर निकायों ने भी रुचि दिखाई। मौके पर जोधपुर, कन्याकुमारी, अलवर, चंडीगढ़ व अन्य निकायों के नगर आयुक्त उपस्थित रहे।
नगर आयुक्त ने बताया आईआईएमए इंदौर में कचरा निस्तारण को लेकर कार्यशाला का आयोजन किया। जिसमें उत्तर प्रदेश की तरफ से गाजियाबाद को सूखा कचरा निस्तारण के साथ-साथ सृजित आय पर प्रेजेंटेशन देने के लिए भेजा गया। गाजियाबाद नगर निगम द्वारा पिछले वित्तीय वर्ष में लगभग 3 करोड़ 50 लाख का रेवेन्यू भी सूखा कचरा निस्तारण के साथ-साथ बनाया गया। जो कि प्रदेश में पहला नगर निगम है, जिसके द्वारा इस प्रकार की कार्यप्रणाली अपनाई गई। जिसका 25 प्रतिशत स्वीपर वेलफेयर फंड में इस्तेमाल के लिए सफाई मित्रों को लाभ दिलाने के लिए एसओपी भी तैयार की गई। शहर में रेत मंडी और सिहानी में एमआरएफ भी स्थापित किए गए। जिसके माध्यम से सूखा कचरा अलग करते हुए रीसाइकिलेबल कचरे को इस्तेमाल में लिया गया और आय का सृजन हुआ। गार्बेज फैक्ट्री में भी अधिकारियों की मॉनिटरिंग में सूखे कचरे के निस्तारण की कार्यवाही तेजी से चल रही है। इसी क्रम को आगे बढ़ते हुए सिंगल यूज प्लास्टिक से पाइप बनाने की कार्य प्रणाली को भी तेजी दी जा रही है।
शहर हित में लगातार कार्य करने के क्रम में ही विकल ट्रैकिंग मॉनिटरिंग सिस्टम का सेटअप भी किया गया। जिससे शहर को भी लाभ मिल रहा है और निगम द्वारा शहर के कचरे का पृथक्करण करने में आसानी रही। कार्बन क्रेडिट पर भी नगर निगम द्वारा रिवेन्यू सृजन करने का कार्य किया जा रहा है। इसी क्रम में लिगसी वेस्ट के निस्तारण के साथ-साथ मियावाकी पद्धति से प्लांटेशन को भी बढ़ावा मिला, जिसकी क्रम में मीथेन गैस कम हुई है। गाजियाबाद नगर निगम द्वारा ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को लेकर किए जा रहे कार्य सराहनीय हैं। ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को स्वावलंबी भी बनाया जा रहा है। जिसकी प्रशंसा देश भर में हो रही है। नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक के नेतृत्व में हर घर को कचरा पृथक्करण के लिए भी जागरूक किया जा रहा है। जिसको रफ्तार देते हुए गाजियाबाद नगर निगम योजना के क्रम में सूखे कचरे का निस्तारण बेहतर तरीके से कर रहा है। नगर आयुक्त द्वारा पहले दिल्ली में भी प्रेजेंटेशन दी गई, जो की सफल रही। इसके बाद इंदौर में भी देश के कोने-कोने तक गाजियाबाद का नाम सूखे कूड़े निस्तारण में पहुंचा है।

















