• मोहन मिकिन्स पर प्रमुख सचिव का छापा, सख्त निर्देशों से कांपे अधिकारी
• उत्पादन से लेकर राजस्व तक हर पहलू की बारीकी से जांच, अफसरों को दिए सुधार के निर्देश
• सीसीटीवी निगरानी, शराब भराई और रिकॉर्ड की जांच के बाद अधिकारियों को दिया जवाबदेही का पाठ
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा आबकारी व्यवस्था को पारदर्शी, उत्तरदायी और उच्च गुणवत्ता वाला बनाने की दिशा में निरंतर किए जा रहे प्रयासों के तहत प्रदेश में गन्ना, चीनी उद्योग एवं आबकारी विभाग की प्रमुख सचिव वीना कुमारी मीणा ने शनिवार को गाजियाबाद स्थित ऐतिहासिक औद्योगिक इकाई मोहन मिकिन्स लिमिटेड का औचक निरीक्षण किया। यह निरीक्षण विभागीय सख्ती और सुधार की प्रक्रिया का हिस्सा था, जिसमें उत्पादन प्रणाली, शराब की गुणवत्ता, राजस्व संग्रह, और सुरक्षा मानकों की गहराई से समीक्षा की गई। निरीक्षण के दौरान प्रमुख सचिव के साथ संयुक्त आबकारी आयुक्त सुनील कुमार मिश्रा, उप आबकारी आयुक्त राकेश कुमार सिंह, जिला आबकारी अधिकारी संजय कुमार प्रथम, सहायक आबकारी आयुक्त आसवानी बख्तावर हनीफ समेत अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
अधिकारियों ने उत्पादन संयंत्र, पैकेजिंग यूनिट, स्टोरेज, और डिस्ट्रीब्यूशन प्रणाली का जायज़ा लिया और रिकॉर्ड से लेकर फील्ड गतिविधियों तक की गहन जांच की। निरीक्षण के उपरांत प्रमुख सचिव वीना कुमारी मीणा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि प्रदेश सरकार का उद्देश्य न केवल राजस्व में वृद्धि है, बल्कि उपभोक्ता को सुरक्षित और मानकयुक्त उत्पाद उपलब्ध कराना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। मोहन मिकिन्स जैसी प्रतिष्ठित इकाईयों को आदर्श मॉडल बनना होगा। यदि कहीं भी लापरवाही या भ्रष्टाचार की संभावना नजर आई तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने उत्पादन प्रक्रिया को रीयल टाइम डिजिटल मोड में लाने, सीसीटीवी निगरानी को अपग्रेड करने और प्रत्येक बैच की लैब टेस्टिंग को अनिवार्य करने के निर्देश दिए।
साथ ही, उन्होंने कहा कि राजस्व पारदर्शिता के लिए समय-समय पर वित्तीय ऑडिट और लॉजिस्टिक ट्रेसिंग अनिवार्य की जाए। प्रमुख सचिव के इस औचक निरीक्षण से क्षेत्रीय औद्योगिक इकाइयों में हड़कंप की स्थिति है। हालांकि प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि यह सख्ती सुधारात्मक है और सरकार की मंशा ईमानदार इकाइयों को बढ़ावा देना है। मोहन मिकिन्स जैसी प्रतिष्ठित इकाई से उम्मीद जताई जा रही है कि वह प्रदेश की नीति का आदर्श उदाहरण बनकर उभरेगी।
हर बूंद का हिसाब जरूरी, तकनीकी अपग्रेडेशन हो प्राथमिकता
संयुक्त आयुक्त सुनील मिश्रा ने निरीक्षण के दौरान कहा कि आबकारी विभाग अब सिर्फ परंपरागत प्रणाली पर निर्भर नहीं रहेगा। हमें ऐसी पारदर्शी प्रणाली बनानी है, जिसमें हर लीटर उत्पादन, उसका परिवहन, बिक्री और टैक्स का लेखा-जोखा डिजिटल रूप से दर्ज हो। हम ब्लॉकचेन आधारित सिस्टम लाने की दिशा में भी काम कर रहे हैं। मोहन मिकिन्स जैसी यूनिट्स को इसका हिस्सा बनना चाहिए। उन्होंने उत्पादन यूनिट के कर्मचारियों को भी निर्देश दिया कि किसी भी स्तर पर यदि तकनीकी खामी आए, तो उसकी तुरंत सूचना अधिकारी को दी जाए और सुधार की प्रक्रिया तुरंत शुरू हो।
गुणवत्ता, शुद्धता और समयबद्ध वितरण सुनिश्चित करें
उप आयुक्त राकेश कुमार सिंह ने कहा कि शराब उत्पादन एक संवेदनशील कार्य है और इसमें जनस्वास्थ्य भी सीधे तौर पर जुड़ा होता है। हमारा फोकस सिर्फ रेवेन्यू नहीं, बल्कि समाज को जिम्मेदार और सुरक्षित उत्पाद देना भी है। गुणवत्ता में जरा भी समझौता हुआ तो कार्रवाई तय है। हर बैच की स्वतंत्र जांच, तीसरे पक्ष द्वारा की जाए और रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए। उन्होंने आसवनी प्रबंधन को निर्देश दिए कि सभी मानकों का पालन करते हुए समयबद्ध उत्पादन और डिलीवरी सुनिश्चित करें।
निरीक्षण के बाद समीक्षा बैठक, दिए कई सुधारात्मक सुझाव
निरीक्षण के उपरांत हुई विभागीय बैठक में वरिष्ठ अधिकारियों ने राजस्व प्राप्ति, शिकायत निवारण प्रणाली, अनुज्ञा प्रक्रिया, ठेका संचालन और ट्रांसपोर्टेशन प्रणाली की भी समीक्षा की। प्रमुख सचिव ने स्पष्ट किया कि आबकारी विभाग का हर अधिकारी अपने दायित्व को पूरी निष्ठा और पारदर्शिता से निभाए। शिकायतों के निस्तारण में तेजी और लीकप्रूफ प्रक्रिया विकसित की जाए।


















