-गांजा तस्करी से लेकर कब्रिस्तान जमीन पर नशाखोरी
-30 साल बाद 100 करोड़ की 30 बीघा जमीन को प्रशासन ने कराया कब्जामुक्त
गाजियाबाद। सरकारें कई बदली, बदले हुक्मरान। मगर डासना स्थित कब्रिस्तान की जमीन पर जिन बंजारों ने पिछले 30 साल पहले कब्जा कर वहां पर झुग्गी-झोपड़ी डाल रखी थी। उसी कब्रिस्तान की जमीन को कब्जामुक्त कराने की हिम्मत कभी नहीं हुई।
जिलाधिकारी राकेश कुमार सिंह के निर्देश पर हालांकि 30 साल बाद कब्रिस्तान की 30 बीघा जमीन प्रशासन-पुलिस की टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद कब्जा मुक्त करा ली गई। इस जमीन की वर्तमान में 100 करोड़ रुपए से अधिक कीमत है। एसडीएम सदर देवेंद्र पाल सिंह की यह बड़ी कार्रवाई मानी जा रही हैं। उन्होंने पूरी मुस्तैदी के साथ कब्रिस्तान की इस जमीन को कब्जा मुक्त कराकर डासना नगर पंचायत को 100 करोड़ रुपए से अधिक की जमीन को कब्जा में दिला दिया। चौंकाने वाली बात है कि कब्रिस्तान की जमीन पर पहले अवैध रूप से कब्जा किया गया। उसके बाद यहां पर झुग्गी-झोपड़ी डालने के साथ पक्की दीवारें भी बना ली गई। इस कार्रवाई के बाद हालांकि इनमें रहने वालों को सुविधाएं मुहैया कराने वाले कटघरे में खड़े हो गए हैं। यहां पर गांजे की तस्करी से लेकर नशा और अय्याशी शाम को खूब होती रहीं। बिना मकान और जमीन के आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र तक बना दिए गए थे, बिजली कनेक्शन मिल गए थे। झुग्गियों को अय्याशी का अड्डा बना दिया गया। शाम ढलने के बाद नशे और अय्याशी के लिए सफेदपोश भी यहां पर अक्सर आया करते थे। जिनके संरक्षण में कब्जाधारियों का हौसला बढ़ता गया। विरोध करने वालों पर जानलेवा हमला करते थे।
वर्ष-1991 से इन लोगों ने यहां पर आकर बसना शुरू किया था। अब यहां 200 से अधिक झुग्गियां तैयार हो गई थीं और उनमें रहने वाले 1000 से अधिक लोगों में आधे से ज्यादा के मतदाता पहचान पत्र बन गए। जमीन को कब्जामुक्त कराने में जिला प्रशासन को मुश्किल आ रही थीं। एसडीएम सदर देवेंद्र पाल सिंह ने बताया कि भारी संख्या में पुलिसफोर्स और टीम नहीं होती तो जमीन कब्जामुक्त कराना संभव नहीं था।
लेकिन डासना में कब्रिस्तान की जमीन से कब्जा हटाने के लिए पहुंचे अधिकारियों को रोकने के लिए पहले उन पर पथराव किया। इसके अधिकारियों ने बचाव के इंतजाम किए थे, इस वजह से बच गए तो उनको भगाने के लिए 20 से अधिक घोड़े उनकी और दौड़ा दिए गए। हालांकि वह बच गए। जलते सिलेंडर भी फेंके गए। जबकि 9 झुग्गियों में भी आग लगा दी गई। मौके पर मौजूद दमकल की टीम ने आग बुझाई। हालांकि कब्रिस्तान की जमीन से कब्जा हटाने का पूर्व में भी प्रयास किया गया। मगर कब्जा करने वालों ने पुलिस और प्रशासन की टीम पर हमला कर दिया था। दारोगा के हाथ की अंगुली तोड़ दी गई थी, जबकि एक कर्मचारी का सिर फोड़ दिया गया था। जिसके बाद टीम को वहां से वापस लौटना पड़ा था। वहीं, डासना नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी मनोज कुमार मिश्र ने बताया कि कब्जामुक्त कराई 30 बीघा से ज्यादा 100 करोड़ रुपए की जमीन की तार फेंसिंग और लेवल कराने की कार्रवाई जल्द शुरू कराएंगे। मसूरी थाने में कुछ लोगों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई गई है। इनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
















