रेलवे स्टेशन व ट्रेनों में मोबाइल चोरी करने वाले पारसी गैंग का जीआरपी ने किया भंडाफोड़

-गिरोह का मुखिया समेत तीन शातिर गिरफ्तार, 53 लाख कीमत के 128 मोबाइल फोन बरामद
-यात्रियों के मोबाइल चोरी कर डीलर के माध्यम से बांग्लादेश बेचते थे मोबाइल

गाजियाबाद। रेलवे स्टेशन व ट्रेनों में यात्रियों के मोबाइल चोरी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए एक बार फिर राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) की टीम ने मुखिया समेत तीन शातिर मोबाइल चोरों को गिरफ्तार किया है। जिनके कब्जे विभिन्न कंपनी के 35 लाख से अधिक महंगे मोबाइलों को बरामद किया है। पकड़े गए आरोपी मात्र तीन से चार माह में करोड़ों की मोबाइल चोरी कर बेच चुके है। आरोपियों से बरामद मोबाइल मात्र 15 दिन में हुई चोरी के बरामद हुए है। जो कि पूर्व में भी चोरी के मामले में जेल जा चुके है। जेल से छूटने के बाद फिर से मोबाइल चोरी की वारदातों को अंजाम देने लगे थे। चोरी के मोबाइल को फरार डीलर बिहार/पश्चिम बंगाल के रास्ते बॉर्डर पार कर बांग्लादेश में बेचता था। जिसकी गिरफ्तारी के लिए जीआरपी की टीम ने प्रयास तेज कर दिए है। गौरतलब हो कि रेलवे स्टेशन व ट्रेनों में मोबाइल चोरी की घटना का जीआरपी की टीम पूर्व में भी खुलासा कर चुकी है। जिसमें करोड़ों रुपये बरामद मोबाइलों को उनके मालिक को दे चुकी है। रेलवे स्टेशन व ट्रेनों में चोरी की घटनाओं में रोक लगाने के लिए जीआरपी की टीम शातिरों को पकडऩे के साथ जागरूकता अभियान भी चलाती है। जिससे लोग जागरूक हो सकें। क्योंकि पकड़े गए शातिर चोरी से पहले यात्रियों से मेलजोल बढ़ाते है और उसके बाद उन्हें टारगेट कर उनके मोबाइल व अन्य सामानों की चोरी की वारदातों को अंजाम देते थे।

गाजियाबाद रेलवे स्टेशन जीआरपी कार्यालय में बुधवार को सीओ जीआरपी सुदेश कुमार गुप्ता ने जीआरपी प्रभारी अनुज मलिक की मौजूदगी में बताया मंगलवार देर रात दरोगा सत्यपाल सिंह, सत्येन्द्र कुमार व अमित कुमार की टीम ने चेकिंग के दौरान प्लेटफार्म नंबर- 5/6 पर दिल्ली साईड लगे साइन बोर्ड से आगे बने यात्री सीट पर बैठे रविन्द्र उर्फ पारसी पुत्र पत्थरबिन्द निवासी ग्राम राजारानी तालाब खड़गपुर जिला मुंगेर बिहार, दीपक पुत्र सौदागर निवासी शिवनंदनपुर सुल्तानगंज जिला भागलपुर बिहार और गौतम पुत्र शम्भूबिन्द निवासी ग्राम मकोला  खड़गपुर जिला मुंगेर बिहार को गिरफ्तार किया है। जिनके कब्जे से चोरी के 128 मोबाइल फोन जिनकी (अनुमानित कीमत 35 लाख 20 हजार रुपये) और 6 हजार रुपये बरामद किया गया। गिरोह का मुखिया रविन्द्र उर्फ पारसी है। जो कि पूर्व में कई बार मोबाइल चोरी के मामले में जेल जा चुका है। जेल से छूटने के बाद अपने साथियों के साथ मिलकर रेलवे स्टेशन व ट्रेनों में यात्रियों से पहले मेलजोल बढ़ाते थे। उसके बाद उनके किमती सामान व मोबाइल को टारगेट करते थे। मौका पर मोबाइल चोरी करने अगले स्टेशन व आउटर पर उतर जाते थे। चोरी किए मोबाइलों को डीलर को बेच देते हैं।

उन्हीं मोबाइल को डीलर आगे बिहार/पश्चिम बंगाल के रास्ते बॉर्डर पार कर बांग्लादेश में बेच देता था। जीआरपी प्रभारी अनुज मलिक ने बताया पूछताछ में पता चला है कि आरोपियों से बरामद मोबाइल मात्र 15 दिन में हुई चोरी का बरामद हुआ है। जो कि तीन-चार माह पूर्व ही जेल से छूटकर आए है। जेल से छूटने के बाद फिर से मोबाइल चोरी की वारदातों को अंजाम देने लगे। आरोपी अब तक करोड़ों रुपये के मोबाइल को डीलर को बेच चुके है। रविन्द्र उर्फ पारसी के खिलाफ जीआरपी गाजियाबाद में 5 मुकदमे दर्ज है। जिसके पास से करीब 58 मोबाइल बरामद किया गया। दीपक के खिलाफ जीआरपी गाजियाबाद व दिल्ली में पांच जिसके पास से 40 मोबाइल बरामद किया गया। गौतम के खिलाफ जीआरपी गाजियाबाद व दिल्ली में 6 मुकदमे दर्ज है और उसके पास से 30 मोबाइल बरामद किया है। जीआरपी प्रभारी ने बताया आरोपी मोबाइल चोरी करने से पहले ऐसे लोगों की तलाश करते थे, जिनके पास नए मोबाइल और महंगे मोबाइल होते थे। क्योंकि उन मोबाइल को चोरी करने के बाद उन्हें अच्छे पैसे मिल जाते थे। फरार डीलर की गिरफ्तारी के लिए प्रयास किया जा रहा है।