GDA उपाध्यक्ष अतुल वत्स ने शहर के विकास को लेकर महत्वपूर्ण योजनाओं को धरातल पर उतारने की कवायद शुरू कर दी है। शहरवासियों को बेहतर आवास उपलब्ध कराने की सोच के साथ गाजियाबाद में मिनी सिटी बसाने की योजना तैयार की गई है। अतुल वत्स के इस प्लानिंग को सरकार का भी समर्थन मिल रहा है। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि जल्द ही जीडीए द्वारा आवासीय स्कीम लॉन्च की जाएगी। पिछले कुछ वर्षों में जीडीए की उपलब्धि की बात करें तो शहर में सिर्फ अवैध कॉलोनियों का ही विकास हुआ है। एक समय जीडीए की गिनती उत्तर प्रदेश के अति संपन्न विकास प्राधिकरण में होती थी। लेकिन विगत वर्षों में जीडीए की स्थिति उस जमीदार की तरह हो गई जो अपने बाप-दादा द्वारा अर्जित संपत्ति बेचकर अपने रोजमर्रा के खर्च को पूरा करता है। अतुल वत्स के जीडीए उपाध्यक्ष का चार्ज संभालने के बाद से सकारात्मक माहौल दिखाई दे रहा है। लगभग डेढ़ हजार करोड़ रुपये के कर्ज के बोझ तले दबे जीडीए को कर्ज के मकड़जाल से छुटकारा दिलाने के साथ ही नई योजनाओं को अमलीजामा पहनाने को लेकर चर्चाएं होने लगी है। अतुल वत्स का दावा है कि वह कर्ज के बोझ को भी कम करेंगे और विकास योजनाओं के क्रियान्वयन की रफ्तार को भी गति देंगे।
विजय मिश्रा (उदय भूमि)
गाजियाबाद। गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) के उपाध्यक्ष अतुल वत्स ने शहर के विकास को लेकर महत्वपूर्ण योजनाओं को धरातल पर उतारने की कवायद शुरू कर दी है। शहरवासियों को बेहतर आवास उपलब्ध कराने की सोच के साथ गाजियाबाद में मिनी सिटी बसाने की योजना तैयार की गई है। अतुल वत्स के इस प्लानिंग को सरकार का भी समर्थन मिल रहा है। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि जल्द ही जीडीए द्वारा आवासीय स्कीम लॉन्च की जाएगी। जीडीए का यह आवासीय स्कीम पूर्व की योजनाओं से पूरी तरह अलग होगा। यह एक आवासीय योजना नहीं बल्कि एक हाईटेक मिनी सिटी होगा। इसके अंदर लोगों को सभी तरह की सुविधाएं उपलब्ध होगी। मिनी सिटी लगभग 50 हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैला होगा।

विगत कुछ वर्षों में जीडीए की चर्चा एक बेजान बेबस और लाचार सरकारी संस्थान के रूप में होती रही है। पिछले चार-पांच सालों में जीडीए के कामकाज का लेखा-जोखा करें तो प्राधिकरण के पास अपनी उपलब्धि बताने के लिए कुछ नहीं है। उपलब्धि तो छोड़िये जीडीए ने शहर के विकास के संबंधित किसी बड़ी योजना पर काम ही नहीं किया। एक समय जीडीए की गिनती उत्तर प्रदेश के अति संपन्न विकास प्राधिकरण में होती थी। लेकिन विगत वर्षों में जीडीए की स्थिति उस जमीदार की तरह हो गई जो अपने बाप-दादा द्वारा अर्जित संपत्ति को बेचकर अपने रोजमर्रा के खर्च को पूरा करता है। बहरहाल अब परिस्थितियों में बदलाव होता हुआ दिखाई दे रहा है। अतुल वत्स के जीडीए उपाध्यक्ष का चार्ज संभालने के बाद से सकारात्मक माहौल दिखाई दे रहा है। लगभग डेढ़ हजार करोड़ रुपये के कर्ज के बोझ तले दबे जीडीए को कर्ज के मकड़जाल से छुटकारा दिलाने के साथ ही नई योजनाओं को अमलीजामा पहनाने को लेकर चर्चाएं होने लगी है। अतुल वत्स का दावा है कि वह कर्ज के बोझ को भी कम करेंगे और विकास योजनाओं के क्रियान्वयन की रफ्तार को भी गति देंगे। एक वर्ष के भीतर जीडीए की कार्य पद्धति में बदलाव के साथ ही प्राधिकरण के नाम पर कई उपलब्धि भी दर्ज होगा। अतुल वत्स को वीसी का चार्ज संभाले अभी चंद महीने ही हुए हैं लेकिन जीडीए में बदलाव का असर दिखाई देने लगा है।
जीडीए अधिकारियों की अदूरदर्शिता के कारण शहर में अवैध कॉलोनियों की बाढ़ आ गई है। पिछले पांच वर्षों की जीडीए की उपलब्धि की बात करें तो शहर में सिर्फ अवैध कॉलोनियों का विकास ही हुआ है। लेकिन अब इस पर विराम लगने के साथ ही जीडीए द्वारा नई आवासीय कॉलोनी बसाने की योजना पर भी काम किया जा रहा है। जीडीए वीसी अतुल वत्स ने अब नया हाईटेक मिनी सिटी बसाने की योजना पर प्राथमिकता के साथ प्लानिंग शुरू कर दी है। लगभग 50 हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैला सिटी रैपिड रेल कॉरिडोर के नजदीक होगा। दिल्ली-मेरठ मार्ग पर दुहाई, भिक्कनपुर व मधुबन-बापूधाम आवासीय योजना के आसपास सिटी बसाने की योजना पर काम शुरू हो गया है। आगामी जीडीए बोर्ड बैठक में इस बाबत प्रस्ताव रखा जाएगा। बोर्ड की सहमति के बाद प्रस्ताव को स्वीकृति के लिए शासन के पास भेजा जाएगा। जीडीए वीसी की कार्ययोजना की शासन से भी तारीफ होती रही है। ऐसे में शासन से भी इस प्रस्ताव को स्वीकृति मिल जाएगी। मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण एवं नए शहर प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत नए शहरों का समग्र एवं समुचित विकास किए जाने एवं नया शहर बसाने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा भूमि खरीदने पर 50 प्रतिशत की धनराशि की मदद भी दी जाती है। मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण एवं नए शहर प्रोत्साहन योजना-2023-24 के तहत जीडीए के तत्कालीन उपाध्यक्ष द्वारा कोई प्रस्ताव नहीं भेजा गया। मास्टर प्लान के खेल में उलझे जीडीए अधिकारियों ने गाजियाबाद शहर के विकास से संबंधित प्रस्तावों को डस्टबिन में डाल दिया। गोरखपुर, अलीगढ़, बुलंदशहर सरीखे प्राधिकरण को नया शहर बसाने और शहर में विकास कार्य कराने के लिए सैकड़ों करोड़ की मदद मिली। लेकिन विकास योजनाओं को लेकर मृतप्राय हो चुके गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के अधिकारियों को सिर्फ लानत-मलानत ही मिली।
मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण एवं नए शहर प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत जीडीए द्वारा नया शहर बसाने की प्लानिंग की जा रही है। इसके अलावा विभिन्न मदों में जीडीए के फंसे हुए फंड को जारी करवाने की भी कवायद की जा रही है। जीडीए का इनकम टैक्स में करीब 400 करोड़ रुपए और अवस्थापना विकास निधि का करीब 600 करोड़ रुपए फंसा हुआ है। मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण एवं नया शहर प्रोत्साहन योजना के तहत जीडीए को 300 करोड़ रुपए से ज्यादा मिलने की उम्मीद हैं। ऐसे में अतुल वत्स की कार्य योजना सफल रही तो जीडीए कर्ज के मकड़जाल से मुक्त होने के साथ ही शहर में विकास के नये अध्याय लिखेगा। –
















