51 लाख रुपए दहेज लौटा कर दूल्हे ने पेश की मिसाल

• मुरादनगर के भिक्कनपुर गांव में विश्वजीत सिंह ने दहेज प्रथा को ठुकरा कर दिया समाज को नया संदेश, राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के वरिष्ठ नेता चौधरी अजय पाल प्रमुख के पोते और अरुण सिंह कलकल के पुत्र विश्वजीत सिंह की सगाई सोमवार को भव्य समारोह के बीच हुई। दुल्हन पक्ष से लड़की के पिता चौधरी श्याम सिंह अहलावत और भाई शिवम ने रस्म के दौरान 51 लाख रुपए नकद उनकी थाली में रख दिए। यह देखकर दूल्हे विश्वजीत ने तुरंत ही पैसे वापस करते हुए स्पष्ट कह दिया कि वे दहेज नहीं लेंगे। समारोह में मौजूद परिजनों और ग्रामीणों ने काफी मान-मनौव्वल की, लेकिन विश्वजीत अपने फैसले पर अडिग रहे

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। दहेज जैसी कुप्रथा के खिलाफ एक साहसिक कदम उठाते हुए गाजियाबाद के मुरादनगर क्षेत्र के गांव भिक्कनपुर में एक युवा ने समाज के सामने एक अनूठी मिसाल पेश की। सोमवार को हुई सगाई के दौरान विश्वजीत सिंह ने दुल्हन पक्ष से मिले 51 लाख रुपए दहेज स्वरूप ठुकरा कर समाज को नई दिशा देने का कार्य किया। राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के वरिष्ठ नेता चौधरी अजय पाल प्रमुख के पोते और अरुण सिंह कलकल के पुत्र विश्वजीत सिंह की सगाई सोमवार को भव्य समारोह के बीच हुई। दुल्हन पक्ष से लड़की के पिता चौधरी श्याम सिंह अहलावत और भाई शिवम ने रस्म के दौरान 51 लाख रुपए नकद उनकी थाली में रख दिए। यह देखकर दूल्हे विश्वजीत ने तुरंत ही पैसे वापस करते हुए स्पष्ट कह दिया कि वे दहेज नहीं लेंगे। समारोह में मौजूद परिजनों और ग्रामीणों ने काफी मान-मनौव्वल की, लेकिन विश्वजीत अपने फैसले पर अडिग रहे।

इस फैसले में विश्वजीत का परिवार भी पूरी तरह उनके साथ खड़ा रहा। रालोद नेता चौधरी अजयपाल प्रमुख और विश्वजीत के चाचा सुधीर चौधरी ने भी स्पष्ट शब्दों में दहेज के खिलाफ अपना समर्थन जताते हुए पैसे लौटाने के फैसले की सराहना की। विश्वजीत सिंह ने कहा कि शादी दो परिवारों के बीच विश्वास और प्यार का बंधन है, इसे पैसों से तौलना गलत है। हम एक आदर्श स्थापित करना चाहते हैं कि समाज में बेटियों को बोझ न समझा जाए। मूल रूप से गांव भिक्कनपुर निवासी विश्वजीत सिंह बीकॉम पास हैं और पेशे से एक सिविल कांट्रेक्टर हैं। उनकी शादी जनपद मुजफ्फरनगर के भोपा क्षेत्र के गांव रहकड़ा निवासी चौधरी श्याम सिंह की बेटी रूपा अहलावत से तय हुई है।

सगाई समारोह भिक्कनपुर गांव में धूमधाम से आयोजित हुआ था। विश्वजीत के इस साहसिक कदम को ग्रामीणों और मेहमानों ने खूब सराहा। समारोह स्थल पर मौजूद लोगों ने इसे दहेज प्रथा के खिलाफ एक नई मुहिम की शुरुआत बताया। उनका मानना है कि यदि ऐसे उदाहरण समाज में लगातार बढ़ें, तो दहेज जैसी बुराइयों का अंत संभव है। विश्वजीत सिंह का यह कदम आज के युवाओं के लिए प्रेरणास्त्रोत बन गया है। दहेज प्रथा जैसी सामाजिक बुराइयों को समाप्त करने के लिए अब अधिक से अधिक युवाओं को आगे आना होगा, तभी समाज में वास्तविक बदलाव संभव हो सकेगा।