• जीडीए ने शुरू की नई पहल, सैटेलाइट इमेजिंग और जियोस्पेशियल एनालिसिस से होगी 24&7 निगरानी
• जीडीए की नई तकनीकी पहल से होगा निर्माण गतिविधियों का रीयल-टाइम मॉनिटरिंग, सैटेलाइट इमेजिंग और जियोस्पेशियल एनालिसिस से पकड़े जाएंगे अवैध निर्माण
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। अब गाजियाबाद में बिना अनुमति के निर्माण कार्य करने वालों की मुश्किलें बढऩे वाली हैं। गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) ने अवैध निर्माण पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए ऑर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का सहारा लेने की नई पहल शुरू की है। सोमवार को जीडीए उपाध्यक्ष अतुल वत्स के निर्देश पर प्राधिकरण सभागार में अधिकारियों को एआई तकनीक का प्रशिक्षण देने के लिए कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला की अध्यक्षता जीडीए के अपर सचिव प्रदीप कुमार सिंह ने की। इस दौरान अधिशासी अभियंता, अवर अभियंता समेत अन्य अधिकारी और जियोट्रिक्स एनालिटिक्स प्राइवेट लिमिटेड के विशेषज्ञ मौजूद रहे। जीडीए अब शहर के सभी आठ जोन क्षेत्रों में सैटेलाइट डाटा और भू-स्थानिक विश्लेषण (जियोस्पेशियल एनालिसिस) के माध्यम से निर्माण गतिविधियों की बारीकी से निगरानी करेगा। जियोट्रिक्स एनालिटिक्स के अत्याधुनिक सॉफ्टवेयर की मदद से सैटेलाइट से ली गई इमेजेस का विश्लेषण कर अवैध निर्माण की पहचान की जाएगी।
हर क्षेत्र की एक पुरानी और एक नई सैटेलाइट तस्वीर ली जाएगी। एआई तकनीक दोनों तस्वीरों की तुलना कर बताएगी कि कहां पर निर्माण में बदलाव हुआ है। उसके बाद इन बदलावों को स्वीकृत नक्शों से मिलाकर यह स्पष्ट किया जाएगा कि निर्माण वैध है या अवैध। जीडीए उपाध्यक्ष अतुल वत्स ने बताया कि सैटेलाइट इमेजिंग और एआई विश्लेषण के जरिए अवैध निर्माण की तुरंत पहचान हो सकेगी। इससे बिना अनुमति के निर्माण कार्यों पर समय रहते कार्रवाई करना संभव होगा। अधिकारी ऐप के जरिये रोजाना मॉनिटरिंग कर सकेंगे और प्रवर्तन टीमों को त्वरित निर्देश जारी किए जाएंगे।
अपर सचिव प्रदीप कुमार सिंह ने बताया कि गाजियाबाद जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहर में समय के साथ निगरानी प्रणाली को भी आधुनिक बनाना जरूरी था। एआई आधारित निगरानी से न केवल अवैध निर्माण पर अंकुश लगेगा, बल्कि समय और संसाधनों की भी बचत होगी। यह तकनीक हमारे कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही भी बढ़ाएगी। जीडीए की प्रतिबद्धता है कि हम गाजियाबाद को सुनियोजित और व्यवस्थित विकास की दिशा में ले जाएं।
वाराणसी मॉडल से मिली प्रेरणा, अब गाजियाबाद में होगी शुरुआत
इससे पहले वाराणसी विकास प्राधिकरण में यह प्रणाली लागू की जा चुकी है, जहां एआई की मदद से अवैध निर्माणों की तुरंत पहचान कर सख्त कार्रवाई की जा रही है। जीडीए ने उसी मॉडल को अपने यहां लागू करने का निर्णय लिया है। अधिकारी मानते हैं कि इससे गाजियाबाद में अवैध निर्माण पर प्रभावी रोक लगेगी और अधिक योजनाबद्ध विकास संभव होगा।
प्रतिदिन ऐप से होगी निगरानी, त्वरित कार्रवाई के आदेश
जीडीए ने एक विशेष ऐप भी तैयार किया है, जिसमें अधिकारी एक समेकित रिपोर्ट के रूप में रोजाना अवैध निर्माण की स्थिति देख सकेंगे। आवश्यकता पडऩे पर संबंधित प्रवर्तन टीम को सीधे निर्देश भेजे जा सकेंगे। इस प्रक्रिया से निर्णय लेने में तेजी आएगी और कार्रवाई में देरी नहीं होगी।


















