समय पर बीपी जांच और दिनचर्या सुधार ही हाइपरटेंशन से बचाव की कुंजी: डॉ. पवन कुमारी

-‘साइलेंट किलर’ उच्च रक्तचाप पर अलर्ट: जीवनशैली सुधारकर दवा से पहले बचाव संभव
-विश्व उच्च रक्तचाप दिवस पर एमएमजी अस्पताल में चला जागरूकता अभियान
-समय पर जांच, संतुलित आहार और नियमित व्यायाम से हार्ट अटैक-स्ट्रोक का खतरा कम

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। उच्च रक्तचाप यानी हाई ब्लड प्रेशर आज के समय की सबसे गंभीर लेकिन छिपी हुई बीमारी बन चुकी है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार हर 10 में से लगभग 7 लोग किसी न किसी स्तर पर उच्च रक्तचाप की समस्या से प्रभावित हैं। खास बात यह है कि इस बीमारी के शुरुआती लक्षण स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देते, इसी कारण इसे  ‘साइलेंट किलर’ यानी मूक घातक बीमारी कहा जाता है। 17 मई को मनाए जाने वाले विश्व उच्च रक्तचाप दिवस से पहले एमएमजी अस्पताल में सीनियर चिकित्सक डॉ. पवन कुमारी द्वारा विशेष जांच एवं जागरूकता अभियान चलाया गया। इस दौरान अस्पताल में आने वाले मरीजों का रक्तचाप परीक्षण किया गया और उन्हें बिना दवा के भी रक्तचाप नियंत्रित रखने के उपाय विस्तार से बताए गए। डॉ. पवन कुमारी ने बताया कि जब धमनियों में बहने वाले रक्त का दबाव लगातार सामान्य स्तर से अधिक बना रहता है, तब उसे उच्च रक्तचाप कहा जाता है। यह बीमारी धीरे-धीरे शरीर के महत्वपूर्ण अंगों को नुकसान पहुंचाती रहती है और मरीज को तब तक इसका अहसास नहीं होता जब तक कोई गंभीर समस्या सामने न आ जाए। उन्होंने कहा कि अधिकांश मरीज तब अस्पताल पहुंचते हैं जब उन्हें सिरदर्द, चक्कर, सांस लेने में परेशानी या सीने में दर्द जैसी समस्याएं होने लगती हैं।

ऐसे समय में दवाओं की जरूरत पड़ती है, जबकि यदि शुरुआत में ही जीवनशैली सुधार ली जाए तो दवा की आवश्यकता काफी हद तक टाली जा सकती है। एमएमजी अस्पताल में मरीजों की जांच के दौरान डॉ. पवन कुमारी ने व्यक्तिगत परामर्श देते हुए लोगों को वजन नियंत्रित रखने, नियमित शारीरिक गतिविधि अपनाने और खान-पान में सुधार करने की सलाह दी। उनकी कार्यशैली की खास बात यह रही कि उन्होंने केवल चिकित्सा जांच तक खुद को सीमित नहीं रखा बल्कि प्रत्येक मरीज को उसकी दिनचर्या के अनुसार व्यवहारिक सुझाव दिए। अस्पताल में प्रतिदिन 100 से अधिक मरीज सिर्फ हाई ब्लड प्रेशर या फिर शुगर की समस्या को लेकर आते है। उन्होंने समझाया कि अधिक नमक का सेवन उच्च रक्तचाप का सबसे बड़ा कारण है। लोगों को भोजन में नमक और सोडियम की मात्रा कम करनी चाहिए। इसके अलावा मोटापा, मानसिक तनाव, धूम्रपान, शराब का सेवन, कम शारीरिक गतिविधि, जंक फूड या पैकेट बंद भोजन का अत्यधिक उपयोग, पारिवारिक इतिहास, मधुमेह तथा गुर्दा रोग भी रक्तचाप बढ़ाने के प्रमुख कारण हैं।

डॉ. पवन कुमारी ने बताया कि उच्च रक्तचाप केवल दिल की बीमारी नहीं है बल्कि यह पूरे शरीर को प्रभावित करता है। इससे हृदय, मस्तिष्क, आंखें, गुर्दे और रक्त वाहिकाएं प्रभावित होती हैं। समय रहते नियंत्रण न होने पर दिल का दौरा, मस्तिष्काघात, लकवा, गुर्दा विफलता तथा दृष्टि हानि जैसी गंभीर जटिलताएं उत्पन्न हो सकती हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि नियमित रक्तचाप जांच सबसे महत्वपूर्ण कदम है। 30 वर्ष से अधिक आयु के लोगों को समय-समय पर रक्तचाप अवश्य जांचना चाहिए। सही जीवनशैली और नियमित उपचार अपनाने से हृदयाघात, स्ट्रोक और गुर्दा संबंधी बीमारियों से बचाव संभव है। मरीजों को संबोधित करते हुए उन्होंने बताया कि प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट तेज चाल से पैदल चलना, योग, ध्यान और प्राणायाम करना रक्तचाप नियंत्रण में अत्यंत प्रभावी साबित होता है। भोजन में हरी सब्जियां, फल, सलाद और रेशेदार आहार शामिल करना चाहिए, जबकि तला-भुना और अत्यधिक तेलयुक्त भोजन से दूरी बनानी जरूरी है।

उन्होंने यह भी कहा कि धूम्रपान और शराब से पूरी तरह बचना चाहिए क्योंकि यह रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाकर रक्तचाप को तेजी से बढ़ाते हैं। पर्याप्त मात्रा में पानी पीना और रोजाना 7 से 8 घंटे की नींद लेना भी शरीर के संतुलन के लिए आवश्यक है। डॉ. पवन कुमारी की कार्यशैली मरीज-केंद्रित रही। उन्होंने हर मरीज को अलग-अलग समझाते हुए यह संदेश दिया कि उच्च रक्तचाप कोई लाइलाज बीमारी नहीं है, बल्कि सही समय पर जागरूकता और अनुशासित जीवनशैली अपनाकर इसे नियंत्रित किया जा सकता है। विश्व उच्च रक्तचाप दिवस के अवसर पर अस्पताल में आए लोगों ने भी इस पहल की सराहना की। चिकित्सकों का मानना है कि यदि लोग समय रहते अपनी दिनचर्या में छोटे-छोटे बदलाव करें तो बड़ी स्वास्थ्य समस्याओं से बचा जा सकता है और समाज को  ‘साइलेंट किलर’ के खतरे से काफी हद तक सुरक्षित बनाया जा सकता है।