अर्नब गोस्वामी की मुश्किलें कायम, जमानत नहीं

बॉम्बे हाईकोर्ट का अंतिम जमानत देने से इंकार

मुंबई। रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ अर्नब गोस्वामी की मुश्किलें बरकार हैं। जेल से बाहर आने की उनकी उम्मीदों को सोमवार को झटका लग गया। बॉम्बे हाईकोर्ट ने अर्नब गोस्वामी को अंतरिम जमानत देने से साफ इनकार कर दिया है। हाईकोर्ट ने उन्हें अंतरिम जमानत के लिए निचली अदालत में जाने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि इस केस में कोई ऐसी परिस्थिति पैदा नहीं हुई है कि कोर्ट अपनी असाधारण शक्तियों का प्रयोग करे। नियमित बेल की वैकल्पिक व्यवस्था याचिका कर्ता के पास उपलब्ध है। कोर्ट ने कहा कि बेल के लिए आरोपी सेशंस कोर्ट में जा सकता है। संबंधित अदालत निर्धारित 4 दिन की अवधि के भीतर इस पर फैसला करेगी। कोर्ट ने कहा कि जमानत हेतु पहले मजिस्ट्रेट कोर्ट इसके बाद सत्र न्यायालय में आवेदन करना होता है। जमानत न मिलने पर हाईकोर्ट में अर्जी दी जाती है। इस प्रकरण में कोई अलग से व्यवस्था नहीं है। उधर, कोर्ट ने इस प्रकरण में सह-आरोपी नीतीश सारदा और प्रवीन राजेश सिंह की अंतरिम जमानत अर्जी भी निरस्त कर दी है। कोर्ट ने कहा है कि अभियुक्त सत्र न्यायालय का दरवाजा खट-खटा सकते हैं। संबंधित कोर्ट निर्धारित समय सीमा में आवेदन पर फैसला करेगी। बता दें कि मुंबई में कुछ दिन पहले अर्नब गोस्वामी सहित 3 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। उन पर इंटीरियर डिजाइनर को आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगा है। यह मामला काफी पुराना है। पीड़ित पक्ष की गुहार पर कोर्ट ने दोबारा से इस मामले की जांच के आदेश दिए हैं। पीड़ित परिवार का आरोप है कि अर्नब गोस्वामी के कारण डिजाइनर ने खुदकुशी कर ली थी। सुसाइड नोट में भी इसका जिक्र किया गया था। उधर, अर्नब गोस्वामी गिरफ्तारी पर देश में मिश्रित प्रतिक्रिया सामने आई हैं। भाजपा ने गोस्वामी की गिरफ्तारी का विरोध कर महाराष्ट्र की शिवसेना सरकार पर निशाना साधा था।