‘विकसित उत्तर प्रदेश 2047’ का महामंत्र- नीरज सिंघल ने रखा भविष्य का विज़न डॉक्यूमेंट, पाँच चरणों में विकास की कार्ययोजना

-स्मार्ट इंडस्ट्रियल एस्टेट से लेकर डिजिटल इकॉनमी तक का रोडमैप प्रस्तुत

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। हिन्दी भवन, लोहिया नगर में मंगलवार को आयोजित शताब्दी संकल्प 2047- विकसित उत्तर प्रदेश, समर्थ उत्तर प्रदेश कार्यक्रम ऐतिहासिक बन गया। जिले के प्रशासनिक और औद्योगिक जगत के दिग्गजों की मौजूदगी में इंडस्ट्री और एमएसएमई क्षेत्र के चर्चित नाम, आईआईए के निवर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं केलको ग्रुप के सीएमडी श्री नीरज सिंघल ने भविष्य का ऐसा विज़न डॉक्यूमेंट प्रस्तुत किया, जिसने सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। मुख्य विकास अधिकारी अभिनव गोपाल के नेतृत्व और जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार मांदड़ के निर्देशन में आयोजित इस कार्यक्रम में पूर्व मुख्य सचिव श्री राजेन्द्र कुमार तिवारी, अपर मुख्य सचिव श्री नरेन्द्र भूषण, पूर्व कृषि निदेशक डॉ. जितेन्द्र कुमार तोमर समेत कई प्रशासनिक और औद्योगिक हस्तियां मौजूद रहीं। गाजियाबाद के कई प्रमुख उद्यमियों ने भी इस मंच से अपने विचार साझा किए, लेकिन सबसे प्रभावशाली और केंद्र में रही नीरज सिंघल की प्रस्तुति। नीरज सिंघल ने 2047 तक उत्तर प्रदेश को विकसित प्रदेश बनाने का वृहद रोडमैप पांच चरणों में रखा। उन्होंने 2025 से 2030 तक को आधारभूत सुधार और मजबूत नीतिगत ढांचे के निर्माण की अवधि बताया।

इस दौरान स्मार्ट इंडस्ट्रियल एस्टेट, प्रदूषण प्रबंधन, आधुनिक परिवहन, इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग नेटवर्क और सौर ऊर्जा पार्कों की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि औद्योगिक क्षेत्रों को स्मार्ट शहरों की तरह विकसित करना समय की मांग है, ताकि श्रमिकों के लिए आवास से लेकर अपशिष्ट प्रबंधन तक की सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें। 2031 से 2035 के दौर को उन्होंने औद्योगिक विकास और कौशल संवर्धन का समय बताया। सिंघल ने कहा कि यह वह दशक होगा जब उत्तर प्रदेश को मेक इन इंडिया 2.0 के तहत औद्योगिक विस्तार की दिशा में बड़ी छलांग लगानी होगी। उन्होंने तकनीकी पार्कों, अनुसंधान एवं नवाचार केंद्रों और व्यावसायिक प्रशिक्षण पर जोर दिया। 2036 से 2040 को उन्होंने स्थायित्व और वैश्विक प्रतिस्पर्धा का चरण बताया। इस दौरान जलवायु लचीलापन, डिजिटल इकॉनमी, स्मार्ट सिटी विस्तार और वैश्विक व्यापार समझौतों के जरिए प्रदेश को अंतरराष्ट्रीय मंच पर अग्रणी बनाने की बात कही।

2041 से 2045 को नीरज सिंघल ने विकास लाभों के समेकन का कालखंड बताया, जिसमें स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार, किफायती आवास, स्वायत्त परिवहन और 5जी जैसी आधुनिक तकनीकों के जरिए प्रदेश को नई ऊंचाई देने की आवश्यकता होगी। जबकि 2046 से 2047 का अंतिम स्प्रिंट उन्होंने विकसित उत्तर प्रदेश का दर्जा हासिल करने के लिए निर्णायक वर्ष बताया। उन्होंने कहा कि इस समय नीतिगत सुधार, भ्रष्टाचार विरोधी उपाय, स्मार्ट गवर्नेंस और आत्मनिर्भर नवाचार समूहों की परिपक्वता से प्रदेश को विकसित भारत का हिस्सा बनाया जाएगा।
सिंघल ने अपनी प्रस्तुति में एमएसएमई की समस्याओं और संभावनाओं पर भी गहरी बात रखी। उन्होंने कहा कि प्रदेश की औद्योगिक भूमि नीति में बड़ा सुधार जरूरी है। दिल्ली और हरियाणा की तरह उत्तर प्रदेश में भी लीज होल्ड से फ्री होल्ड नीति लागू की जानी चाहिए, ताकि निवेशकों को विश्वास मिले। उन्होंने एक जिला-एक उत्पाद की जगह एक जिला-तीन उत्पाद की नीति लाने की वकालत की, जिससे स्थानीय उद्योगों को मजबूती मिले।

पूर्व मुख्य सचिव राजेन्द्र कुमार तिवारी ने नीरज सिंघल की प्रस्तुति की भरपूर सराहना करते हुए कहा कि यह रोडमैप न केवल व्यावहारिक है बल्कि लागू करने योग्य भी है। उन्होंने आश्वासन दिया कि दिए गए सुझावों को प्रदेश की नीतियों में शामिल करने का प्रयास किया जाएगा। कार्यक्रम में मौजूद अधिकारियों और उद्योगपतियों ने भी नीरज सिंघल के विज़न को सराहा और इसे उत्तर प्रदेश के भविष्य की दिशा तय करने वाला बताया। इस अवसर पर नीरज सिंघल को पूर्व मुख्य सचिव और अन्य गणमान्य अतिथियों द्वारा शील्ड देकर सम्मानित भी किया गया। आईआईए की ओर से सीईसी सदस्य मनोज कुमार, राष्ट्रीय सचिव प्रदीप गुप्ता, डिवीजनल चेयरमैन राकेश अनेजा, डिवीजनल सचिव अमित नागलिया, कोषाध्यक्ष संजय गर्ग, कन्वेनर दिनेश गर्ग और अन्य गणमान्य सदस्य बड़ी संख्या में मौजूद रहे। नीरज सिंघल की यह प्रस्तुति केवल एक डॉक्यूमेंट नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश को विकसित बनाने की ठोस कार्ययोजना बनकर उभरी। गाजियाबाद से निकला यह महामंत्र आने वाले वर्षों में प्रदेश के औद्योगिक, सामाजिक और आर्थिक परिदृश्य को नई दिशा देगा।