-शराब विक्रेताओं पर नकेल कसने के लिए आबकारी अधिकारी ने चलाई नई मुहिम
-शराब पर ओवर रेटिंग के गठजोड़ में शामिल लोगों की खुलेंगी पोल, पकड़े जाने पर अनुज्ञापी पर होगी कार्रवाई
-नियमों का उल्लंघन कर आबकारी विभाग की छवि को धूमिल करने वाले विक्रेताओं की खंगाली जा रही कुंडली
उदय भूमि
गौतमबुद्ध नगर। शराब की दुकानों पर चल रही ओवर रेटिंग का खेल अब आबकारी विभाग के सिर का दर्द बन गया है। जनपद हो या फिर यूपी हर जगह लाइसेंसी शराब की दुकानों पर मौजूद विक्रेताओं के चलते आबकारी विभाग के सबसे बड़ी चुनौती शराब पर होने वाली ओवर रेटिंग को रोकना हो गया है। कभी सोशल मीडिया तो कभी अधिकारियों द्वारा की जा रही गुप्त टेस्ट परचेजिंग में शराब विक्रेताओं की पोल खुल रही है। हर दिन कोई न कोई शराब विक्रेता सलाखों के पीछे पहुंच रहा है। वहीं शराब विक्रेताओं का यह लालच कहीं न कहीं आबकारी विभाग की छवि को पूरी तरह से धूमिल कर रहा है। शराब विक्रेताओं का यह लालच कोई लाखों का नहीं है, देखा जाए तो दुकानों पर प्रतिदिन ग्राहकों से हो रही अवैध वसूली से कहीं न कहीं शराब विक्रेता प्रतिदिन हजारों रुपये की कमाई कर रहे है। इस बात से या तो अनुज्ञापी पूरी तरह अनजान है या फिर उनकी सहभागिता भी शामिल है। क्योंकि जिस तरह से शराब विक्रेता आबकारी विभाग की आंखों में धूल झोंककर अपनी जेब भर रहे है।
ओवर रेटिंग के इस खेल में इस समय असली किरदार कौन निभा रहा है, यह अभी तक पता नहीं चल पाया है। मगर देखा जाए तो ओवर रेटिंग के इस खेल के बादशाह कहीं न कहीं अनुज्ञापी की भूमिका सामने आ रही है। क्योंकि जिस तरह से जिले में लाइसेंसी शराब की दुकानों पर काम कर रहे विक्रेता की अगर महीने की इनकम देखी जाए तो कहीं न कहीं सबसे बड़ा कारण यही है। कम सैलरी में काम करने वाले विक्रेता सबसे अधिक दुकानों पर शराब पर ओवर रेटिंग कर अपनी कमाई को बढ़ाने का प्रयास कर रहे है। वहीं इन सब में कम सैलरी में काम करने वाले विक्रेता अनुज्ञापी के लिए सबसे बड़े लाभदायक सिद्ध हो रहे है। क्योंकि कम सैलरी में काम करने वाले शराब विक्रेताओं को मालूम है कि उन्हें अपने खर्चों को किस तरह से पूरा करना है और कहां से कमाई करनी है। जिसमें वह पूरी तरह से माहिर है। दिन भर में अगर किसी एक विक्रेता ने पांच रुपये के हिसाब से अगर 100 भी ग्राहक से वसूली कर ली तो उसकी 500 रुपये की दिहाड़ी तय है। शराब विक्रेताओं का यहीं लालच आबकारी अधिकारी और उनके इंस्पेक्टरों की गले की फांस बन गया है। क्योंकि शराब पर ओवर रेटिंग करते हुए पकड़े जाने पर वह तो जेल से छूट जाएगा।
भले ही वह यूपी में शराब विक्रेता का काम न कर सकें, मगर उसकी जगह कहीं अन्य राज्यों में शराब विक्रेता या फिर कैंटीन पर काम कर सकता है। लेकिन शराब विक्रेता का यहीं लालच कभी-कभी आबकारी निरीक्षकों की नौकरी पर राहू बनकर सवार हो जाता है। जिसके चलते इंस्पेक्टरों को किन मुसीबतों का सामना करना पड़ता है, यह बताया नहीं जा सकता है। अगर आबकारी विभाग ओवर रेटिंग के मामलों पर अनुज्ञापियों पर कार्रवाई में बदलाव करें तो यह संभव है कि ओवर रेटिंग की शिकायतों पर कंट्रोल किया जा सकता है। मगर ओवर रेटिंग के मामलों में अनुज्ञापी जुर्माना भरकर और नोटिस का जवाब देकर बच निकलते है। शराब पर होने वाली ओवर रेटिंग के खेल को जड़ से खत्म करने के लिए अब जिला आबकारी अधिकारी के साथ इंस्पेक्टर और उनके अलावा मेरठ मंडल उप आबकारी आयुक्त ने भी अपनी कार्रवाई धार देना शुरु कर दिया है। भले ही वह जिला आबकारी अधिकारी और इंस्पेक्टरों की नजर से बचकर ओवर रेटिंग कर लें, लेकिन उप आबकारी आयुक्त की नजर से बचना विक्रेताओं के लिए इतना आसान नहीं है।
मेरठ मंडल उप आबकारी आयुक्त ने अपना हंटर चलाते हुए एक ही दिन में एक नहीं बल्कि एक साथ 16 शराब विक्रेताओं की विकट गिरा दी। मेरठ मंडल उप आबकारी आयुक्त द्वारा किए गए गुप्त टेस्ट परचेजिंग में शराब विक्रेता ग्राहकों से 5, 10 रुपये अधिक की वसूली करते हुए पकड़े गए। जहां शराब विक्रेताओं पर तत्काल कार्रवाई करते हुए उन्हें सलाखों के पीछे भेजा गया और संबंधित लाइसेंसी के खिलाफ जुर्माना लगाते हुए कारण बताओ का नोटिस जारी किया।
जनपद गौतमबुद्ध नगर में अवैध शराब के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत आबकारी विभाग की टीमें लगातार कार्रवाई और छापेमारी कर रही है। वहीं रविवार को मेरठ मंडल उप आबकारी आयुक्त राकेश कुमार सिंह ने गौतमबुद्ध नगर में चल रही अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई और चेकिंग का जायजा लेने के लिए औचक निरीक्षण किया।
इस दौरान मेरठ मंडल उप आबकारी आयुक्त ने खुद जिले में 18 से अधिक दुकानों पर गुप्त टेस्ट परचेजिंग की कार्रवाई की। जिसमें 7 देशी शराब की दुकान, 5 विदेशी शराब की दुकान, 3 बीयर की दुकान और एक मॉडल शॉप पर ओवर रेटिंग करते हुए विक्रेता रंगेहाथ पकड़े गए। सर्किल क्षेत्र 6 में 9, सर्किल तीन में 4, सर्किल पांच में 2 और सर्किल 1 में एक दुकानों पर ओवर रेटिंग मिली। इस दौरान शराब विक्रेताओं की वीडिय़ो भी बनाई गई, जिससे वह अपने कृत्य को छिपा न सकें। मेरठ मंडल उप आबकारी आयुक्त ने तत्काल संबंधित इंस्पेक्टर को मौके बुलाकर विक्रेताओं के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए। साथ ही अनुज्ञापियों पर जुर्माना और कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया। ओवर रेटिंग कर रहे 16 विक्रेता के खिलाफ आबकारी अधिनियम के तहत कार्रवाई करते हुए सलाखों के पीछे भेजा गया और आबकारी विभाग के पोर्टल पर ब्लैक लिस्ट की कार्रवाई भी की गई।
मेरठ मंडल उप आबकारी आयुक्त ने आबकारी अधिकारी, इंस्पेक्टर को हिदायत दी कि अपने-अपने क्षेत्र में गुप्त टेस्ट परचेजिंग की कार्रवाई को बढ़ाया जाए। शराब पर ओवर रेटिंग बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं होगी। वहीं अनुज्ञापियों को भी हिदायत दी कि अगर लाइसेंसी दुकान चलानी है तो नियमों का पालन करना होगा। यह नहीं कि लाइसेंस लेने के बाद विक्रेता के हवाले कर दिया है। खुद भी दुकानों पर रहें और विक्रेताओं पर निगरानी रखें। नहीं तो दुकान का लाइसेंस निरस्त करने में बिल्कुल भी देरी नहीं की जाएगी। मेरठ जोन में अवैध शराब के कारोबार को जड़ से खत्म करने और ओवर रेटिंग की शिकायतों पर पूरी तरह से रोक लगाने के लिए मेरठ मंडल उप आबकारी आयुक्त ने अपने कार्यों को अंजाम देना शुरू कर दिया है। कब किस जिले में उनकी गाड़ी घूम जाए यह शायद वह खुद या फिर ड्राइविंग कर रहा चालक ही जानता है। शराब पर हो रही ओवर रेटिंग के खेल को बिगाड़ने के लिए मेरठ मंडल उप आबकारी आयुक्त ने फुलफार्म मैदान में उतर चुके है। वहीं मेरठ मंडल उप आबकारी आयुक्त द्वारा की जा रही लगातार कार्रवाई से अनुज्ञापी के भी होश उड़ गए है। क्योंकि लखनऊ में भी राकेश कुमार सिंह अपने कार्यकाल के दौरान नियमों का उल्लंघन कर दुकान चल रहे अनुज्ञापियों की दुकान बंद करा चुके है।
















