गाजियाबाद। आवास एवं विकास परिषद की सिद्धार्थ विहार योजना में सहकारी आवास समितियों को अनुपात से अधिक भूमि आवंटन घोटाले के मामले में बुधवार को मेरठ मंडल की मंडलायुक्त सेल्वा कुमारी जे जीडीए सभागार में बैठक करने के लिए पहुंची। जीडीए सभागार में मंडलायुक्त सेल्वा कुमारी जे ने जिलाधिकारी राकेश कुमार सिंह, अपर आयुक्त महेंद्र प्रसाद, अपर आयुक्त चैत्रा वी, संयुक्त आवास आयुक्त अंबरीश श्रीवास्तव, जीडीए के फाइनेंस कंट्रोलर आदि अधिकारियों की मौजूदगी में सहकारी आवास समितियों के पदाधिकारियों के साथ बैठक करते हुए उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका दिया। दरअसल, प्रदेश शासन ने जमीन आवंटन के मामले में घोटाले के आरोप लगाए जाने पर मेरठ मंडल की मंडलायुक्त को इसकी जांच के लिए नामित किया है।

बुधवार को मंडलायुक्त सहकारी आवास समितियों का पक्ष सुनने के लिए जीडीए सभागार में पहुंची थीं। भूमि आवंटन करने के मामले की जांच अब मंडलायुक्त कर रही हैं। समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि आवास एवं विकास परिषद ने अनुपात से कम जमीन आवंटित की है। इस पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। फिलहाल जांच कमेटी ने समितियों के पक्ष को सुना। मंडलायुक्त अपनी जांच रिपोर्ट बनाकर अब शासन को भेजेंगी। शासन स्तर पर इस प्रकरण पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। यह जांच कमेटी मंडलायुक्त की अध्यक्षता में बनी है।
बता दें कि श्रम कल्याण परिषद के पूर्व अध्यक्ष सुनील भराला ने पिछले दिनों शासन में आवास एवं विकास परिषद द्वारा सिद्धार्थ विहार आवास योजना में सहकारी समितियों को अनुपात से ज्यादा भूमि आवंटित किए जाने के अलावा कई अन्य आरोप लगाते हुए शिकायत की थी। वहीं, मंगलवार को सिद्धार्थ विहार आवासीय योजना के अंदर आवासीय समिति वेलफेयर एसोसिएशन ने प्रेस वार्ता कर आंदोलन की चेतावनी दी थी। केंद्रीय जलायोग सहकारी आवास समिति के उपाध्यक्ष अरविंद सक्सेना ने 12 समितियों की तरफ से पक्ष रखा था। सहकारी समितियों ने आवास विकास परिषद और उत्तर प्रदेश श्रम कल्याण परिषद के पूर्व अध्यक्ष सुनील भराला पर उत्पीडऩ के आरोप लगाए हैं। उन्होंने बताया कि 1998 में उनकी भूमि सिद्धार्थ विहार योजना में शामिल की गई थी। पूर्व अध्यक्ष सुनील भराला पर अड़चन पैदा करने के आरोप लगाए। समितियों को उनकी भूमि के सापेक्ष 50 प्रतिशत अविकसित भूमि ही परिषद ने दी। इसके साथ ही विकास शुल्क भी लिया।
अब कुछ समितियों ने नियमानुसार निजी डेवलपर के साथ साझेदारी कर फ्लैट बनाना शुरू किया है। इसमें एक श्रम कल्याण परिषद के पूर्व अध्यक्ष सुनील भराला अड़चन पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। उनकी शिकायत पर एक बार परिषद के अधिकारी उनके भूमि आवंटन की जांच कर रहे हैं। जांच रिपोर्ट समितियों के पक्ष में आई तो उन्होंने दूसरी शिकायत कर दी। वहीं,समितियों पर 170 करोड़ रुपए का घोटाले करने का आरोप लगाया जा रहा है। जबकि आवास एवं विकास परिषद ने सिद्धार्थ विहार की समितियों को 50 प्रतिशत अविकसित जमीन दी है। उधर, अजंतापुरम की समितियों को 80 प्रतिशत जमीन दी गई है। उन्होंने समितियों पर 170 करोड़ का घोटाले का आरोप लगाया है जबकि अगर वह समितियों पर समायोजन शुल्क बकाया होने की बात कह रहे हैं तो वह बकाया है ना कि घोटाला हैं।
















